Underwater Metro: नदी के भीतर बनी सुरंग में लगाई सरपट दौड़, जानिये देश की पहली अंडरवॉटर मेट्रो की खासियत...
Specialities of India's first Underwater Metro: देश की पहली अंडरवॉटर मेट्रो ने कोलकाता में नदी के अंदर बनी सुरंग में दौड़ लगाई। आइये 80 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से दौड़ने वाली इस मेट्रो की खासियत के बारे में...

Underwater Metro: कोलकाता मेट्रो ने उस वक्त इतिहास रच दिया, जब देश में पहली बार किसी नदी के भीतर बनी सुरंग में इस मेट्रो ने दौड़ लगाई। हावड़ा से एस्प्लेटेनेड तक इस मेट्रो ने अपनी यात्रा को पूरा किया।
नदी के अंदर जब मेट्रो दौड़ रही थी, तो इसमें केवल अधिकारी और इंजीनियर मौजूद थे। मेट्रोके महाप्रबंधक पी उदय कुमार रेड्डी ने इसे ऐतिहासिक बताया।
क्या बोले अधिकारी?
अधिकारी ने कहा कि कोलकाता और इसके उपनगरों के लोगों के लिए आधुनिक परिवहन व्यवस्था मुहैया कराने की ओर ये क्रांतिकारी कदम है। रेड्डी ने आगे बताया कि हावड़ा मैदान से एस्प्लेनेड तक ट्रायल रन अगले सात महीनों तक चलना है। इसके बाद इस रूट पर इसकी रेगुलर सर्विसेज शुरू हो जाएंगी।
देश के इतिहास में ये पहली बार है, जब पानी के अंदर कोई मेट्रो दौड़ेगी। ऐसे में चलिये इसकी कुछ खासियत के बारे में जानते हैं।
- नदी के बीचोंबीच चलने वाली इस ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 80 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी।
- इसके साथ ही इसे नदी के नीचे से गुजरने में 60 सेकेंड यानी एक मिनट से भी कम का समय लगेगा।
- ट्रेन को हावड़ा मैदान से एसप्लेनेड तक जाने में तकरीबन छह मिनट का वक्त लगेगा।
- साल 2035 तक इस मेट्रो में 10 लाख यात्री सफर कर सकेंगे।
- इस कॉरिडोर की लंबाई 16.55 किलोमीटर है और ये हुगली नदी के नीचे एक स्ट्रेच के साथ कोलकाता के रास्ते साल्ट लेक और हावड़ा को जोड़ेगा।
- 16.55 किलोमीटर के इस रास्ते में 10.8 किलोमीटर का हिस्सा अंडरग्राउंड है।
- ये अंडरवाटर टनल हुगली नदी की सतह से 13 मीटर और जमीनी सतह से 33 मीटर नीचे है।
यहीं चली थी देश की पहली मेट्रो
देश के इतिहास की पहली अंडरवॉटर मेट्रो की कुछ तस्वीरें और वीडियोज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल भी हो रहे हैं। बताते चलें कि देश की पहली मेट्रो भी कोलकाता में ही चली थी। साल 1984 में पहली मेट्रो चली थी। जबकि दिल्ली की बात करें, तो दिल्ली में मेट्रो सर्विसेज साल 2002 से शुरू हुई हैं।












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