लाल किले से पीएम मोदी ने ऐसा क्या कह दिया, जिसकी पश्चिम बंगाल में हो रही है आलोचना
कोलकाता, 15 अगस्त: रविवार को लाल किले से अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई एक चूक बंगाल की राजनीति में नए विवाद के रूप में सामने आया है। विपक्षी पार्टियां प्रधानमंत्री से माफी की मांग कर रही हैं, जबकि बीजेपी का कहना है कि ऐसी छोटी-मोटी चूक को मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। विपक्षी दलों के आरोपों के मुताबिक पीएम मोदी से बड़ी गलती ये हो गई है कि पश्चिम बंगाल की एक स्वतंत्रता सेनानी को उन्होंने अपने भाषण में असम का बता दिया है। हालांकि, पीएम ने उनकी शान में कसीदे ही पढ़े हैं, लेकिन राजनीति इसपर हो रही है कि उन्होंने बंगाल की जगह असम का नाम क्यों ले लिया।

मातंगिनी हाजरा पर माफी मांगें प्रधानमंत्री-टीएमसी
पश्चिम बंगाल की राजनीतिक पार्टियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधने का मौका मिल गया है। दरअसल, लाल किले से 75वें स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी देश के स्वातंत्र वीरों की वीर गाथाओं का जिक्र कर रहे थे, उसी दौरान उन्होंने मातंगिनी हाजरा को असम का बता दिया, जबकि वो बंगाल की रहने वाली थीं। तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि पीएम मोदी से हुई गलती बंगाल का 'अपमान' है। टीएमसी ने ट्वीट किया है, 'मातंगिनी हाजरा बंगाल की स्वतंत्रता सेनानी हैं, मिस्टर नरेंद्र मोदी! हमारे गौरवशाली इतिहास को इतना कम आंक कर आपने एक बार फिर पूरे बंगाल का अपमान किया है। क्या बीजेपी हमारे इतिहास को मिटाने के लिए प्रतिबद्ध है? इसका मजाक उड़ाकर वे खुश होते हैं? शर्म की बात है' पार्टी महासचिव कुनाल घोष ने तो प्रधानमंत्री से तत्काल माफी की भी मांग कर दी। वे बोले, 'जब कोई नाटकीय प्रभाव के लिए लिखित भाषण पर निर्भर करता है तो इस तरह की गलतियां होना तय है। प्रधानमंत्री को तुरंत माफी मांगनी चाहिए '

देश इन सभी महापुरुषों का ऋणी है- पीएम मोदी
दरअसल, पीएम मोदी अपने भाषण के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों को नमन कर रहे थे, इसी दौरान उन्होंने कई आंदोलनकारियों का नाम लिया और उसी धाराप्रवाह में वे ऐसा बोल गए जिसकी वजह से विवाद को मौका मिल गया। उन्होंने कहा, "आजादी को जन आंदोलन बनाने वाले पूज्य बापू हों, या आजादी के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर करने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद, बिस्मिल और अशफाक उल्ला खान जैसे महान क्रांतिवीर हों, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई हों, चित्तूर की रानी चेन्नम्मा हों या रानी गाइदिन्ल्यू हों, या 'असम' में मातंगिनी हाजरा का पराक्रम हो, देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू जी हों, देश को एकजुट राष्ट्र में बदलने वाले सरदार वल्लभ भाई पटेल हों भारत के भविष्य की दिशा निर्धारित करने वाले, रास्ता तय कराने वाले बाबा साहब अंबेडकर सहित देश हर व्यक्ति को, हर व्यक्तित्व को आज याद कर रहा है। देश इन सभी महापुरुषों का ऋणी है।"

कौन थीं मातंगिनी हाजरा ?
बता दें कि महात्मा गांधी की अनुयायी मातंगिनी हाजरा (1869-1942) अभी के पश्चिम बंगाल के पूर्वी मिदनापुर जिले की तामलुक की रहने वाली थीं। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान एक प्रदर्शन की अगुवाई करते हुए वह पुलिस फायरिंग में शहीद हो गई थीं। कोलकाता में उनकी कई प्रतिमाएं हैं और कई सड़कें भी उनके नाम पर हैं। 2002 में भारत सरकार ने उनके सम्मान में एक डाक टिकट भी जारी किया था। गौरतलब है कि एक दिन पहले ही बीजेपी की बंगाल महिला मोर्चा ने हाजरा को याद करते हुए एक तस्वीर ट्वीट किया था, जिसमें पीएम मोदी और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की भी तस्वीर लगाई थी।

यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है- कांग्रेस सांसद
प्रधानमंत्री के बचाव में बंगाल भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि 'उनसे एक छोटी सी भूल हुई है। भारत की आजादी के लिए हजारों महान लोगों ने अपने प्राण न्यौछावर किए थे। लोगों को इसे मुद्दा नहीं बनाना चाहिए।' लेकिन, विपक्ष आसानी से हाथ आए इस मुद्दे को जाने देने के लिए तैयार नहीं है। लेफ्ट फ्रंट के चेयरमैन बिमान बोस ने कहा है, 'प्रधानमंत्री को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की शिक्षा पर कम निर्भर रहना चाहिए और उनके सचिवालय के लोगों को उनका भाषण तैयार करने से पहले उन्हें शिक्षित करना चाहिए।' कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य प्रदीप भट्टाचार्य ने कहा, 'यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। मातंगिनी हाजरा एक प्रतीक हैं।'












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