West Bengal Chunav Results 2021 : ममता बनर्जी के सामने इन 5 प्रमुख वजहों से हारी बीजेपी
नई दिल्ली, 2 मई: पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ऐतिहासिक जीत की ओर कदम बढ़ा चुकी है। टीएमसी यहां 200 से ज्यादा सीटों पर आगे चल रही है। इस बीच अब हर किसी की नज़र नंदीग्राम पर टिकी थी। इस हाईप्रोफाइल सीट पर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जीत गई हैं। नवीनतम रुझानों के मुताबिक, कुल 292 सीटों में से टीएमसी 215 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि भाजपा 75 सीटों पर आगे है। बीजेपी की ओऱ से पीएम मोदी और अमित शाह ने इस चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी, इसके बाद भी बीजेपी इस चुनाव में सफल नहीं हो। बीजेपी के हार ये मुख्य कारण सामने आ रहे हैं।

बीजेपी बिना CM चेहरे के उतरी
भाजपा का बंगाल में हार का पहला कारण बीजेपी द्वारा किसी सीएम चेहरे को पेश ना किया जाना माना जा रहा है। बीजेपी ने इस चुनाव में किसी स्थानीय नेता को सीएम का चेहरा नहीं बनाया था। जो राज्य में ममता बनर्जी का सामना कर सके। जिसका सीधा खामियाजा बीजेपी को भुगतना पड़ा। जबकि बनर्जी हमेशा बंगाल के लोगों के लिए एक मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में अधिक स्वीकार्य चेहरा रही हैं। भले ही उनकी पार्टी को राज्य के ग्रामीण हिस्सों में भ्रष्टाचार के आरोपों के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा हो। भाजपा का कैंपेन मुख्य रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर केंद्रित रहा। मतदाता स्पष्ट रूप से उनसे जुड़ने में विफल रहे क्योंकि वे दीदी के साथ अधिक जुड़े थे।

ममता का 'आउटसाइडर' मुद्दा कर गया काम
ममता बनर्जी की उप-क्षेत्रीय और उनकी कैंपेन में मोदी और शाह की जोड़ी को हमेशा 'बाहरी' के तौर पर प्रोजेक्ट किया गया। ममता ने कैंपने को बंगाली बनाम बाहरी कर दिया था। यही उन्होंने बंगाली संस्कृति को भी पकड़ा जिसे मोदी-शाह की जोड़ी नहीं पकड़ पाई। ममता का मोदी औऱ शाह को बाहरी कहना बंगाल की जनता को हिट किया। जिसका परिमाण के रिजल्ट में देखने को मिला है।

मोदी का ममता को 'दीदी ओ दीदी' कहना
पीएम मोदी बंगाल में अपनी चुनावी सभाओं में ममता बनर्जी पर तंज कसने के लिए 'दीदी...ओ दीदी' का प्रयोग करते थे। माना जा रहा है कि मोदी का ये जुमला बीजेपी पर भारी पड़ गया है। चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि, पीएम मोदी के इस लहजे को राज्य की महिलाओं ने एक अपमान के तौर पर देखा था। वहीं बंगाल के पढ़े-लिखे तबके में भी मोदी का यह लहजा पंसद नहीं आया।

कल्याणकारी योजनाएँ
बनर्जी की नकद योजनाओं, विशेष रूप से महिलाओं के लिए - जैसे कन्याश्री और रूपश्री का असर इस चुनाव में साफ तौर देखने को मिला। कन्याश्री योजना के तहत, एक बालिका को कक्षा 8 में आने पर 25,000 रुपये मिलते हैं। रूपश्री योजना 18 वर्ष की होने पर एक लड़की के परिवार को 25,000 रुपये देने का वादा करती है। उनकी सामाजिक क्षेत्र में मुफ्त चावल, मुफ्त राशन जैसी सुविधाएं देने की योजना काम आईं।

ममता के पाले में गया सीपीएम-कांग्रेस का वोट बैंक
सीपीएम-कांग्रेस वोट बैंक, जिसने 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को 18 सीटें और 40 प्रतिशत वोट शेयर हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, अब लगता है कि वह बनर्जी के साथ है। बनर्जी के वोट शेयर में 6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। राज्य में ममता का वोट शेयर 43 प्रतिशत से बढ़कर 49 प्रतिशत पर पहुंच गया जबकि भाजपा 40 प्रतिशत से घटकर 37 प्रतिशत आ गई है। वहीं मुस्लिम वोट जो कांग्रेस और सीपीएम की ओर जाते है, वे इस बार ममता के साथ आ गए। जिसका एक कारण सीएए-एनआरसी भी माना जाता रहा है।












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