बंगाल: पंचायत चुनाव से पहले हर जिले में हिंसा, विपक्ष बोली- उम्मीदवारों को नामांकन से रोका, TMC कर रही ये दावा
West Bengal Panchayat election 2023: पश्चिम बंगाल में 8 जुलाई 2023 को होने वाले पंचायत चुनाव से पहले राज्य के लगभग हर जिलों से हिंसा और झड़प की खबरें सामने आ रही है। पंचायत चुनाव के लिए नामांकन केंद्रों के आसपास निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद राज्य में 12 जून को हिंसा की कई घटनाएं हुईं।
विपक्ष का दावा है कि विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन पत्र दाखिल करने से तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता रोक रहे हैं। हालांकि टीएमसी ने इन आरोपों को खारिज किया है।

इस समय केरल का दौरा कर रहे पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में (पंचायत) चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होंगे और किसी भी तरह की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
9 जून 2023 को नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के बाद से ही हिंसा और झड़प की खबरें आ रही हैं। 11 जून को राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला प्रशासन को नामांकन केंद्रों के एक किलोमीटर के दायरे में सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू करने का आदेश दिया था।
पूर्व बर्धमान जिले में माकपा उम्मीदवारों और टीएमसी कार्यकर्ता के बीच झड़प, पुलिसकर्मी घायल
धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू होने के बाद भी सोमवार 12 जून को पूर्व बर्धमान जिले के बारसुल में माकपा उम्मीदवारों को कथित रूप से सत्तारूढ़ टीएमसी सदस्यों ने नामांकन पत्र दाखिल करने से रोक दिया, जिसके बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर पथराव किया।
झड़प में तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए। रैपिड एक्शन फोर्स सहित पुलिस कर्मियों द्वारा आखिर में स्थिति को नियंत्रण में लाया गया। हमले के विरोध में माकपा कार्यकर्ताओं ने जिलों के पलसित इलाके में सड़कों को जाम कर दिया था।
उत्तर 24 परगना जिले में सीपीआई (एम) के कार्यकर्ता घायल
उत्तर 24 परगना जिले के मिनाखान में सीपीआई (एम) के सदस्यों को कथित रूप से नामांकन पत्र दाखिल करने में भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी कार्यकर्ताओं ने उनके पार्टी कार्यालय का घेराव किया और उन पर हमला किया, जिससे सीपीआई (एम) के कई कार्यकर्ता घायल हो गए।
पश्चिम बर्धमान में नामांकन दाखिल करने से BJP को रोका गया
पश्चिम बर्धमान के जमुरिया इलाके में बीजेपी के कुछ उम्मीदवारों को कथित तौर पर नामांकन पत्र दाखिल करने से रोका गया। बांकुड़ा जिले के सोनामुखी में टीएमसी और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच कथित तौर पर झड़प हो गई। बीजेपी विधायक दिबाकर घरामी से भी पुलिस के सामने धक्का-मुक्की की गई।
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि दक्षिण 24 परगना जिले के भांगर-द्वितीय ब्लॉक में उसके उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका गया। इसी तरह की घटना कथित तौर पर इसी जिले के काकद्वीप में भी हुई थी।
मुर्शिदाबाद और पश्चिम मेदिनीपुर में भी हुई हिंसा
मुर्शिदाबाद जिले के रानीनगर और पश्चिम मेदिनीपुर जिले के दासपुर से भी हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं। हुगली जिले के पंडुआ में, भाजपा सांसद लॉकेट चटर्जी को पुलिस ने बीडीओ कार्यालय में प्रवेश करने से रोक दिया था। पुलिस का कहना था कि सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू है।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
राज्य चुनाव आयुक्त राजीव सिन्हा ने 13 जून को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है। हालांकि ये चुनाव की तारीखों की घोषणा करने से पहले किया जाने वाला बैठक है। राज्य चुनाव आयुक्त राजीव सिन्हा ने कहा है कि अगर कोई अवांछित घटना होती है तो पुलिस कार्रवाई करेगी।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक राज्य चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ''हम नामांकन केंद्रों पर लागू धारा 144 के आदेश का सख्ती से पालन कर रहे हैं और हम सभी जिला प्रशासन से समय-समय पर रिपोर्ट ले रहे हैं।
'टीएमसी किसी भी हिंसा में शामिल नहीं थी
सत्तारूढ़ टीएमसी को हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए माकपा नेता सुजन चक्रवर्ती ने कहा, "टीएमसी को यह समझ नहीं आ रहा है कि ये 2018 नहीं है ये 2023 है। उन्हें सही वक्त पर सही तरीके से जवाब दिया जाएगा।''
हालांकि टीएमसी ने किसी भी हिंसक घटना में शामिल होने के आरोपों को खारिज कर दिया। पार्टी ने कहा, टीएमसी किसी भी हिंसा में शामिल नहीं थी। यह सब विपक्ष का दुष्प्रचार है। जो उनकी पार्टी के खिलाफ किया जा रहा है।
इस बीच कलकत्ता हाई कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग से नामांकन पत्र दाखिल करने की अवधि बढ़ाने को कहा है। विपक्षी पार्टियों द्वारा दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि नामांकन प्रक्रिया के लिए सिर्फ छह दिनों की अवधि बहुत कम है, इसलिए इसे बढ़ाया जाना चाहिए।












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