Bihar Politics: बिहार में आपरेशन लोटस के पीछे मोदी की रणनीति

Bihar Politics: लोकसभा चुनावों की घोषणा से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन तीनों राज्यों का दौरा किया है, जहां से इंडी गठबंधन की ओर से एनडीए को बड़ी चुनौती मिलने की बात कही जा रही है|

ये तीन राज्य हैं, महाराष्ट्र, बंगाल और बिहार। इन तीनों राज्यों की लोकसभा में 130 सीटें हैं| महाराष्ट्र और बिहार में पिछली बार एनडीए ने यूपीए का लगभग सूपड़ा ही साफ़ कर दिया था| इन दोनों राज्यों की 88 सीटों में से 81 सीटें एनडीए ने जीती थीं|

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बंगाल की भी 42 से 18 सीटें भाजपा जीती थीं| यानी 130 में से 99 सीटें एनडीए के पास थीं| नरेंद्र मोदी ज्यादा नहीं, तो 99 का आंकडा बरकरार रखने की रणनीति पर काम कर रहे हैं| इन तीनों राज्यों में अलग अलग पार्टियां भाजपा के लिए चुनौती हैं।

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे और शरद पवार की क्षेत्रीय पार्टियों के अलावा कांग्रेस चुनौती है, तो बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और बिहार में आरजेडी चुनौती है| कांग्रेस इन तीनों राज्यों में कहीं नहीं है| इन तीनों राज्यों में सबसे दिलचस्प राजनीति बिहार में हो रही है, क्योंकि बिहार में भाजपा सिर्फ लोकसभा चुनावों के लिए नहीं, बल्कि विधानसभा चुनावों के लिए भी अभी से गोटियाँ बिछा रही है|

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2020 के बिहार विधानसभा चुनावों में लालू-तेजस्वी यादव की आरजेडी को 75 सीटें मिलीं थीं, जबकि भाजपा को उससे एक कम 74 सीटें मिलीं थीं| एनडीए में भाजपा को 74, जेडीयू को 43, जीतन राम मांझी के हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा को 4 और मुकेश सहनी की विकासशील इन्साफ पार्टी (वीआईपी) को 4 सीटें मिलीं थीं|

महांगठबंधन में आरजेडी को 75, कांग्रेस को 19, भाकपा माले को 12, भाकपा और माकपा को 2 -2 सीटें मिलीं थीं| इस तरह भाजपा के एनडीए को 125 और राजद के महागठबंधन को 110 सीटें मिलीं| इसके अलावा एमएआईएम को 5, बसपा को एक, एलजेपी को एक और निर्दलीय एक जीता| यहाँ ख़ास बात यह थी कि आरजेडी, जनता दल और कांग्रेस की सीटें घटी थीं, जबकि भाजपा और भाकपा माले की सीटें घटी थीं, फिर भी 75 सीटों के साथ आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी थी|

एनडीए की सरकार आसानी से बन गई थी, जो अगस्त 2022 तक चलती रही| इस दौरान मुकेश सहनी की वीआईपी के एक विधायक के देहांत के बाद उपचुनाव को लेकर भाजपा-वीआइपी में झगड़ा हो गया| झगड़े के चलते उनकी पार्टी के बाकी बचे तीनों विधायक भाजपा में शामिल हो गए तो भाजपा 77 सीटों के साथ पहले नंबर की पार्टी बन गई थी| वीआईपी के जिस विधायक के देहांत के बाद उपचुनाव हुआ वह आरजेडी जीत गई|

इसके बाद आरजेडी ने एमआईएम के भी पांच में से चार विधायकों को तोड़कर अपनी संख्या 80 कर ली थी| इस बीच बसपा का एकमात्र विधायक और लोजपा का एकमात्र विधायक जेडीयू में चला गया था| अगस्त 2022 में नीतीश कुमार एनडीए छोड़कर महागठबंधन में शामिल हो गए और फरवरी 2024 में वह दुबारा एनडीए में चले आए|

इस बीच 2020 से जनवरी 2024 तक आरजेडी, कांग्रेस या जेडीयू से कोई बड़ा दलबदल नहीं हुआ था| लेकिन नीतीश कुमार के एनडीए में लौटने के बाद परिदृश्य बड़ी तेजी से बदल रहा है| इसकी शुरुआत खुद तेजस्वी यादव ने की थी, जब उन्होंने नीतीश कुमार के एनडीए में लौटने को स्वीकार करने के बजाए एनडीए के विधायकों को तरह तरह के प्रलोभन देकर उनके विश्वासमत को परास्त करने की कोशिश की|

उसका उलटा असर यह हुआ कि विश्वास मत के समय आरजेडी के तीन विधायकों प्रहलाद यादव, नीलम देवी और चेतन आनन्द ने क्रास वोटिंग करते हुए नीतीश सरकार को समर्थन दे दिया| इसके बाद से आरजेडी और कांग्रेस के विकेट लगातार गिर रहे हैं| 28 फरवरी को आरजेडी की संगीता देवी और कांग्रेस के दो विधायक सिद्धार्थ सौरव और मुरारी गौतम भी भाजपा में शामिल हो गए थे|

