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करोड़ों लोगों को 'चैन की नींद' सुला रहे हैं ASMR वीडियो

नई दिल्ली, 28 जून। क्या आप यूट्यूब पर समय गुजारते हैं? अगर हां, तो अब तक आपने ऐसे वीडियो जरूर देख लिए होंगे, जिसमें लोग फुसफुसाकर बोलते हैं, ऑडियंस का मेकअप करने की एक्टिंग करते हैं, चाकू से साबुन काटते हैं, और किसी गिफ्ट को पैक करते हैं या किसी चीज को खुरचकर आवाज निकालते हैं. यह सारे तरीके ऑटोनमस सेंसरी मेरीडियन रिस्पांस यानी ASMR प्रभाव को पैदा करने वाले हैं. जिसका मतलब यह है कि इन वीडियो को देखकर लोगों के दिमाग और तंत्रिका तंत्र में एक सरसराहट भरा खुशनुमा अहसास होता है. रात में सोने से पहले इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया पर रोज करोड़ों लोग ये वीडियोज देखते हैं.

Provided by Deutsche Welle

भारत में भी रोजाना इसे लाखों लोग देखते हैं. लेकिन भारतीय दर्शक भीड़भाड़ वाले इलाके में बाल काटने, मसाज कराने, शरीर के जोड़ चटकाने, ढेर सारा खाना खाने और नाखून काटने जैसे एएसएमआर वीडियोज ज्यादा पसंद कर रहे हैं. जानकार बताते हैं, "बदलती जीवन शैली और शहरी परिवेश ने नींद से जुड़ी कई बीमारियों को जन्म दिया है." एएसएमआर की बढ़ती लोकप्रियता का एक पहलू यह भी है. कई यूट्यूबर तो इन वीडियोज के जरिए स्ट्रेस, एंजाइटी और माइग्रेन को भी कम करने का दावा करते हैं. एएसएमआर वीडियोज में सबसे बड़ा रोल साउंड का होता है. इसलिए किसी बनावटी संगीत के बजाए यूट्यूबर खाने, मसाज करने, बाल काटने आदि की जो गतिविधि कर रहे होते हैं, उसी का बारीकी से रिकॉर्ड किया साउंड एएसएमआर वीडियो में डालते हैं.

सबको होता है ASMR का अहसास

जानकार बताते हैं कि आपको ASMR में आराम, सुरक्षा और देखभाल का वैसा ही अहसास होता है, जैसा किसी बच्चे को अपनी मां के करीब होता है. मसलन जब कोई जानवर अपने बच्चे को चाटकर साफ करता है, तो उसके बच्चे को जैसा लगता है, वैसा ही ASMR वीडियो देख-सुनकर हमें भी लग सकता है. मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट हिमानी कुलकर्णी कहती हैं, "एएसएमआर एक खुशनुमा एक्साइटमेंट जैसा प्रभाव पैदा करता है. जैसे किसी का झूला झूलना. यह एक तरह के ब्रेन ऑर्गेज्म का अहसास कराता है. दिमाग के साथ शरीर पर भी इसका असर होता है क्योंकि इसे देखने-सुनने के दौरान आपकी धड़कन धीमी हो जाती है और रोएं खड़े हो जाते हैं. यह दिमाग के एक्साइटमेंट वाले हिस्से को एक्टिव कर देता है, जिससे सिरदर्द और नींद न आने के लिए जिम्मेदार दिमागी हिस्सा कम प्रभावी हो जाता है और लोग सो जाते हैं."

तो क्या ASMR का अहसास सिर्फ कुछ खास लोगों पर ही होता है और कुछ लोगों को इससे कुछ महसूस नहीं होता? मैनचेस्टर मेट्रोपोलिटन यूनिवर्सिटी में ASMR पर पहली स्टडी में शामिल रहे डॉ. निक डेविस कहते हैं, "हो सकता है कुछ लोगों पर इसका अहसास न हो लेकिन अब तक हमें यही समझ आया है कि सभी को इसका अहसास होता है. बस यह भी उसी तरह होता है, जैसे दो लोग अपने दर्द के बारे में बात करें. ज्यादातर मौकों पर दोनों के दर्द का अनुभव और स्तर अलग-अलग पर होता है. इसी तरह अलग-अलग इंसान के लिए एएसएमआर का अहसास भी अलग-अलग है."

यूट्यूब और ASMR का रिश्ता

यूट्यूब ने एएसएमआर कंटेंट को एक अलग ऊंचाई दी है. डॉ. निक डेविस के शब्दों में "यूट्यूब से पहले भी एएसएमआर था, जैसे हमें तब इसका अहसास होता था, जबकि कोई हमारे बालों में हाथ फेरता था या हमारा मसाज करता था. या सलीके से सजी कोई चीज देखकर हमें जो खुशी होती थी. यूट्यूब ने सिर्फ लोगों का एक ऐसा समूह बना दिया है, जो एक ही समय पर एक जैसे तरीकों का प्रयोग कर इस अहसास को पैदा कर रहे हैं."

