Shiv Sena UBT: उद्धव की सेना के 2 सांसदों ने बगावत की अटकलों पर लगाया विराम, क्या संजय राउत ने कर दिया खेला?
Shiv Sena UBT: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना (UTB) के भीतर संभावित टूट होने की संभावना जताई जा रही थी। पार्टी के 6 सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट के संपर्क में होने के दावे किए जा रहे हैं। इन अटकलों के बीच इस पूरे घटनाक्रम ने नया ट्विस्ट आ गया है। पार्टी में संभावित टूट की चर्चाओं के बीच जिन सांसदों के शिंदे गुट के संपर्क में होने की बातें सामने आ रही थीं, उनमें से दो सांसदों ने सार्वजनिक रूप से ऐसी किसी भी संभावना से इनकार कर दिया है।
उद्धव ठाकरे की शिवसेना के दो सांसदों ने सामने आकर कहा कि उनको लेकर झूठी अफवाहें फैलाई जा रही हैं। ये वो ही सांसद हैं जिनका नाम दो दिन से बागी सांसदों की लिस्ट में शुमार बताया जा रहा है। शिंदे गुट में जाने से इनकार के बाद बागी सांसदों का पूरा गेम पलटता दिख रहा है।

अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में संख्या बल किसके पक्ष में जाता है और क्या पार्टी के भीतर उठी हलचल वास्तव में किसी बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत है या फिर यह केवल अटकलों तक सीमित रह जाएगी।
संजय पाटिल ने किया शिंदे गुट से जुड़ने से इनकार
UBT सांसद संजय पाटिल ने भी शिंदे गुट में शामिल होने की अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि वह मुंबई में हैं और इस पूरे मामले पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं संजय राउत और अरविंद सावंत से बात की जानी चाहिए। पाटिल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें संसदीय दल की बैठक के लिए दिल्ली बुलाया गया है और उनका एकनाथ शिंदे से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा, "मैं एकनाथ शिंदे से क्यों मिलूंगा? मेरा उन लोगों से कोई लेना-देना नहीं है।"
सांसद राजभाऊ वाजे बोले- मैं कहीं नहीं जा रहा हूं
वहीं नासिक से सांसद राजाभाऊ वाजे ने भी उद्धव ठाकरे के प्रति अपनी निष्ठा दोहराई है। उन्होंने साफ कहा कि वह कहीं नहीं जा रहे हैं और UBT के साथ ही बने रहेंगे। मीडिया से बात करते हुए वाजे ने बताया कि वह संसदीय समिति की बैठक में भाग लेने के लिए दिल्ली जा रहा हूं। उन्होंने कहा कि दोपहर तीन बजे प्रस्तावित बैठक में वह शामिल होंगे।
क्या बागियों के पास है दो-तिहाई बहुमत?
यूबीटी में बगावत की अटकलों के बीच दिल्ली में संजय राउत ने अपने सरकारी आवास पर बैठक की और कहां हमारे सा लोकसभा सांसद अरविंद सावंत, चीफ व्हिप अनिल देसाई और नासिक के सांसद राजाभाऊ मौजूद हैं।राउत ने खुलासा किया कि बागी सांसदों के पास दलबदल कानून के तहत आवश्यक दो-तिहाई समर्थन नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी के सांसदों को तोड़ने की कोशिशें सफल नहीं होंगी और संख्या बल के अभाव में कोई भी कदम कानूनी चुनौती का सामना करेगा।
संजय राउत ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव और डराने-धमकाने की रणनीति अपनाई जा रही है, लेकिन पार्टी को अपने सांसदों पर पूरा भरोसा है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष को भी पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया गया है।
स्पीकर को लिखी गई शिकायत पर क्या बोले संजय राउत?
संजय राउत ने कहा कि पार्टी ने लोकसभा स्पीकर को पत्र भेजकर कथित राजनीतिक साजिशों और दबाव की राजनीति की जानकारी दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल UBT के सांसदों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन पार्टी एकजुट है और ऐसे प्रयास सफल नहीं होंगे।
'उद्धव ठाकरे के चेहरे पर जीते थे सांसद'
राउत ने बागी रुख अपनाने वाले सांसदों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ये सांसद किसी राष्ट्रीय नेता के चेहरे पर नहीं, बल्कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व और उनके प्रचार अभियान के दम पर चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान उद्धव ठाकरे ने इन उम्मीदवारों के लिए प्रचार किया था और जनता का समर्थन दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
कौन हैं Shiv Sena UBT के बागी सांसद
संजय जाधव (परभणी): मातोश्री बैठक में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं थे, फोन पर संपर्क में बताए गए। मराठवाड़ा में मजबूत जनाधार के कारण इन्हें संभावित बागी सांसदों में गिना जा रहा है।
संजय देशमुख (यवतमाल-वाशिम): केंद्रीय मंत्री से मुलाकात को लेकर चर्चा में आए। शिंदे गुट के करीब होने की अटकलें लगाई जा रही हैं, हालांकि उन्होंने इसे विकास से जुड़ी बैठक बताया है।
बाबासाहेब (भाऊसाहेब) वाकचौरे (शिरडी): पहले कांग्रेस और भाजपा में रहे, बाद में उद्धव गुट में लौटे। मातोश्री बैठक के दौरान संपर्क न होने की खबरों से इनका नाम बागी सूची में जोड़ा गया।
नागेश अष्टिकर (हिंगोली): मराठवाड़ा की राजनीति में सक्रिय भूमिका। मातोश्री बैठक में भूमिका को लेकर चर्चाएं, लेकिन अब तक कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया।
ओमराजे निंबालकर (धाराशिव): कोर्ट केस में व्यस्त रहने के कारण अनुपस्थिति की बात सामने आई। मजबूत प्रभाव वाले क्षेत्रीय नेता, लेकिन राजनीतिक स्थिति पर स्पष्ट संकेत नहीं।
राजाभाऊ वाजे (नासिक): शुरुआत में नाम चर्चा में था, लेकिन उन्होंने उद्धव ठाकरे के साथ रहने की बात कहकर बगावत की अटकलों को खारिज किया।
संजय दिना पाटिल (मुंबई नॉर्थ ईस्ट): पार्टी के साथ मजबूती से खड़े होने की बात कही। शुरुआती चर्चाओं में नाम आया था, लेकिन उन्होंने बगावत से इनकार किया।
शिवसेना के स्थापना दिवस से पहले जारी है वर्चस्व की लड़ाई
शिवसेना UBT के स्थापना दिवस से ठीक पहले सामने आई इन घटनाओं ने पार्टी के भीतर राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। हालांकि पार्टी नेतृत्व लगातार एकजुटता का दावा कर रहा है, लेकिन सांसदों की गतिविधियों और दिल्ली में होने वाली बैठकों पर पूरे महाराष्ट्र की नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि यह महज अटकलें हैं या फिर शिवसेना UBT को एक और बड़े राजनीतिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।














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