बजट सत्र के आख़िरी दिन आरजेडी के एक और विधायक भरत बिन्द भाजपा में शामिल हो गए| वह पहली बार चुन कर आए हैं, लेकिन उनकी यह तीसरी पार्टी है, 2015 का चुनाव वह बसपा टिकट पर लड़कर हारे थे, और 2020 का चुनाव लालू यादव की पार्टी से लड़कर जीते थे|

सत्रावसान के बाद कांग्रेस की विधायक नीतू सिंह ने कहा कि अगर भाजपा उन्हें नवादा से लोकसभा का उम्मीदवार बना दे, तो वह भाजपा में शामिल हो जाएँगी| इसके बाद उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा को मिठाई खिलाते हुए उनके वीडियो वायरल हो गए| जबकि नीतू सिंह के परिवार में झगड़ा शुरू हो गया, इसके बाद नीतू सिंह ने सफाई दी कि वह नवादा से लोकसभा चुनाव लड़ना चाहती हैं, लेकिन अभी उन्होंने कांग्रेस नहीं छोडी है| वह तेजस्वी यादव से मिलकर आग्रह करेंगी कि गठबंधन में नवादा सीट कांग्रेस को दी जाए| इसलिए दलबदल के साथ ही लोकसभा की टिकटों का भी हिसाब बिठाया रहा है|

इस तरह पिछले एक महीने में महा गठबंधन के सात विधायक एनडीए में शामिल हो चुके हैं, जिससे आरजेडी और कांग्रेस में खलबली मची है| दोनों दलों ने दलबदल करने वाले विधायकों की सदस्यता निरस्त करने के लिए स्पीकर को चिठ्ठी लिखी है|

जहां तक दलबदल में सदस्यता रद्द का सवाल है, तो जब विपक्ष से सत्ता पक्ष में दलबदल होता है, तो गाज इतनी जल्दी नहीं गिरती है| क्योंकि स्पीकर सत्ता पक्ष का ही होता है| लेकिन जब दलबदल सत्ता पक्ष से विपक्ष की तरफ हो, तो गाज तुरंत गिरती है, जैसे हिमाचल में हुआ|

बजट पर व्हिप के नाम पर उन छह कांग्रेस विधायकों की सदस्यता तुरंत रद्द कर दी गई, जिन्होंने राज्यसभा चुनाव में क्रास वोटिंग की थी| जबकि बजट तो वॉइस वोट से पास हुआ था| तो फिर व्हिप उलंघन की बात ही कहां हुई| लेकिन बिहार के स्पीकर नन्द किशोर यादव तुरंत कोई फैसला करेंगे, यह भूल जाईए| इसलिए शनिवार को जब आरजेडी ने अपने दलबदल करने वाले विधायकों की सदस्यता रद्द करने की चिठ्ठी लिखी, तो मनोज झा ने स्पीकर को सुप्रीमकोर्ट में जाने की धमकी भी दी है|

तेजस्वी यादव की जन विश्वास यात्रा के बाद 3 मार्च को पटना में महारैली होने वाली है, जिसमें राहुल गांधी भी पहुंच रहे हैं| राहुल गांधी के पटना पहुंचने से पहले ही कांग्रेस में विभाजन की भूमिका शुरू हो गई है|

कांग्रेस के 19 विधायक हैं, दलबदल क़ानून के मुताबिक़ अगर दो तिहाई विधायक पार्टी छोड़ दें, तो उन पर क़ानून लागू नहीं होता| दो विधायक भाजपा में जा चुके हैं, ग्यारह और छोड़ दें, तो उनकी सदस्यता रद्द नहीं होगी| खेला यही होने वाला है, और अगले आठ-दस दिन में होने वाला है|

कांग्रेस से भाजपा में जाने वाले सिद्धार्थ सौरव ने संकेत दे दिया है कि 11 विधायक और आ रहे हैं| तो बाकी एक दो को छोड़कर कांग्रेस के पास मुस्लिम विधायक ही बचेंगे| इसे श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर का असर भी कहा जा रहा है|

नीतीश कुमार चार मार्च को इंग्लेंड जा रहे हैं, वह आठ को लौटेंगे| तब तक तस्वीर बदल चुकी होगी| भाजपा के विधायकों की संख्या 82 हो गई है और अगर कांग्रेस के 11 एमएलए और आ गए, तो भाजपा के विधायकों की संख्या 93 हो जाएगी|

भाजपा धीरे धीरे खुद ही सत्ता की तरफ आगे बढ़ रही है, इसलिए जेडीयू में भी विभाजन की खबरें उड़ रही हैं| अफवाहों का दौर जारी है, तेजस्वी कैंप अफवाह उड़ा रहा है कि भाजपा और जेडीयू के 30 विधायक उनके संपर्क में हैं, सरकार फिर गिरेगी|

एक अफवाह यह उड़ रही है कि लोकसभा चुनावों के बाद जेडीयू को तोड़कर भाजपा खुद की सरकार बना लेगी| अफवाह यहाँ तक उड़ रही है कि भाजपा से डर कर नीतीश फिर पाला बदल लेंगे| अब नीतीश कुमार की छवि ही ऐसी है, तो कोई क्या कर लेगा|

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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