आइस-सिनेमन नाम का ASMR यूट्यूब चैनल चलाने वाली ऐश्वर्या महापात्रा का अनुभव इस बात पर मुहर लगाता है. वे बताती हैं, "मैंने ASMR वीडियोज इसलिए बनाने शुरू किए क्योंकि मुझे अपनी टीनएज में इससे काफी मदद मिली थी. तब मैं नींद और सिरदर्द की बीमारी से जूझ रही थी. हालांकि तब मैं ASMR जैसी कोई बात नहीं जानती थी लेकिन मुझे ऐसे रेडियो प्रोग्राम सुनकर बहुत आराम मिलता था, जिनमें हल्की आवाज में कहानियां सुनाई जाती थीं. इनसे मुझे नींद भी आ जाती थी. मुझे फ्लैटफुट की शिकायत भी है. जिससे मेरे पैर में दर्द रहता है और अक्सर मुझे फुट मसाज कराना पड़ता है. इसलिए मुझे खुद जिन चीजों से आराम मिला, मैंने उन्हें अपने ASMR वीडियोज में डालना शुरू कर दिया."

कैमरे पर उंगलियां क्यों फिराते हैं ASMR आर्टिस्ट?

भारत में फूड ASMR (जिसे 'मकबैंग' भी कहते हैं) को देखने वालों की संख्या भी लाखों में हैं. इन वीडियोज में यूट्यूबर कैमरे के सामने ढेर सारा खाना रखकर खुद को खाते हुए शूट करते हैं. इसकी परतें खोलते हुए हिमानी बताती हैं, "किसी को खाते हुए देख-सुन कर दर्शकों को ऐसा महसूस होता है, जैसे वे अपनी मां (या किसी सुरक्षित महसूस कराने वाले शख्स के) करीब हैं, वह कुछ खा रही है."

लेकिन दुनिया भर में सबसे ज्यादा हिट एएसएमआर है, कैमरे पर उंगलियां फिराते हुए और फुसफुसाते हुए किसी महिला द्वारा बनाया गया ASMR. हिंदी में ऐसे ASMR बनाने वाली दिव्या बताती हैं, "मैं ASMR वीडियोज देखा करती थी. पिछले साल लॉकडाउन में ऐसा ही एक वीडियो देखते हुए मुझे भी ASMR वीडियोज बनाने का आइडिया आया और शुरुआत में अच्छा रिस्पांस मिला तो मैं लगातार वीडियोज बनाती गई." दिव्या कहती हैं कि 'रोल प्ले' ऐसे ASMR का अहम हिस्सा होता है. इसमें आर्टिस्ट अलग-अलग रोल निभाते हुए वीडियो बनाता है. उनके मुताबिक सबसे ज्यादा दर्शक उनसे डॉक्टर बनकर ASMR वीडियो बनाने की मांग करते हैं.

हिमानी कहती हैं, "इसमें तीन बातें हैं, उंगलियां, महिला की आवाज और डॉक्टर का रोल. ASMR वीडियोज में हाथों का अहम रोल होता है क्योंकि बारीकी से किया गया कोई काम हमें अच्छा महसूस कराता है. महिला की आवाज मातृत्व और सुरक्षा का अहसास कराती है और 'रोल प्ले' में डॉक्टर की लोकप्रियता होने की मनोवैज्ञानिक वजह है. डॉक्टर की छवि एक ऐसी शक्तिशाली छवि होती है, जिसका कहा आपको मानना ही होता है. अगर ऐसी छवि वाला इंसान आपसे फुसफुसाकर आराम से कोई बात कहता है तो आपको एक अलग तरह के सुकून का अहसास होता है."

विदेशी भी जमकर देख रहे भारतीय ASMR

'लाइफ इज ईजी' नाम का ASMR यूट्यूब चैनल चलाने वाले मृणाल चौधरी भारत के शुरुआती ASMR यूट्यूबर्स में से एक हैं. उन्होंने 2013 में एक विदेशी नागरिक का शूट किया वीडियो देखा, जिसमें एक भारतीय नाई बाल काट रहा था. इसके बाद उन्होंने भी आसपास के नाई के वीडियो शूट कर यूट्यूब पर डालने शुरू कर दिए. उनके वीडियो अब तक करोड़ों बार देखे जा चुके हैं.

क्या असर होता है इनका लोगों पर

मृणाल कहते हैं, "इनके जरिए लोगों को देखभाल का अहसास होता है. मुझसे लोग मांग करते हैं कि वीडियोज में साउंड को बिल्कुल असली जैसा रखा जाए, जिसमें सड़कों पर गुजरते लोगों और हॉर्न मारती गाड़ियों की आवाज हो. हिमानी कहती हैं, "सड़क की चहलपहल और हॉर्न की आवाजें सब सामान्य होने का अहसास कराती हैं. इन्हें सुनकर लोगों को लगता है जीवन में सब सही चल रहा है."

मृणाल बताते हैं कि 8 साल पहले जब उन्होंने शुरुआत की तो वीडियोज पर ज्यादातर व्यूज उत्तरी अमेरिका और यूरोप से आया करते थे. इससे उनकी आम यूट्यूबर के मुकाबले अच्छी कमाई भी होती थी. हालांकि पिछले 2-3 सालों से भारत में ऐसे वीडियो देखने और बनाने वाले दोनों ही बढ़े हैं. लेकिन अब भी उनके वीडियोज पर करीब आधे व्यूज विदेशों से आते हैं. बहरहाल ASMR की दुनिया लगातार बदल रही है. हर दिन भारत में सैकड़ों नए ASMR वीडियो यूट्यूब पर अपलोड हो रहे हैं और हर दिन लाखों लोग इन्हें देख रहे हैं. अगर भारत में भी लोगों की मानसिक समस्याओं और चुनौतियों से जोड़कर इनका एक अध्ययन हो तो इससे हमें समाज के बारे में कई जरूरी जानकारियां भी मिल सकती हैं.

Source: DW

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