पश्चिम बंगाल: चुनाव बाद हिंसा मामले में सीबीआई ने दर्ज की 10 और FIR, अब तक रजिस्टर हो चुके 31 केस
बंगाल चुनाव बाद हिंसा मामले में सीबीआई ने दर्ज की 10 और FIR, अब तक रजिस्टर हो चुके 31 केस
कोलकाता, 31 अगस्त: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मंगलवार को 10 और एफआईआर दर्ज की हैं। इससे पहले रविवार को सीबीआई ने सात मामले दर्ज किए थे। सीबीआई इस मामले में अब अब तक 31 एफआईआर दर्ज कर चुकी है। कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर मामले की जांच कर रही सीबीआई ने उन मामलों की जांच अपने हाथ में ले ली है, जो पहले से पश्चिम बंगाल के विभिन्न पुलिस स्टेशनों में दर्ज हैं।

सीबीआई ने नंदीग्राम के पूरब मेदिनीपुर, सितालकुची, बांकुड़ा, नदिया, कोलकाता, कूचबिहार, उत्तरी 24 परगना, मुर्शिदाबाद और दूसरे इलाकों में चुनाव नतीजों के बाद हुई हिंसा से जुड़े अपराधों के मामले में ये एफआईआर की हैं। सीबीआई इनकी जांच कर रही है। इसके अलावा सीबीआई ने पश्चिम बंगाल के उन हिस्सों में अपनी टीमें भेजी हैं, जहां से हिंसा की शिकायतें मिली थीं। ताकि पीड़ितों के बयानों को दर्ज किया जा सके। इसके लिए सीबीआई ने राज्य को चार हिस्सों में बांटा है और जांच के लिए विशेष टीमें बनाई हैं।
हाईकोर्ट ने दिया था आदेश
कलकत्ता हाईकोर्ट की पांच सदस्यीय बेंच ने हाल ही राज्य के विधानसभा चुनावों के बाद कथित तौर पर हिंसा, दुष्कर्म और हत्या के मामलों की जांच सीबीआई को सौंपी थी। कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद की हिंसा की निष्पक्ष जांच की मांग वाली कई जनहित याचिकाओं पर ये फैसला सुनाया था। इसके अलावा कोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) अध्यक्ष को चुनाव के बाद की हिंसा के दौरान मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोपों की जांच के लिए एक जांच समिति गठित करने को भी कहा है।
बता दें कि इस साल 2 मई को बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने और टीएमसी को पूर्ण बहुमत से जीतने के बाद राज्य में हिंसा की कुछ खबरें आई थीं। बीजेपी का आरोप है कि टीएमसी के लोगों ने बीजेपी कार्यकर्ताओं को नतीजों के बाद निशाना बनाया। बीजेपी नेताओं का कहना है कि ममता सरकार ने जानबूझकर ये हिंसा करवाई, जिसमें विपक्ष को निशाना बनाया गया और आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। वहीं ममता बनर्जी का कहना है कि हिंसा की घटनाएं तब हुईं जब आचार संहिता लगी थी। उनके शपथ लेने के बाद कोई हिंसा नहीं हुई।












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