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Ram Mandir and Rajasthan: राम मंदिर निर्माण हेतु योगदान में राजस्थान सबसे आगे

Ram Mandir and Rajasthan: अयोध्या राजस्थान से बहुत दूर है। प्रदेश की राजधानी जयपुर से कुल 708 किलोमीटर और गूगल मैप के अनुसार कार से 12 घंटे 36 मिनट दूर। लेकिन अयोध्या में बन रहे भगवान राम के मंदिर की वजह से राम, राजस्थान और अयोध्या का नाता बेहद नजदीक का हो गया है।

राम मंदिर में लगे पत्थर राजस्थान से हैं, उन पत्थरों पर नक्काशी करने वाले कारीगर राजस्थान से हैं। खास बात यह है कि मंदिर उत्तर प्रदेश में बन रहा है, लेकिन सबसे ज्यादा आर्थिक योगदान राजस्थान से अयोध्या पहुंचा है, तो आरती का घी व प्रसाद बनाने के लिए तेल भी राजस्थान से अयोध्या पहुंचा है।

ram mandir

राम मंदिर से जयपुर, जोधपुर, भरतपुर, सिरोही, आबूरोड़, दौसा और मकराणा का नाता बड़ा गहरा हो गया है।

अयोध्या के राम मंदिर की भव्यता में जो निखार दिख रहा है, उसमें राजस्थान के पत्थरों और कारीगरों का खास योगदान है। भरतपुर, जोधपुर, जयपुर, मकराणा व भीलवाड़ा सहित सिरोही जिलों का पत्थर राम मंदिर को बनाने में लगा है, व लगातार लगता जा रहा है।

दुनिया भर में संगमरमर पत्थर के लिए मशहूर राजस्थान के मकराणा का संगमरमर यानी सफेद मार्बल का इस्तेमाल राम मंदिर के लिए किया गया है। मंदिर के भूतल पर हजारों वर्गफीट में मार्बल लगाया गया है, जो मकराणा से अयोध्या गया है। सिरोही जिले के सोमपुरा कारीगरों द्वारा मंदिर में लगने वाले पत्थरों को तराशा गया है।

बरसों बरसों तक सिरोही जिले के पिंडवाड़ा के आस पास के गांवों में सैंकड़ों सोमपुरा कारीगर मंदिर के स्तंभ तराशते रहे। यहां के सोमपुरा कारीगरों की नक्काशी कला बेमिसाल है। लगातार 25 साल तक लोग पत्थरों पर नक्काशी करते रहे, और पहली बार उनकी मेहनत से तराशे गए पत्थरों को 2019 में अयोध्या भेजने का काम शुरू हुआ।

अयोध्या से रामेश्वरम तक भगवान श्रीराम के वन गमन मार्ग पर श्रीराम स्तंभ लगाने की भी योजना है। लगभग 2500 किलोमीटर लंबे इस वन गमन मार्ग पर श्रीराम स्तंभ लगाने के लिए कुल 290 स्थानों को चिन्हित किया गया है। श्रीराम स्तंभों का निर्माण भी राजस्थान के सिरोही जिले के आबूरोड में हो रहा है।

राम मंदिर के पास लगने वाला पहला श्रीराम स्तंभ अक्टूबर 2023 में ही आबूरोड से अयोध्या पहुंच गया है। जोधपुर के सूरसागर का छीत्तर पत्थर बहुत लोकप्रिय है, जोधपुर का भव्य महल उम्मेद भवन पैलेस भी उसी पत्थर से बना है। उन्हीं छीतर पत्थरों से राम मंदिर के सुंदर और विशाल 32 द्वार तैयार किए गए है। राजस्थान में दौसा जिले के सिकंदरा निवासी पत्थर पर नक्काशी करने वाले कारीगर साढ़े तीन साल से अयोध्या में काम कर रहे हैं। सिंकदरा में भी सिरोही जिले की तरह ही पिछले कई सालों से राम मंदिर निर्माण में लगने वाले झरोखों, तोरण द्वारों और स्तंभों पर नक्काशी का काम चल रहा था।

बंसी पहाड़पुर का नाम बहुत कम लोगों ने सुना होगा, लेकिन नागर शैली में बन रहे राम मंदिर के निर्माण में राजस्थान के कई इलाकों से पत्थर और अन्य सामग्री जा रही है, उसमें बंसी पहाड़पुर का पत्थर भी बेहद अहम है। मंदिर के दृश्य भाग में सतह से ऊपर बादामी रंग के जिन बलुआ पत्थरों का उपयोग किया जा रहा है, वह राजस्थान के भरतपुर जिले के बयाना इलाके के बंसी पहाड़पुर की खदानों का है, जो अपने लुभावने रंग के कारण काफी आकर्षक है।

यहां से यह पत्थर पहले अवैध रूप से निकाला जा रहा था, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को खबर मिली, तो वे नाराज हुए और अधिकारियों से पूछा कि पवित्र कार्य के लिए गलत काम क्यों? तत्कालीन मुख्यमंत्री गहलोत ने 14 जून 2021 को अधिकारिक रूप से कहा कि प्रदेश के बंशी पहाड़पुर से अवैध खनन कर गुलाबी पत्थर राम मंदिर के लिए न भेजा जाए। गहलोत ने कहा कि हमने प्रयास करके यहां हो रहे पत्थर खनन के कार्य को भारत सरकार से लीगल तरीके से वैधता दिलवाई, जिसका हमें संतोष है।

