नारद स्टिंग: जिस केस में 4 TMC नेता अरेस्ट उसी में अधिकारी के खिलाफ मंजूरी पेंडिंग, मुकुल रॉय को भी राहत
कोलकाता, 18 मई। सीबीआई ने सोमवार को नारद स्टिंग ऑपरेशन मामले में पश्चिम बंगाल की नई गठित सरकार के दो मंत्रियों सहित तृणमूल कांग्रेस के चार नेताओं को गिरफ्तार किया है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने बताया कि राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने इस महीने इनके खिलाफ अभियोजन की मंजूरी दी थी जिसके बाद चार नेताओं, मंत्री फिरहाद हकीम, सुब्रत मुखर्जी के साथ मदन मित्रा, सोवन चटर्जी को गिरफ्तार किया गया था।
ये वो बातें हैं जो सीबीआई ने बताई हैं और सभी को पता है लेकिन इस केस में ऐसा भी बहुत कुछ है जो अभी तक नहीं बताया गया है और उसे समझना जरूरी है।
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मुकुल रॉय के खिलाफ सीबीआई ने नहीं किया आवेदन
राज्यपाल ने भले ही चार लोगों के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी दे दी है लेकिन चुनाव के पहले टीएमसी छोड़कर बीजेपी में आने वाले और वर्तमान में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी का नाम भी इस केस में शामिल है। और अधिकारी के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दो साल बाद अभी भी लंबित है।
यहां दिलचस्प बात यह है कि सीबीआई ने इसी मामले में बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी के लिए आवेदन ही नहीं किया है। जबकि मुकुल रॉय एजेंसी द्वारा दर्ज एफआईआर में आरोपी नंबर 1 हैं। रॉय उन बड़े नेताओं में हैं जो 2017 में सबसे पहले टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे।

चुनाव खत्म होने के 5 दिन के अंदर मंजूरी
सीबीआई की कार्रवाई राज्य में चले आक्रामक चुनाव अभियान के बाद टीएमसी के सत्ता हासिल करने के दो हप्ते बाद ही हुई है। इस कार्रवाई पर टीएमसी सवाल उठा रही है। यह सवाल इसलिए भी हैं क्योंकि सीबीआई ने गिरफ्तार नेताओं के खिलाफ चुनाव से पहले जनवरी में ही राज्यपाल के पास मुकदमा चलाने के लिए अनुरोध भेजा था लेकिन जैसे ही चुनाव खत्म हुए 5 दिनों के अंदर ही ये मंजूरी दे दी गई।
नंदीग्राम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराकर भाजपा के लिए उम्मीद जगाने वाले अधिकारी 11 अन्य लोगों के साथ इस मामले में आरोपी हैं। 2014 में अधिकारी लोकसभा सांसद थे जब नारद स्टिंग ऑपरेशन सामने आया था जिसमें टीएमसी नेताओं को कथित तौर पर एक काल्पनिक कंपनी का पक्ष लेने के लिए नकद राशि स्वीकार करने या बातचीत करते हुए कैमरे पर रिकॉर्ड किया गया था। इस स्टिंग को बंगाल विधानसभा के पिछले चुनाव से पहले 2016 में प्रसारित किया गया था।

2019 में अधिकारी के खिलाफ भेजा था आवेदन
अब एक बार फिर अभियोजन की मंजूरी पर वापस लौटते हैं। सीबीआई ने सांसद रहे अधिकारी, सौगत राय, काकोली घोष और प्रसून बनर्जी के खिलाफ 4 अप्रैल 2019 को लोकसभा स्पीकर को अभियोजन की मंजूरी के लिए आवेदन भेजा था। इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के दिशा-निर्देशों के मुताबिक सक्षम प्राधिकारी को अनुरोध मिलने 4 महीने के भीतर ही अभियोजन की मंजूरी पर फैसला (चाहे मंजूरी या खारिज) लेना होता है।
सीवीसी के नवंबर 2020 तक के रिकॉर्ड के मुताबिक पिछले साल दिसंबर में बीजेपी में शामिल हुए अधिकारी और टीएमसी के तीन सांसदों पर मुकदमा चलाने के लिए सीबीआई का अनुरोध स्पीकर के कार्यालय में एकमात्र लंबित अनुरोध है। ओम बिरला ने आम चुनावों के बाद जून 2019 में अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला था।
सोमवार को जिन 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया है उन पर उसी तरह के आरोप है जो रॉय और अधिकारी पर हैं। इन सभी को स्टिंग में घूस लेकर काम करने पर समहत होते दिखाया गया था।

2017 में 12 लोगों पर मामला हुआ दर्ज
सीबीआई ने इस मामले में अप्रैल 2017 में केस दर्ज किया था। सीबीआई ने टीएमसी के 12 नेताओं, जिनमें मंत्री भी शामिल थे, के खिलाफ आपराधिक षड़यंत्र और भ्रष्टाचार के आरोप में मामला दर्ज किया था।
मुकुल रॉय और अधिकारी के साथ ही चार गिरफ्तार नेताओं के अलावा जो नेता इसमें आरोपी हैं उनमें लोकसभा सांसद सौगत रॉय, अपूर्व पोद्दार, सुल्तान अहमद, प्रसून बनर्जी, काकोली घोष दस्तीदार, विधायक इकबाल अहमद और आईपीएस अधिकारी एमएमएच मिर्जा शामिल हैं।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने सीबीआई को नारदन्यूज डॉट कॉम पोर्टल पर प्रसारित टेपों की प्रारंभिक जांच करने का आदेश दिया था। हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी जहां सर्वोच्च अदालत ने 2017 में राहत देने से इनकार कर दिया था और जरूरत पड़ने पर सीबीआई को प्राथमिकी दर्ज करने के लिए एक महीने का समय दिया था।












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