Atique Ahmed: अपराध और राजनीति के घालमेल की कहानी

2012 के विधानसभा चुनाव के समय अतीक अहमद जेल में बंद था।चुनाव लड़ने के लिए उसने इलाहाबाद हाई कोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दी।लेकिन डर के मारे 10 जजों ने उसकी जमानत याचिका पर सुनवाई करने से ही हाथ खड़े कर लिए।

Atiq Ahmed News

भगवान शिव की नगरी प्रयागराज में कभी अतीक अहमद का खौफ था। कभी वह खुलेआम पुलिस को धमकाता था, कभी मीडिया के सामने ऐंठ दिखाता था। जेल में बैठे बैठे उसने राजू पाल हत्याकांड के गवाह उमेशपाल की दिन दहाड़े हत्या करवा दी। हत्यारों में से एक उसके बेटे असद की मुठभेड़ में मौत के बाद भी उसने पुलिस को धमकाया था कि ज़िंदा रहा तो एक एक को देख लूंगा। लेकिन जिस तरह 24 फरवरी को उमेशपाल को मारा गया था, ठीक उसी तरह 15 अप्रेल को अतीक अहमद और उसका भाई अशरफ मारा गया

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अरबों की सम्पत्ति छोड़ गया

साठ साल पहले 10 अगस्त 1962 को जब अतीक का जन्म हुआ था, तो उसके पिता फिरोज अहमद तांगा चलाकर अपने परिवार का पेट पालते थे, लेकिन अतीक अरबपति ही नहीं बना, बल्कि पूरा उत्तर प्रदेश में उसके खौफ का असर था। हत्या, अपहरण, अवैध वसूली का लंबा क्रिमिनल रिकार्ड बना कर वह खुद हत्या का शिकार हुआ, इस तरह अति का अंत हो गया।

बात शुरू होती है 1987 से जब वह 25 साल का था, प्रयागराज में चांद बाबा नाम का एक डॉन हुआ करता था। उसके नाम से लोगों के मन में खौफ पैदा हो जाता था।क्या नेता और क्या कारोबारी। आम जनता से लेकर पुलिस प्रशासन तक घबराता था। अतीक अहमद भी चांद बाबा की तरह डॉन बनने की राह पर चल पड़ा था, लेकिन हालात ऐसे पैदा हुए कि उसे एक मामले में पुलिस के सामने सरेंडर करना पड़ा। एक साल बाद जेल से बाहर निकला तो उसे समझ आ गया था कि बिना सियासत के क्राईम की दुनिया में टिकना मुश्किल है।

उत्तर प्रदेश में 1989 में विधानसभा चुनाव हो रहे थे।इलाहाबाद पश्चिम सीट से चांद बाबा चुनाव मैदान में उतरा था।अतीक ने भी वहीं से पर्चा भर दिया। सियासत के मैदान में दोनों अपराधियों का आमना सामना हो गया। काउंटिंग के दिन अतीक अहमद के कुछ गुंडे रोशनबाग में एक दुकान पर चाय पी रहे थे। इसी दौरान चांद बाबा भी अपने साथियों के साथ उस दुकान पर आ गया और दोनों के बीच गैंगवार शुरू हो गई। इस गैंगवार में चांद बाबा मारा गया, इसके कुछ ही घंटों बाद आए चुनाव नतीजे में अतीक विधायक चुना गया था।

इसके बाद अतीक अहमद क्राइम और सियासत की दुनिया में तेजी से आगे बढ़ता चला गया। उसके खिलाफ एक आध नहीं 101 आपराधिक मामले दर्ज थे। उसने अपनी पूरी फैमेली को क्राइम की दुनिया में उतार लिया था। उसके भाई अशरफ अहमद पर 52 मामले दर्ज थे।अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन पर 4 आपराधिक मामले दर्ज हैं।जबकि पुलिस एनकाउंटर में मारे गए अतीक अहमद के बेटे असद के खिलाफ भी एक केस दर्ज था।

1989 में निर्दलीय विधायक चुने जाने को बाद अतीक अहमद ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1989, 1991 और 1993 में लगातार प्रयागराज की पश्चिम विधानसभा सीट से तीन चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लड़े और जीते। अतीक के बार बार चुने जाने पर मुलायम सिंह ने उसके लिए समाजवादी पार्टी के दरवाजे खोल दिए।

1996 में अतीक अहमद ने विधानसभा का चुनाव समाजवादी पार्टी के टिकट पर लड़ा और फिर से विधायक चुना गया। लेकिन 1999 में सपा छोड़कर अपना दल में शामिल हो गया। अपना दल के टिकट पर प्रतापगढ़ से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गया। 2002 में अपना दल ने अतीक को इलाहाबाद पश्चिम से चुनाव मैदान में उतारा, जहां वह जीत गया। इस बीच 2002 में अतीक अहमद ने विधायक रहते हुए नस्सन की हत्या की और 2004 में देश के जाने माने भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी के सबसे करीबी नेता अशरफ की हत्या कर दी।

2003 में यूपी में समाजवादी पार्टी की सरकार बन गई थी तो अपना दल का विधायक रहते हुए अतीक फिर समाजवादी हो गया। समाजवादी पार्टी ने 2004 लोकसभा चुनाव में अतीक को उस फूलपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़वाया, जहां कभी जवाहर लाल नेहरू जीता करते थे। अतीक अहमद फूलपुर से लोकसभा चुनाव जीत गया। विधानसभा की उसकी खाली सीट पर समाजवादी पार्टी ने अतीक के भाई अशरफ को टिकट दिया, लेकिन बसपा के राजू पाल ने अशरफ को हरा दिया। राजू पाल भी कभी अतीक के गैंग का सदस्य हुआ करता था। इसी बसपा विधायक राजू पाल की 25 जनवरी 2005 को अतीक की गैंग ने सरेआम हत्या कर दी।

