Asansol Seat: आसनसोल पर शत्रुघ्न सिन्हा के सामने किस पर BJP का दांव, मिथुन दा के साथ जितेंद्र तिवारी की चर्चा

Lok Sabha Election 2024: पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी टीएमसी ने आसनसोल लोकसभा सीट (Asansol Lok Sabha Seat) से दिग्गज एक्टर शत्रुघ्न सिन्हा (Shatrughan Sinha) के नाम की उम्मीदवार के तौर पर घोषणा की दी है। ऐसे में आगामी लोकसभा चुनाव में आसनसोल सीट से इस बार दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है।

ममता बनर्जी के ऐलान के बाद अब बीजेपी के तरफ से उम्मीदवारों के नाम की भी सरगर्मी तेज हो रही है। हॉट सीट कही जाने वाली आसनसोल की सीट पर उपचुनाव के बाद समीकरण बदले हैं। ऐसे में इस बार बीजेपी के तरफ से दो नाम जमकर चर्चाओं में हैं, जो कि मिथुन चक्रवर्ती और जितेंद्र तिवारी में से एक हो सकते हैं?

शत्रुघ्न सिन्हा ने तीन लाख वोटों के हराया था

दरअसल, 2014 और 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में इस सीट से गायक बाबुल सुप्रियो जीते थे, जो कि मोदी सरकार में मंत्री भी रहे, लेकिन 2021 में उन्होंने बीजेपी छोड़ TMC का हाथ थामा, जिसके बाद यहां अप्रैल 2022 में उपचुनाव हुआ, जिसमें टीएमसी के शत्रुघ्न सिन्हा ने भाजपा उम्मीदवार अग्निमित्र पॉल को तीन लाख वोटों के अंतर से हराया था।

मिधुन दा के साथ एक और नाम की चर्चा

हालांकि चर्चा है कि शत्रुघ्न सिन्हा के नाम के ऐलान के बाद अब बीजेपी की तरफ से अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती को टिकट दिया जा सकता है, लेकिन मिधुन दा के साथ एक नाम और भी है, जो जमकर चर्चाओं में है और वो नाम है, जितेंद्र तिवारी। ऐसे में जानिए कौन हैं जितेंद्र तिवारी को बन सकते हैं बीजेपी के उम्मीदवार?

स्थानीय उम्मीदवार की मांग पर जोर

पहले भाजपा के बाबुल सुप्रियो के लोकसभा सदस्य होने पर स्थानीय लोगों को अपने प्रतिनिधि तक पहुंचने में तमाम समस्याएं हुईं जिसका असर उपचुनाव में दिखा और भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। ऐसे में यहां स्थानीय उम्मीदवार की मांग जोर पकड़ रही है, और बाहरी उम्मीदवार को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है।

जितेंद्र तिवारी के नाम पर चर्चा

ऐसे में एक ऐसा भी चेहरा है जो भाजपा के लिए संभावित गेम-चेंजर के रूप में उभर रहा है। आसनसोल के पूर्व मेयर और पांडवेश्वर निर्वाचन क्षेत्र से पूर्व विधायक रहे जितेंद्र तिवारी भाजपा में शामिल होने के बाद से राजनैतिक लहरें बना रहे हैं। राजनैतिक गलियारों में यह खबरें भी आ रही हैं कि वे बीजेपी के पोस्टर बॉय हो सकते हैं।

जानिए कौन हैं जितेंद्र तिवारी?

तिवारी की राजनीतिक यात्रा उतार-चढ़ाव से भरी रही है, 2021 का चुनाव उनके करियर में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, वो बीजेपी में आने के बाद वह इसी सीट से चुनाव हार गए थे। 2016 में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सदस्य के रूप में, उन्होंने 68,600 वोट पाकर जीत हासिल की और पांडवेश्वर के विधायक बने। दोबारा 2021 में भाजपा में आने के बाद उनकी लोकप्रियता और बढ़ी, और उन्होंने 70,000 से अधिक वोट प्राप्त किए, जो कि 2016 में भाजपा को प्राप्त वोटों की तुलना में 400% की वृद्धि थी। हालांकि तिवारी वहां लगभग 3000 मतों से हार गए।

अब बात समीकरण की करें तो जितेंद्र तिवारी को आसनसोल की राजनीति में एक मजबूत नेता के रूप में दिखाती है। वह पांडवेश्वर निर्वाचन क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता और मतदाताओं के समीकरण पर पकड़ है। जितेंद्र तिवारी का मजबूत राजनीतिक आधार उनका हिंदी भाषी होना है, क्षेत्र में हिंदी भाषी मतदाताओं की अधिकता उनकी स्वीकार्यता को मजबूत करती है।

साथ ही हिंदी भाषा के साथ-साथ बंगाली भाषी क्षेत्रों पर उनकी अच्छी पकड़ है। हिंदी भाषी जितेंद्र तिवारी विधायक रहने के बाद यहां से मेयर भी रहे हैं, वहीं उनकी पत्नी बंगाली भाषी हैं, जो अभी निगम में विपक्ष की नेता भी हैं। ऐसे में तिवारी महिला वोटों पर भी अपनी अच्छी पहुंच रखते हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या टीएमसी उम्मीदवार के सामने अनसोल में क्या भाजपा लोकसभा चुनाव में "जितेंद्र तिवारी कार्ड" खेलेगी? हाल के वर्षों में आसनसोल पर कई चुनावी प्रयोग हुए हैं। बाबुल सुप्रियो के संसद पद से हटने के बाद शत्रुघ्न सिन्हा इस सीट से सांसद हैं। ऐसे में तिवारी की चुनावी सफलता के ट्रैक रिकॉर्ड और उनके वोट जुटने की शैली के साथ, वह ऐसे उम्मीदवार हो सकते हैं जो न केवल भाजपा को आसनसोल संसदीय सीट सुरक्षित करने में मदद करेंगे बल्कि क्षेत्र में पार्टी के अभियान का चेहरा भी बनेंगे।

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