Amnesty India in Karnataka: कर्नाटक में एमनेस्टी के एजेंडे में गौ हत्या और स्कूल में हिजाब
संस्था एमनेस्टी इंडिया ने ट्वीट करके कर्नाटक की कांग्रेस सरकार को तीन टास्क दिये हैं। स्कूल में हिजाब की वापसी हो, गौहत्या पर लगी रोक हटे और अल्पसंख्यक के खिलाफ हर प्रकार की हिंसा पर कठोर कार्रवाई हो।

Amnesty India in Karnataka: कैसा संयोग है कि जिस कर्नाटक में एमनेस्टी इंटरनेशनल के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज हुआ था, उसी कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार आते ही एक बार फिर एमनेस्टी इंडिया सक्रिय हो गया है। उसने कांग्रेस की सरकार के सामने अपनी मांगों की एक सूची ट्वीट की है। एक ओर जहां वह गौहत्या पर लगे प्रतिबंध को समाप्त करना चाहता है वहीं मुस्लिम छात्राओं को फिर हिजाब पहनाकर अपना "प्रोग्रेसिव" एजेंडा आगे बढ़ाना चाहता है।
एमनेस्टी जैसे सैकड़ों एनजीओ भारत में हैं, जिन्हें कांग्रेस इको सिस्टम का ही हिस्सा माना जाता है। ये एनजीओ कांग्रेस के लिए देश भर में नैरेटिव बनाने का काम करते हैं। जहां भी कांग्रेस शासन में आती है इस इको सिस्टम से जुड़े एनजीओ सक्रिय हो जाते हैं। एमनेस्टी इंडिया ऐसा ही एक बदनाम संगठन हैं।
सात साल पहले कर्नाटक में भारत विरोधी नारे लगाने के कारण एमनेस्टी पर देशद्रोह का मुकदमा चला था। वह भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल पाया गया था। सात साल पहले एमनेस्टी ने मानवाधिकार के उल्लंघन विषय पर बेंगलुरु के यूनाइटेड थियोलॉजिकल कॉलेज में 'ब्रोकन फैमिलीज' विषय पर एक सेमीनार का आयोजन किया था। इस दौरान कश्मीर पर चर्चा रखी गई थी। कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन का मुद्दा उठाते हुए कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे कट्टरपंथियों ने सेमीनार में कश्मीर की आजादी और भारतीय सेना के खिलाफ नारे लगाए। इस मामले में एमनेस्टी के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया था।
इसके बाद 2020 में इसके खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं की जांच भी हुई थी जिसके बाद एमनेस्टी ने बंगलौर स्थित अपने कार्यालय को बंद करने का ऐलान किया था। उस समय ईडी ने वित्तीय अनियमितताओं के चलते इसके एकाउण्ट को फ्रीज कर दिया था। तब एमनेस्टी ने कहा था कि उसको मोदी सरकार द्वारा जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। अब कर्नाटक में सरकार बदलते ही एमनेस्टी तत्काल प्रभाव से सक्रिय हो गया है।
कांग्रेस पर एनजीओ का प्रभाव
गुजरात में 'सिटीजन फॉर जस्टिस एंड पीस' नाम की गैर सरकारी संस्था तीस्ता सीतलवाड़ चलाती हैं। वह खुद को निष्पक्ष समाजसेवी कहती हैं लेकिन वो सोनिया गांधी की करीबी रहीं। तीस्ता के सारे मुकदमे सर्वोच्च न्यायालय में कपिल सिब्बल लड़ते रहे। कांग्रेस के लिए काम करने वाली वे अकेली एनजीओकर्मी नहीं थी। सोनिया गांधी की अध्यक्षता में चलने वाले राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) को लोग एनजीओ गिरोह ही कहकर पुकारते थे। उस समूह में फराह नकवी, दीप जोशी, हर्ष मंदर, अरुणा राय जैसे एनजीओ क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण नाम थे। इसके अलावा भी सईदा हमीद, शबनम हाशमी, तीस्ता जावेद सीतलवाड़ जैसे एनजीओ वालों का भी समूह था जो कांग्रेस इको सिस्टम के लिए काम कर रहा था।
इसीलिए जब आम आदमी पार्टी की सरकार दिल्ली में बनी तो सबसे बड़ा झटका कांग्रेस को लगा क्योंकि कांग्रेस इको सिस्टम से निकल कर प्रशांत किशोर, मेधा पाटकर, योगेन्द्र यादव जैसे दर्जनों नाम आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए थे। इसी तरह मध्य प्रदेश में नर्मदा बचाओ आंदोलन ही आम आदमी पार्टी आंदोलन हो गया।
महिलाओं के बीच मुस्लिम-गैर मुस्लिम का भेदभाव
बहरहाल यह संयोग है या प्रयोग कि जो बातें एमनेस्टी ने अपने हाल के ट्वीट में लिखी हैं, वही बातें कांग्रेस के नेता पहले से कह रहे थे। हिजाब के मुद्दे पर कांग्रेस पुनर्विचार करने की बात कर रही है। कांग्रेस और एमनेस्टी की दृष्टि में मुस्लिम बेटियों की चेहरे पर पड़ा रहने वाला पर्दा ही उनकी आजादी और प्रोग्रेस है। मर्दवादी समाज में मुस्लिम महिलाओं पर हो रहे अत्याचार पर कांग्रेस इको सिस्टम की स्त्रीवादी लेखिकाएं विमर्श करने से घबराती हैं। कर्नाटक के मुद्दे पर कोई महिलावादी एनजीओ आकर नहीं कह रहा कि मर्द पर निर्भर रहने वाली महिला कभी भी खुलकर अपने दिल की बात नहीं रख पाएगी। वह आजाद नहीं हो पायेगी।
भारत में एमनेस्टी जैसे एनजीओ और महिलावादियों के पास मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग पैकेज है। गैर मुस्लिम बेटियों के बीच वे 'फ्री द निपल' और 'किस आफ लव' अभियान चलाते हैं और मुसलमान महिलाओं के बीच हिजाब प्रथा की वापसी के लिए चिन्तित होते हैं। अब इन दोनों तरह के अभियानों को कांग्रेस इको सिस्टम का समर्थन देखकर आम आदमी कैसे समझेगा कि कांग्रेस पार्टी की पॉलिटिक्स क्या है?