रुखसाना और उसके पति सादिक इस हत्याकांड के चश्मदीद गवाह हैं।ये दोनों उस समय राजू पाल की कार में सवार थे, जब अतीक अहमद गैंग की कार सामने आ कर खड़ी हो गई थी, और उससे उतरे 9 लोगों ने राजू पर गोलियां बरसा दी थीं। इस हत्याकांड में राजू पाल के साथ उसकी कार में बैठे देवी पाल और संदीप यादव की भी मौत हुई थी। अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ समेत कुल 9 लोग राजूपाल की हत्या के आरोपी थे।

रुखसाना और सादिक ने अतीक के खिलाफ गवाही दी, तो अतीक का गैंग उनका दुश्मन बन गया। दोनों को कई बार धमकियां मिलीं, हमले हुए, घर बेचने पड़े, अभी भी डरकर जिंदगी जी रहे हैं, लेकिन ये पति पत्नी पीछे नहीं हटे। हर तारीख पर अतीक के खिलाफ गवाही देने कोर्ट में गए। इस मामले के दो और गवाह ओमप्रकाश और उमेश पाल भी थे। 24 फरवरी को उमेश पाल की हत्या कर दी गई।उमेश पाल की हत्या के बाद प्रयागराज कोर्ट ने राजू पाल हत्याकांड में अतीक और अशरफ को उम्र कैद की सजा सुना दी है।

2005 में बसपा विधायक राजू पाल की हत्या के बाद हुए उप चुनाव में मायावती ने राजू पाल की पत्नी पूजा पाल को टिकट दी, जिसकी राजू पाल से सिर्फ 10 दिन पहले शादी हुई थी, लेकिन वह अशरफ से चुनाव हार गई। हालांकि 2007 के विधानसभा चुनाव में पूजा पाल ने अशरफ को हरा दिया।

2007 में यूपी में मायावती की सरकार बन गई थी, तब अतीक अहमद पर कानूनी शिकंजा कसा गया। उसके खिलाफ लगातार मुकदमे दर्ज होने लगे तो अतीक अहमद फरार हो गया, लेकिन यूपी पुलिस ने उसे दिल्ली में गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया, 2012 के विधानसभा चुनाव के समय अतीक अहमद जेल में बंद था। चुनाव लड़ने के लिए उसने इलाहाबाद हाई कोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दी। लेकिन डर के मारे 10 जजों ने उसकी जमानत याचिका पर सुनवाई करने से ही हाथ खड़े कर लिए।

ग्यारहवें जज ने सुनवाई तो की, लेकिन डर के मारे अतीक अहमद को जमानत दे दी। वह जेल से बाहर आकर चुनाव तो लड़ा, लेकिन राजू पाल की पत्नी पूजा पाल से चुनाव हार गया। लेकिन 2012 में यूपी में सपा सरकार आ गई, तो क्राईम, क़ानून और सियासत के समीकरण फिर बदल गए। समाजवादी पार्टी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में अतीक को श्रावस्ती से टिकट दे दिया। उस चुनाव में मोदी और भाजपा की तूती बोल रही थी, तो सपा के बड़े बड़े दिग्गजों के साथ साथ अतीक भी हार गया।

उस समय यूपी में सपा का राज था, अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे।15 दिसंबर 2016 को सपा राज में ही एक विश्वविद्यालय के कर्मचारियों पर हमला करने पर अतीक को गिरफ्तार किया गया था। यहां क्राईम और सियासत ने नया मोड़ लिया, 2017 में अतीक ने फिर सपा छोड़ दी।सपा ने रिचा सिंह को टिकट दिया, बसपा ने राजू पाल की पत्नी पूजा को, लेकिन भाजपा के सिद्धार्थ नाथ सिंह ने चुनाव जीत कर माफियाओं के इस गढ़ को खत्म कर दिया।
बसपा टिकट पर चुनाव हारने के बाद राजू पाल की विधवा पूजा पाल ने सपा ज्वाइन कर ली, 2022 का चुनाव उसने सीट बदल कर सपा की टिकट पर जीत लिया।लेकिन पूजा भी अपराधियों की श्रेणी में आ चुकी है। उसके खिलाफ भी पांच केस दायर हो चुके हैं। अब वह दूसरी शादी कर चुकी है।

इस बीच 2017 में उतर प्रदेश में भाजपा की सरकार आने के बाद अतीक अहमद को राजू पाल हत्याकांड में फिर से गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया था। राजू पाल हत्याकांड में पिछले महीने ही अतीक और अशरफ को उम्र कैद की सजा सुनाई गई थी। अब सब से बड़ी बात 2019 के लोकसभा चुनाव की।उस समय अतीक अहमद नैनी जेल में बंद था, जेल से ही उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ा, उसे मात्र 833 वोट मिले थे।

पिछले साल 2022 में जेल से ही अतीक अहमद ने आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन पार्टी ज्वाइन कर ली। इस पार्टी के अध्यक्ष असदुदीन ओवेसी ने कहा है कि मुस्लिम मारा गया है। जबकि योगी सरकार के मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि जो जैसा करेगा, वैसा भरेगा। उन्होंने यह भी कहा कि आसमानी फैसला हुआ है, जब अति हो जाती है, तो कुदरत भी काम शुरू करती है।

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