Kolkata Doctor Case: पुलिस को बताने से पहले मीटिंग, क्राइम सीन पर शव के पास प्रिंसिपल के साथ बाहरी कौन था?

Kolkata Doctor Case News: कोलकाता में महिला डॉक्टर के साथ रेप के बाद हुई हत्या की गुत्थी अभी तक रहस्यमयी बनी हुई है। इस वारदात को लेकर आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के तत्कालीन प्रिंसिपल डॉक्टर संदीप घोष को लेकर कुछ और संदेहास्पद चीजें सामने आई हैं।

कोलकाता पुलिस ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुई इस जघन्य वारदात में एक आरोपी संजॉय रॉय को अगले दिन ही पकड़ लिया था, लेकिन इसमें अकेला वही शामिल था, यह दावा हजम करने के लिए पीड़िता के माता-पिता भी तैयार नहीं हैं।

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पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को लेकर नया खुलासा
अस्पताल में ड्यूटी के दौरान एक युवती के साथ हुई जिस वारदात को देश का सुप्रीम कोर्ट भी 'भयावह' बता रहा है, उस मामले में आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के तत्कालीन प्रिंसिपल डॉक्टर संदीप घोष शुरू से संदेह के घेरे में हैं और उन्हें जिस तरह से बचाने की कोशिश की गई है, उसको लेकर पश्चिम बंगाल सरकार पर सवालिया निशान लग रहे हैं।

प्रिंसिपल के दफ्तर से ही निकली सुसाइड वाली थ्योरी!
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अब 31 वर्षीय पीड़ित डॉक्टर के सहयोगियों ने जो खुलासा किया है, उससे संदीप घोष के इरादों पर शक की सूई और गहरा रही है। पीड़िता के सहकर्मियों का आरोप है कि भयंकर बलात्कार और बेहमी से की गई ट्रेनी डॉक्टर की हत्या को सुसाइड बताने की थ्योरी प्रिंसिपल संदीप घोष के दफ्तर से ही प्रसारित की गई।

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में भी यह सवाल उठ चुका है कि जब यह शुरू से ही रेप और हत्या का मामला लग रहा था तो अस्पताल ने इसे आत्महत्या क्यों बताया? पीड़ित डॉक्टर के माता-पिता का कहना है कि 9 अगस्त की सुबह अस्पताल से उनके पास जल्दी-जल्दी दो फोन आए।

माता-पिता को दो घंटे बाद भी गलत सूचना क्यों दी गई?
सुबह 10 बजकर 53 मिनट पर अस्पताल के असिस्टेंट सुप्रिटेंडेंट द्विपायन बिस्वास ने बताया कि उनकी बेटी बीमार हो गई है। इसके तुरंत बाद ही दूसरा कॉल आता है कि उसने आत्महत्या कर ली है।

पीड़िता के एक सहकर्मी ने कहा कि असिस्टेंट सुप्रिटेंडेंट बिस्वास ने अपनी तरफ से सुसाइड वाली बात नहीं कह होगी। वहीं एक का दावा है कि 'योजना ही थी कि इसे सुसाइड बता दिया जाए।' ये शव का पता चलने और माता-पिता को सूचना देने में करीब दो घंटे की देरी पर भी सवाल उठा रहे हैं। शव का पता सुबह लगभग 9 बजे ही चल गया था।

प्रिंसिपल ने किन बाहरी लोगों के साथ शव के पास की मीटिंग?
कथित तौर पर पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष ने शव की जानकारी मिलने के बाद उसी सेमिनार हॉल में एक मीटिंग भी बुलाई थी, जिसमें अस्पताल के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों के अलावा कम से कम दो बाहरी लोग भी मौजूद थे।

यह मीटिंग आरजी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल आउटपोस्ट के इंसेपेक्टर-इंचार्ज को घटना की सूचना देने से पहले बुलाई गई थी। उन्हें इसके बारे में शव का पता चलने के एक घंटे से भी ज्यादा देर बाद सुबह लगभग 10 बजकर 10 मिनट पर सूचना दी गई थी।

शव के पास बाहरी लोगों के साथ क्यों की थी मीटिंग?
सवाल है कि वे बाहरी लोग आखिर कौन थे? उन्हें क्राइम सीन पर क्यों ले जाया गया? आखिर उस मीटिंग में ऐसा क्या तय किया गया, जो पुलिस को सूचना देने से भी ज्यादा जरूरी था? क्या ये सब हत्या और रेप को आत्महत्या साबित करने की साजिश का हिस्सा था?

इन तमाम सवालों का जवाब सीबीआई को तलाशनी पड़ेगी, तभी शायद इस रहस्यमयी घटना की पूरी गुत्थी सुलझ सकती है। जबकि, माता-पिता को घंटों बाद भी गलत सूचना दी गई और अस्तपताल पहुंचने पर भी तीन घंटे तक बेटी का मुंह तक नहीं देखने दिया गया।

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