रामलला के मंदिर में लगा हल्के लाल रंग का सेंड स्टोन राजस्थान से गया है। भीलवाड़ा जिले के बिजौलिया के पास उपरमाल की खानों का पत्थर राम मंदिर में लगा है। बिजौलिया की 3 कंपनियों से राम मंदिर को लगभग 5 लाख वर्ग फुट पत्थर सप्लाई हुआ है, जो वहां पर राम मंदिर की परिक्रमा, वॉक वे, पार्किंग एरिया और कुबेर टीले में लग रहा है।

बिजोलिया से अब तक 100 ट्रकों के माध्यम से 4 हजार टन से अधिक सैंड स्टोन राम मंदिर के लिए सप्लाई किया जा चुका है। प्राण प्रतिष्ठा के लिए भगवान राम की कुल तीन मूर्तियों का निर्माण हुआ, उनमें से एक का निर्माण जयपुर के मूर्तिकार सत्यनारायण पांडे ने किया है। उन्होंने सात महीनों में अयोध्या में रहकर इस मूर्ति को तैयार किया है।

रामलला की यह मूर्ति मकराना के मार्बल पत्थर की है, जो 90 साल पहले खान से निकाला गया था और 40 साल से उनके पास पड़ा था। हालांकि वह मूर्ति गर्भगृह में नहीं स्थापित होगी लेकिन उसे भी मंदिर में ही स्थापित किया जाएगा।

किसी भी बड़े काम में बड़ी और मजबूत आर्थिक स्थिति सबसे पहली जरूरत होती है। राजस्थान के धर्मप्रेमियों ने इस अवधारणा को समझते हुए राम मंदिर के निर्माण में आर्थिक सहयोग देने में सबसे बड़ा योगदान दिया है। आंकड़े बताते हैं कि राजस्थान की जनता ने राम मंदिर के निर्माण में आर्थिक सहयोग देने के मामले में उत्तर प्रदेश को भी पीछे छोड़ दिया है।

राम मंदिर निधि समर्पण अभियान में राजस्थान से 500 करोड़ रुपए से भी ज्यादा का सहयोग रहा है। यह अभियान पूरे देश में चला, जिसमें सबसे अधिक सहयोग राशि राजस्थान की करीब 500 करोड़ रुपये में भी अकेले जोधपुर शहर से सर्वाधिक 214 करोड़ रुपये दान मिला है। जोधपुर के एक भिखारी ने 7 हजार रुपए का आर्थिक सहयोग राम मंदिर के लिए दिया था। चंदा जमा करनेवाले कार्यकर्ताओं ने उसकी हालत देखकर मना किया, तो भी उसने जबरदस्ती दिया।

इसी तरह से अस्पताल में भर्ती एक बीमार महिला ने रामलला के लिए अपने गहने और जेवर दान करने की भावना जताई, लेकिन उसे भी मना कर दिया गया। बाद में उस महिला की मृत्यु हो गई, तो उसके परिवार जनों ने वह ज्वेलरी विश्व हिंदू परिषद को भेंट की। राजस्थान में घर घर जाकर चंदा जुटाया गया था, जिसमें लोगों ने अपार उत्साह के साथ बहुत बढ़-चढ़ कर सहयोग दिया। राजस्थान के बाद उत्तर प्रदेश सहयोग राशि देने में दूसरे नंबर पर रहा है, जहां से राम मंदिर निर्माण निधि समर्पण अभियान में करीब 200 करोड़ रुपए की राशि एकत्रित हुई है।

इसी तरह से राम मंदिर के प्रतिष्ठा महोत्सव के विभिन्न आयोजनों में भी अपने सहयोग के लिए लोग बेहद उस्ताहित होकर आगे आ रहे हैं। प्रतिष्ठा महोत्सव में आने वाले लोगों के लिए भोजन व प्रसाद बनाने हेतु राजस्थान से 2100 डिब्बे तेल भेजा जा रहा है, यह तेल वहां सीता रसोई में भोजन व प्रसाद के लिए लगेगा।

जोधपुर से घी एवं हवन सामग्री भी बैलगाड़ी के माध्यम से अयोध्या पहुंची है, जिसका उपयोग राम मंदिर में 22 जनवरी को प्राण-प्रतिष्ठा में किया जाएगा। अयोध्या में राम मंदिर की प्रतिष्ठा से पहले जो हवन, यज्ञ, दीप, आरती और अन्य प्रज्वलित पवित्र कार्य चल रहे हैं, उनमें इस्तेमाल होने के लिए सैकड़ों किलो देसी घी भी राजस्थान से गया है। यह देसी घी उन गायों के दूध से बना है, जिनको गौ तस्करों से बचाकर कत्लखानों में कटने जाने से रोका गया तथा गौशालाओं में रखा गया था। राम मंदिर की पहली आरती भी उसी घी से होगी।

इसी तरह मेंहदीपुर बालाजी मंदिर की ओर से 1 लाख 51 हजार प्रसाद के डिब्बे अयोध्या पहुंच रहे हैं जो प्रसाद स्वरूप आनेवाले सभी भक्तों को वितरित किये जाएंगे। कंबल और रामनाम का एक लाख पटका भी मेंहदीपुर बालाजी मंदिर की ओर से अयोध्या में वितरित किये जाएंगे जो राम के अनन्य सेवक मेंहदीपुर वाले हनुमानजी की ओर से एक प्रेमपूर्वक भेंट होगी।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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