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Murshidabad Violence: मुर्शिदाबाद में क्यों भड़की हिंसा? जलते बंगाल ने दीदी की सियासत पर खड़े किए कई सवाल

Murshidabad Violence: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में वक्फ (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा ने राज्य की राजनीति पर कई सवाल खड़े कर रही है। इस घटना में कई लोग घायल हुए हैं, जिनमें पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। पुलिस ने अब तक 150 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है, और स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

बंगाल में हिंसा की बढ़ती घटना को लेकर BJP मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमलावार है, वहीं राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर बंगाल सरकार सवालों के घेरे में हैं। सबसे बड़ा सवाल ये कि मुर्शिदाबाद की हिंसा अचानक भड़की या राजनीतिक फायदे के लिए ये एक सोची समझी रणनीति है?

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Murshidabad Violence: कब और कैसे भड़की हिंसा?

दरअसल , 8 अप्रैल 2025 को प बंगाल के मुर्शिदाबाद के जंगीपुर क्षेत्र में वक्फ संशोधन अधिनियम के विरोध में एक बड़ी रैली निकाली गई थी। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग 12 पर एकत्र होकर कानून को वापस लेने की मांग की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, जिसमें पुलिस पर पथराव किया गया और कई वाहनों में आग लगा दी गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।​

हिंसा के बाद प्रशासन ने रघुनाथगंज और सूती इलाकों में निषेधाज्ञा लागू कर दी और इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी गईं। पुलिस ने अब तक 150 से लोगों को गिरफ्तार किया है और स्थिति को शांतिपूर्ण और नियंत्रण में बताया है। राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने घटना की निंदा की और सरकार को हिंसा रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

Murshidabad Violence: दीदी के रुख से बदलती बंगाल की राजनीति

इस बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने साफ कर दिया है कि राज्य में नया वक्फ कानून लागू नहीं किया जाएगा जिस पर पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने ममता सरकार पर आरोप लगाया कि बंगाल में 'हिंदू सुरक्षित नहीं हैं, स्थिति बहुत गंभीर, नाजुक है। '

देखिए राज्य में अगले साल मार्च-अप्रैल तक विधानसभा चुनाव होने हैं ऐसे में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुस्लिम समुदाय को साधने के लिए मुस्लिम नेताओं के साथ बैठक कर वक्फ संपत्तियों की रक्षा करने का आश्वासन दिया और कहा कि जब तक ममता सरकार है राज्य में इस कानून को लागू नहीं होने देगी।

ममता बनर्जी ने कहा कि, "चाहें मुझे गोली मार दो, लेकिन मैं बंगाल को धार्मिक आधार पर बंटने नहीं दूंगी।" दीदी का यह रुख उनके 30% मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। बंगाल में टीएमसी के पास सबसे अधिक इसी समुदाय के वोटर्स हैं जो चुनावों में अपनी गहरा प्रभाव डालते हैं।

Murshidabad Violence: बीजेपी का धार्मिक ध्रुवीकरण कार्ड

वहीं बीजेपी राज्य में काफी कमजोर स्थिति में है अगले साल होने वाले चुनाव को ध्यान में रखते हुए बीजेपी राज्य में धार्मिक ध्रुवीकरण को भुनाने की पूरी कोशिश कर रही है। भारतीय जनता पार्टी ने मुर्शिदाबाद की घटना को जोर-शोर से उठाया है। बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर लिखा, "ममता बनर्जी बंगाल को दूसरा बांग्लादेश बनाना चाहती हैं। मुर्शिदाबाद में हिंसा सांप्रदायिक ताकतों को बढ़ावा देने का नतीजा है।"

वहीं, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कहा, "टीएमसी की गुंडागर्दी और हिंसा बंगाल को अराजकता की ओर ले जा रही है। ममता सरकार को जवाब देना होगा।"​

मुर्शिदाबाद में वक्फ कानून के खिलाफ भड़की हिंसा ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। जहां एक ओर सरकार अल्पसंख्यक समुदाय को आश्वासन देने में लगी है, वहीं विपक्ष इसे कानून-व्यवस्था की विफलता और तुष्टीकरण की राजनीति के रूप में देख रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और विपक्ष इस मुद्दे को कैसे संभालते हैं और राज्य में शांति और स्थिरता कैसे बहाल होती है।​

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