मिसाल: गरीब आदिवासी बेटी ने नहीं छोड़ी हिम्मत, आर्थिक तंगी के बावजूद पूरी की मास्टर डिग्री, अब कर रही यह काम
इमानी मुर्मू ने कहा कि आर्थिक संकट के चलते कई परेशानियां सामने आईं लेकिन हमने उसका डटकर मुकाबला किया। उन्होंने कहा कि वह सरकारी नौकरी की तलाश में हैं। फिलहाल वह बच्चों को पढ़ा रही हूं। (सांकेतिक तस्वीर)

पश्चिम बंगाल के कांकसर के जंगलमहल जहां गरीब आदिवासी परिवार रहते हैं, वहा की बेटी इमानी मुर्मू(Imani Murmu) ने मास्टर और बीएड पूरा करने में कामयाबी हासिल की है। इस क्षेत्र में करीब 100 आदिवासी परिवार रह रहे हैं और सभी मुख्य रूप से दिहाड़ी मजदूरी से जुड़े हैं। हर रोज खाने के लिए मजदूरी पर निर्भर रहना पड़ता है। यानि साफ शब्दों में कहा जाए तो यहां कि आर्थिक स्थिति बेहद खराब है, साथ ही बच्चों की शिक्षा पर ध्यान देने के लिए कम समय मिलता है।
इस आदिवासी क्षेत्र में अच्छे स्कूल भी नहीं
इमानी मुर्मू(Imani Murmu) ने कहा कि आदिवासी क्षेत्र में अच्छे स्कूल भी नहीं हैं। वित्तीय संकट के बावजूद हमने मास्टर डिग्री प्राप्त करने के अपने लक्ष्य को पूरा किया, हालांकि उन्हें सरकारी नौकरी नहीं मिल सकी। इसलिए अब वह अपने क्षेत्र के कई स्थानीय आदिवासी बच्चों को मुफ्त कोचिंग दे रही हैं, जो भी शिक्षित होना चाहते हैं।
अब राज्य सरकार भर्ती नहीं कर रही: इमानी मुर्मू
इमानी मुर्मू(Imani Murmu) ने कहा कि अब राज्य सरकार भर्ती नहीं कर रही है लेकिन क्षेत्र के लड़के-लड़कियों को पढ़ाकर उन्हें बहुत खुशी हो रही है। उनके छात्र भी बहुत खुश हैं। दरअसल, हर किसी के मन में एक गहरी विचार प्रक्रिया होती है। अब कोई भी पिछड़ा वर्ग का खिताब अपने बीच नहीं रखना चाहता। हर कोई आगे बढ़ना चाहता है। समाज के विभिन्न स्तरों पर स्वयं को स्थापित करना। इमानी मुर्मू को खुद काबिल होने के बावजूद अभी तक मौका नहीं मिला है, वह चाहती हैं कि आसपास के परिवारों के बच्चों को भी मौका मिले. यही वजह है कि वह जंगल महल के पिछवाड़े में बैठकर लड़ाई करती रहती है।












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