'दम है तो रोक कर दिखाएं....' बीजेपी ने CAA पर ममता बनर्जी को दी चुनौती, TMC ने क्या कहा ? जानिए

नागरिकता संशोधन कानून को लागू करने के मसले पर एक बार फिर राजनीति गर्म होने लगी है। सबसे ज्यादा सियासी तूफान बंगाल में मचने लगा है। भारतीय जनता पार्टी ने ममता बनर्जी सरकार को खुली चुनौती दी है कि सीएए लागू होकर रहेगा, हिम्मत है तो रोक कर दिखाएं। कुछ दिन पहले ही बंगाल की मुख्यमंत्री ने लोगों से कहा था कि वह अपना नाम मतदाता सूची में जरूर डलवाएं, नहीं तो एनआरसी से वह गायब हो जाएगा। हालांकि, बीजेपी की अभी की चुनौती पर टीएमसी की ओर से भी पलटवार किया गया है।

बीजेपी ने सीएए पर ममता बनर्जी को दी चुनौती

बीजेपी ने सीएए पर ममता बनर्जी को दी चुनौती

पश्चिम बंगाल के विरोधी दल के नेता शुभेंदु अधिकारी ने राज्य में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू किए जाने को लेकर ममता बनर्जी सरकार को सीधी चुनौती दे डाली है। उन्होंने एक तरह से राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ललकारा है कि उनमें अगर ताकत है तो वह इसे लागू होने से रोक के दिखाएं। गौरतरब है कि टीएमसी नेता सीएए लागू किए जाने की जबर्दस्त विरोधी रही हैं। पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले के ठाकुरनगर में बीजेपी नेता ने ये बात कही है, जहां मटुआ समुदाय के लोगों की बड़ी आबादी है, जिनकी जड़ें बांग्लादेश से जुड़ी हुई मानी जाती है।

अगर आप में दम है तो रोक दें- बीजेपी

अगर आप में दम है तो रोक दें- बीजेपी

शुभेंदु अधिकारी ने ठाकुरनगर में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि नागरिकता संशोधन कानून यह नहीं कहता कि यदि कोई प्रामाणिक कानूनी दस्तावेज के साथ भारत का निवासी है तो उसकी नागरिकता छीन ली जाएगी। नंदीग्राम के विधायक ने राज्य की मुख्यमंत्री का नाम लिए बगैर कहा कि 'सीएए के बारे में हम लोग कई बार चर्चा कर चुके हैं। राज्य में यह लागू किया जाएगा। अगर आप में दम है तो इसे अमल में आने से रोक दें।' नागरिकता संशोधन कानून अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और क्रिश्चियन समुदाय के प्रवासियों को भारतीय नागरिकता की गारंटी देता है, जिसका बीजेपी-विरोधी पार्टी विरोध करती हैं।

2019 में बना था नागरिकता संशोधन कानून

2019 में बना था नागरिकता संशोधन कानून

नागरिकता संशोधन कानून को 2019 में संसद से पारित होने के बाद राष्ट्रपति की भी मंजूरी मिल चुकी है। लेकिन, इस कानून के तहत नियम अभी तक नहीं निर्धारित किए गए हैं और केंद्र सरकार बार-बार कोविड को इसकी वजह बताती रही है। इसका नतीजा ये हुआ है कि अभी तक इस कानून के तहत किसी को भी भारतीय नागरिकता नहीं दी जा सकी है। शनिवार को बंगाल भाजपा नेता ने सार्वजनिक सभा में कहा कि 'मटुआ समुदाय के सदस्यों को भी नागरिकता प्रदान की जाएगी।'

बंगाल की राजनीति में मटुआ समुदाय की प्रभावी भूमिका

बंगाल की राजनीति में मटुआ समुदाय की प्रभावी भूमिका

बंगाल की राजनीति में मटुआ समुदाय की अब काफी प्रभावी भूमिका हो चुकी है। फिलहाल इस समाज के लोगों पर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी का ज्यादा प्रभाव माना जाता है। राज्य के नादिया, उत्तर और दक्षिण 24 परगना जिलों में मटुआ समुदाय की अनुमानित आबादी 30 लाख बतायी जाती है। अगर चुनावी दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह समाज पांच लोकसभा क्षेत्रों और 50 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान को प्रभावित कर सकता है, जिससे इनकी अहमियत का अंदाजा लगाया जा सकता है।

हम ऐसा कभी भी नहीं होने देंगे-टीएमसी

हम ऐसा कभी भी नहीं होने देंगे-टीएमसी

केंद्रीय मंत्री और पश्चिम बंगाल के बनगांव लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद शांतनु ठाकुर ने भी कहा कि 'पश्चिम बंगाल में (सीएए ) एक हकीकत.... 'होगी 'और नरेंद्र मोदी सरकार इस लक्ष्य को सच में बदलने के लिए प्रतिबद्ध है।' इस बीच तृणमूल नेता और पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ टीएमसी नेता फिरहाद हाकिम ने कहा है कि बीजेपी 'वोट-बैंक पॉलिटिक्स के नजरिए से' 2023 के पंचायत चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले सीएए कार्ड से 'खेल' रही है। उन्होंने भी भाजपा को ललकारते हुए कहा है कि 'लेकिन, हम ऐसा कभी भी नहीं होने देंगे।' हाल ही में ममता बनर्जी ने लोगों से यह सुनिश्चित करने को कहा था कि वोटर लिस्ट में अपना नाम सुनिश्चित करें, नहीं तो उन्हें एनआरसी के डिटेंशन कैंप में भेज दिया जाएगा। (इनपुट-पीटीआई)

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