बहरहाल, कर्नाटक की कांग्रेस सरकार कट्टरपंथियों और उनकी समर्थक एमनेस्टी जैसी संस्थाओं के सामने झुकने को तैयार हो गई है। कर्नाटक सरकार में मंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक खड़गे ने कहा है कि उनकी सरकार स्कूलों में हिजाब पर प्रतिबंध की समीक्षा करेगी। प्रियांक खड़गे कह रहे हैं कि "स्कूलों में हिजाब पर प्रतिबंध के कारण 18,000 अल्पसंख्यक लड़कियों ने स्कूल छोड़ दिया। हम सुनिश्चित करना चाहते हैं कि वो लड़कियां स्कूल में वापस लौटें।"
मुस्लिम तुष्टीकरण को महत्व
हिजाब मुस्लिम छात्राओं को वापस दिलाने के अलावा एमनेस्टी ने दो मांगे और रखी हैं। इसमें से एक है, गौहत्या से प्रतिबंध हटाने की मांग और एक अन्य मांग है, मुसलमानों से नफरत की घटना पर सख्त कार्रवाई की मांग। एमनेस्टी चाहती है कि कांग्रेस सरकार उन्हें आश्वस्त करे कि प्रदेश में मुस्लिम समुदाय के लोगों के साथ किसी प्रकार की हिंसा नहीं होगी। लेकिन मुस्लिम समुदाय द्वारा अगर किसी हिन्दू को पीड़ित किया जाता है तब उसको किस प्रकार की सुरक्षा मिलनी चाहिए इसे लेकर एमनेस्टी इंडिया के शब्दकोश में मानवाधिकार से जुड़ा कोई शब्द नहीं है।
बहरहाल एमनेस्टी इंडिया ट्वीट करके जो सुझाव दे रहा है कांग्रेस सरकार के मंत्री प्रियांक खड़गे उन्हें लागू करने के लिए तत्पर दिख रहे हैं। प्रियांक ने कहा है कि चाहे वह गौरक्षा का कानून हो या फिर धर्मांतरण से जुड़ा कानून, बीजेपी शासन में ऐसे जो भी कानून बने हैं उनकी समीक्षा की जाएगी। 2020 में राज्य की भाजपा सरकार ने गौहत्या पर प्रतिबंध लगाने के लिए प्रिवेन्शन ऑफ कैटल एक्ट-2020 बनाया था। इसी तरह 2022 में एन्टी कन्वर्जन एक्ट बना था जिसमें कहा गया है कि कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति का लालच या जोर जबर्दस्ती से धर्म परिवर्तन नहीं कर सकता। इस कानून में लव जिहाद की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए विवाह के लिए धर्म परिवर्तन पर भी रोक लगाया गया है।
लेकिन कांग्रेस की सरकार बनते ही जहां एक ओर उसका इको सिस्टम सक्रिय हो गया है। वहीं इस बार राज्य में मिले मुस्लिम वोटों का अहसान चुकाने के लिए कांग्रेस 'उनके हित' में उन कानूनों की समीक्षा करने का ऐलान कर रही है जो बीजेपी शासन में बने थे। निश्चय ही कर्नाटक के कांग्रेस शासन में इको सिस्टम के अच्छे दिन आ गये हैं। वैसे भी कई बड़े एनजीओ और उनके निवेशकों के कार्यालय बंगलौर में ही हैं। वहां कांग्रेस का शासन आने से सबने राहत की सांस तो जरूर ली होगी।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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