पार्थ चटर्जी और अनुब्रत मंडल की गिरफ्तारी के बाद डैमेज कंट्रोल में लगी TMC, अब साफ छवि के नेता होंगे तैनात
नई दिल्ली, अगस्त 13। पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इन दिनों अपनी पार्टी की छवि को सुधारने की कोशिश में लगी हैं। दरअसल, पार्थ चटर्जी और अनुब्रत मंडल जैसे पार्टी के दो दिग्गज नेताओं की गिरफ्तारी से ममता बनर्जी को बड़ा झटका लगा है। बंगाल में सत्ता पर बैठी ममता बनर्जी को इन दोनों नेताओं की गिरफ्तारी ने हिला कर रख दिया है। ममता बनर्जी को यह डर है कि कहीं इनकी गिरफ्तारी से जनता के बीच पार्टी को लेकर गलत छवि ना जाए, इसीलिए पार्टी की साफ छवि को दिखाने के लिए हर जिले के लगभग सभी ब्लॉकों में बड़े पैमाने पर फेरबदल किए जा रहे हैं।

जिला स्तर के नेताओं से मिल रहे हैं अभिषेक
टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पिछले 15 दिनों से हर जिले के नेताओं के साथ बैठक कर रहे हैं। अभिषेक बनर्जी ने अधिकांश उत्तर बंगाल और पश्चिमी जिलों के नेताओं से मुलाकात की है और आने वाले दिनों में वह दक्षिण बंगाल के नेताओं से भी मुलाकात करने वाले हैं। टीएमसी से जुड़े सूत्रों का यह कहना है कि 2023 के पंचायत चुनाव को लेकर पार्टी में इन दिनों हलचल है, लेकिन इस बात को भी झूठलाया नहीं जा सकता कि पार्थ चटर्जी और अनुब्रत की गिरफ्तारी के बाद डैमेज कंट्रोल का काम किया जा रहा है।
साफ छवि के नेताओं को दी जा रही है प्राथमिकता
हालांकि टीएमसी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पार्टी पहले ही ब्लॉक-दर-ब्लॉक समीक्षा कर चुकी है और 2023 के पंचायत चुनावों के लिए हर जिले के साथ क्या करें और क्या न करें, इसका चार्ट तैयार करने की कोशिश कर रही है। साथ ही जहां भी जरूरत थी, वहां पहले ही जिलाध्यक्षों को बदला जा चुका है। न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, टीएमसी से जुड़े करीबी सूत्रों ने बताया है कि इस वक्त पार्टी की प्राथमिकता है कि हर जिले में नेतृत्व की विशेषताओं के आधार पर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि साफ छवि वाले लोगों को ही जिले में पार्टी की जिम्मेदारी दी जाए।
टीएमसी में हो रहे हैं यह बदलाव
- आपको बता दें कि जिला स्तर पर जो जिम्मेदारियां नए चेहरों को दी जानी हैं, उनमें युवा छात्र, महिला और ट्रेड यूनियन विंग के साफ और विश्वसनीय चेहरों को प्राथमिकता दी जाएगी।
- इसके अलावा जिले में तैनात होने वाली नई टीमें कोऑर्डिनिशन के साथ चलेंगी। टीएमसी में गुटबाजी और पैरवी हमेशा से एक बड़ी समस्या रही है, इसीलिए अब एक ऐसी व्यवस्था तैयार की जाएगी जहां जिलाध्यक्ष संगठन के अन्य प्रमुखों के साथ मिलकर काम करेंगे। हर ब्लॉक की टीम अपने कोऑर्डिनेशन पर जोर देगी।
- इसके अलावा आदिवासी बहुसंख्यक और आदिवासी जनसांख्यिकी वाले स्थानों पर वास्तव में जनता का प्रतिनिधित्व करने वाले नेताओं को जिम्मेदारी दी जाएगी।












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