पैसों की तंगी में 'बेटी का सौदा' ! साथ पढ़ने वाले बच्चे बने मसीहा, शादी कैंसिल करा कर बने मिसाल
फौलादी इरादों वाले कुछ स्कूली बच्चों ने अपनी सहपाठी का जीवन बचाकर मिसाल पेश की है। रिपोर्ट के मुताबिक 9वीं क्लास में पढ़ने वाली बच्चों ने बाल विवाह टाल कर एक बेटी का जीवन बचाया है। जानिए कैसे हुआ कमाल

भले ही Child Marriage भारत में गैरकानूनी है, लेकिन आज भी कई ऐसे परिवार हैं जो पैसों की तंगी की दुहाई देकर 'बेटी का सौदा' करने जैसे शर्मनाक फैसले कर लेते हैं। 9वीं क्लास में पढ़ रही बेटी का बाल विवाह करने जा रहे परिवार को उस समय निराशा हाथ लगी जब सहपाठियों ने अपने फौलादी इरादों से दोनों परिवारों को झुकने पर मजबूर कर दिया। साथ पढ़ने वाले बच्चों ने जब मोर्चा संभाला तो शादी कैंसिल करा कर ही दम लिया। स्कूली बच्चों ने अपने सामूहिक प्रयास से मिसाल पेश की है।

जरूरत में काम आने वाले दोस्त
एक मशहूर कहावत है- जरूरत में काम आने वाले दोस्त ही सच्चे दोस्त होते हैं। इसे चरितार्थ किया है कुछ स्कूली बच्चों ने। न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक स्कूली बच्चों ने पश्चिम बंगाल में अपनी सहपाठी नाबालिग लड़की की शादी रुकवाने का साहसिक कारनामा किया है।

बाल विवाह रोकने पहुंचे फौलादी इरादों वाले बच्चे
पश्चिम बंगाल के पश्चिम मिदनापुर जिले में एक नाबालिग छात्रा के सहपाठी मसीहा बनकर उभरे जब उसकी मर्जी के खिलाफ शादी कराने की तैयारी कर चुके परिवार के सामने ये बच्चे फौलादी इरादों के साथ पहुंच गए। उन्होंने शादी रोकने की अपील की और परिवार को इस गैरकानूनी कृत्य के बारे में चेतावनी भी दी।

माता-पिता ने तय कर दी शादी, छूट गया स्कूल
रिपोर्ट के मुताबिक गोलर सुशीला उच्च विद्यालय के नौवीं कक्षा के छात्रों को उस समय शक हुआ जब उनकी सहपाठी लगभग एक सप्ताह तक स्कूल नहीं आई। साथ पढ़ने वाले बच्चों को पता चला कि परिजनों ने इतनी छोटी उम्र में उसकी शादी तय कर दी है तो इन सबने मिलकर कुछ करने का फैसला लिया।

लड़की घर के पिछले दरवाजे से निकाली गई
बाल विवाह की बात पता लगते ही छात्रा के घर पहुंचे बच्चों ने शादी कैंसिल करने और उसे वापस स्कूल जाने देने की प्रार्थनी की। इतने के बावजूद सिर पर आई बला को टालने की कोशिश में लड़की के परिजनों ने चुपके से घर के पिछले दरवाजे से बच्ची को दूल्हे के घर पहुंचा दिया।
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आंदोलनकारी बच्चों से हारे 'हैवान'
सहपाठियों को जब घर वालों की इस हरकत के बारे में पता लगा तब भी उन्होंने हार नहीं मानी। बचपन बचाने का संकल्प लेकर पहुंचे स्कूली बच्चे दूल्हे के घर जा पहुंचे। लड़के के परिवार वालों को इन बच्चों ने घर के सामने अनिश्चितकालीन धरना देने की धमकी दी। परेशानी टलती न देख दूल्हे के परिवार ने आंदोलनकारी छात्रों के सामने घुटने टेक दिए। बच्ची को कब्जे से मुक्त कराया गया और सहपाठी उसे वापस स्कूल ले गए।

दृढ़ संकल्प के कारण बाल विवाह टला
इस घटना पर स्कूल के प्रिंसिपल सुरेश चंद्र पाडिया ने बच्ची को बचाने पहुंचे छात्रों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि बच्चों के दृढ़ संकल्प के कारण बाल विवाह टाला गया। स्कूल केशपुर ब्लॉक में है यहां के खंड विकास अधिकारी दीपक कुमार घोष ने कहा, लड़की के परिवार ने वादा किया है कि वह 18 साल की होने से पहले उसकी शादी नहीं करेंगे। लड़की के पड़ोसियों ने बताया, कि उसके परिवार ने आर्थिक समस्याओं के कारण उसकी जल्दी शादी करने का फैसला किया।












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