Singur Plant case: टाटा मोटर्स की बड़ी जीत, सिंगुर प्लांट के लिए मिलेगा ₹766 करोड़ का मुआवजा
Tata Nano factory Singur: पश्चिम बंगाल सरकार से टाटा मोटर्स ने मुआवजे का पुराना केस जीत लिया है। सिंगुर जमीन विवाद में टाटा ग्रुप 766 करोड़ रुपए वसूलने का हकदार है। कंपनी ने बताया कि बंगाल सरकार को सिंगुर में नैनो फैक्ट्री को बंद करने के लिए टाटा मोटर्स को सितंबर 2016 से 11 प्रतिशत ब्याज के साथ 765.78 करोड़ रुपए की बड़ी राशि का भुगतान करना होगा।
कंपनी ने जानकारी देते हुए बताया कि एक मध्यस्थता पैनल ने सिंगूर नैनो प्रोजेक्ट केस में पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम (WBIDC) से ब्याज समेत 765.78 करोड़ रुपए की वसूली के लिए उसके पक्ष में फैसला दिया है।

टाटा मोटर्स की ओर से जारी बयान में बताया गया कि "तीन-सदस्यीय मध्यस्थ न्यायाधिकरण के समक्ष लंबित मध्यस्थ कार्यवाही का अब अंततः टाटा मोटर्स लिमिटेड (टीएमएल) के पक्ष में एक सर्वसम्मत निर्णय द्वारा निपटारा कर दिया गया है।"
11% प्रति साल की दर से ब्याज शामिल
कंपनी ने कहा कि दावेदार (टीएमएल) को पुनर्प्राप्त करने का हकदार माना गया है। प्रतिवादी (WBIDC) से 1 सितंबर 2016 से वास्तविक वसूली तक 11% प्रति वर्ष की दर से ब्याज के साथ 765.78 करोड़ रुपए की राशि का हकदार है। बता दें कि WBIDC पश्चिम बंगाल के उद्योग, वाणिज्य और उद्यम विभाग की प्रमुख नोडल एजेंसी है।
कार्यवाही की लागत के लिए 1 करोड़ रुपए भी मिलेंगे
इसके अलावा दावेदार (टीएमएल) को कार्यवाही की लागत के लिए प्रतिवादी (डब्ल्यूबीआईडीसी) से 1 करोड़ रुपये की राशि वसूलने का भी हकदार माना गया है।
मालूम हो कि सिंगुर में टाटा मोटर्स के नैनो प्लांट को ममता बनर्जी से पहले की वामपंथी सरकार ने 18 मई 2006 परमिशन दी थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य और तत्कालीन वाणिज्य राज्य मंत्री निरुपम सेन के साथ एक बैठक बाद सिंगुर में नैनो कार बनाने के लिए प्लांट लगाने की घोषणा हुई।
जिसके तहत टाटा मोटर्स ने ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी लगाने के लिए निवेश किया था। ममता बनर्जी ने इस प्लांट के खिलाफ आमरण अनशन किया था। जिसके बाद विरोध के कारण उसे नुकसान झेलना पड़ा और अपना प्लांट गुजरात शिफ्ट किया। जिसके बाद टाटा मोटर्स ने पूंजी निवेश के नुकसान के कारण WBIDC से मुआवजे का दावा किया था।












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