'हम गाजा के साथ हैं...खून चाहे तो खून और माल चाहे तो माल, सब कुछ देंगे', जमीयत उलेमा-ए-हिंद का ऐलान
Israel-Hamas War: इजराइल और फिलिस्तीन चरमपंथी संगठन हमास संघर्ष के बीच मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने शनिवार को फिलिस्तीन के समर्थन में कोलकाता में विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शन में फ्री फिलिस्तीन के नारे लगाए गए। इस दौरान जमीयत उलमा ए हिंद के पश्चिम बंगाल के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने कहा कि युद्ध से मुद्दे नहीं सुलझेंगे, बातचीत से समाधान होगा। हम गाजा के साथ खड़े हैं, हम फिलिस्तीन के साथ खड़े हैं। उन्हें जो भी जरूरत होगी, खून या सामग्री हम करेंगे।
सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने कहा कि इजराइल ने अरब मुल्क में नाजायज कब्जा किया है। इसके साथ-साथ जुल्म, और अरब लोगों की फिलिस्तीन जायदाद पर कब्जा जमा रहे हैं। इसलिए उसके खिलाफ विरोध होना चाहिए। पीएम मोदी जी ने इजराइल का सपोर्ट किया और फॉरेन अफेयर्स फिलिस्तीनी को सपोर्ट कर रही है। यह डुअल पॉलिसी है। जबकि एक पॉलिसी होनी चाहिए। जंग से मसला हल नहीं होगा, बातचीत से मसला हल होगा। हम गाजा, फिलिस्तीन के साथ हैं। जो भी मदद चाहेंगे, हम देंगे। खून चाहे तो खून, माल चाहे तो माल। सब कुछ हम देंगे।

इजराइल ने 7 अक्टूबर के हमले के लिए हमास को नष्ट करने की कसम खाई है, जिसमें उसके लड़ाकों ने 1,300 इजराइलियों, मुख्य रूप से नागरिकों को मार डाला और कई बंधकों को जब्त कर लिया। इसके बाद से इजराइल गाजा में जवाबी हवाई हमले कर रहा है। इजराइल के मिसाइल हमले में 600 से अधिक बच्चों सहित कम से कम 1,900 गाजावासी मारे गए हैं। इजराइल ने गाजा पट्टी में संभावित जमीनी हमले से पहले फिलिस्तीनियों को खाली करने की चेतावनी दी है। तेल अवीव ने भी अपनी सेना, टैंक और भारी हथियार गाजा के आसपास दक्षिणी रेगिस्तानी इलाके में स्थानांतरित कर दिए हैं।
मदनी ने पीएम मोदी से की ये मांग
शनिवार को जमीयत गुट के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इजराइल और फिलिस्तीन के बीच संघर्ष में मध्यस्थता करने की अपील जारी की। उन्होंने प्रधानमंत्री से न्याय के सिद्धांतों में निहित स्थायी शांति की वकालत करने और निर्दोष नागरिकों के जीवन की रक्षा करने के लिए अपने प्रभाव का लाभ उठाने का आग्रह किया। मदनी ने इजराइल द्वारा घोषित युद्ध की समाप्ति के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अरब लीग सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप और ठोस कार्रवाई की भी मांग की।
संघर्ष की वजह 'इजराइल द्वारा फिलिस्तीनी क्षेत्रों पर कब्जा'
उन्होंने एक बयान में कहा कि जमीयत, फिलिस्तीनी लोगों के साथ एकजुटता से खड़ी है, जिन्होंने 75 साल तक इजरायली उत्पीड़न और हिंसा को सहन किया है, जिसके परिणामस्वरूप उनकी वर्तमान गंभीर स्थिति हो गई है। वे खुद को अपनी मातृभूमि में कैदियों के रूप में देख रहे हैं। अपनी मातृभूमि की आजादी और मस्जिद अल अक्सा के संरक्षण के लिए अटूट प्रयास कर रहे हैं। मदनी ने यह भी कहा कि संघर्ष का मूल कारण 'इजराइल द्वारा फिलिस्तीनी क्षेत्रों पर कब्जा है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र द्वारा सहमत मापदंडों के अनुसार हल किया जाना चाहिए।












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