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मालदा में किसानों के लिए क्यों बेकार गई आम की बंपर पैदावार? अब सरकार से लगा रहे हैं यह गुहार

पश्चिम बंगाल का मालदा और मुर्शिदाबाद जिला आम के उत्पादन और उसके खास स्वाद के लिए काफी मशहूर है। इस बार मालदा में पिछली बार की तुलना में इसकी बंपर पैदावार भी हुई है। लेकिन, आम के किसान इस बात से परेशान हैं कि उन्हें लागत भी नहीं निकल पा रही है।

मंगलवार को कारोबारियों की एक संस्था ने कहा है कि मालदा के आम किसानों ने इस संकट से उबरने के लिए राज्य सरकार से दखल देने की मांग की है। आम किसानों की मांग है कि वह मालदा से दूसरे राज्यों और विदेशों में आम के निर्यात में मदद करे और प्रोत्साहन दे।

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आम के निर्यात के लिए सुविधाएं देने की मांग
कारोबारियों की संस्था ने मालदा शहर में एक आम परीक्षण और निर्यात केंद्र खोलने और आम किसानों के लिए प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की भी माग की है, ताकि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था भी बेहतर हो। मालदा मर्चेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष उज्जल साहा ने कहा कि सरकार ने पहले दोनों जिलों को आमों के निर्यात जोन के तौर पर मान्यता दी थी, लेकिन यह सिर्फ कागज पर ही सीमित रह गए।

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किसानों को सिर्फ 10 रुपए किलो ही मिल रहा है
उन्होंने कहा कि पिछले दो-तीन वर्षों में इस क्षेत्र में आम की खेती के लिए अतिरिक्त 200 हेक्टेयर शामिल हुए हैं। साहा ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, 'इस समय किसानों को बगीचे में सिर्फ 10 रुपए प्रति किलो ही मिल पा रहा है, जबकि उत्पादन लागत 15 रुपए प्रति किलो है। यह ज्यादा उत्पादन और उसके अनुमात में मांग में कमी की वजह से है, जबकि पड़ोसी राज्यों में भी भेजा जा रहा है।'

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4,00,000 टन आम के उत्पादन का अनुमान
इस सीजन में मालदा में करीब 4,00,000 टन आम के उत्पादन का अनुमान है, जो कि पिछले साल से 1,00,000 टन अधिक है। इस समय यहां 31,000 हेक्टेयर में आम की खेती हो रही है। जबकि, वन इंडिया ने हाल ही में एक रिपोर्ट दी थी कि देश के सबसे बड़े आम उत्पादक राज्य यूपी में इस साल आम की फसल बहुत ज्यादा खराब हो गई है।

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'बहुत ज्यादा पैदावार से किसानों को नहीं हुआ फायदा'
उनके मुताबिक, 'विदेशी से निर्यात की मांग अभी अच्छी नहीं है और उत्तर भारत से थोड़ा है। लाभ कमाने के लिए हमें करीब 100 ट्रक लोड निर्यात करने की जरूरत है, लेकिन रोजाना करीब 40 की सप्लाई हो पा रही है। इस साल बहुत ज्यादा पैदावार की वजह से जिले में आम के किसानों को फायदा नहीं हुआ है।'

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दिल्ली में आम महोत्सव में 35 टन बिका
19 जून को दिल्ली में समाप्त हुए एक पखवाड़े के पश्चिम बंगाल सरकार के आम उत्सव में 35 टन आम बेचने में सफलता मिली। इसमें राज्य के सात आम उत्पादक जिलों ने हिस्सा लिया था। लेकिन, कोलकाता में इस हफ्ते शुरू होने वाला आम महोत्सव पंचायत चुनावों की घोषणा की वजह से रद्द हो गया।

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राज्य सरकार के उद्यान विभाग के डायरेक्टर जयंत अइकत के मुताबिक दिल्ली आम महोत्सव में इसकी बिक्री बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने 30 रुपए किलो की सब्सिडी भी उपलब्ध करवाई थी। एग्रीकल्चर एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (APEDA)जो कि निर्यात के लिए नोडल एजेंसी है, उसने सवालों का जवाब नहीं दिया।

इसने पहले घोषणा की थी कि वह बंगाल से आमों के 75 किस्मों की निर्यात की कोशिश कर रहा है, क्योंकि देश स्वतंत्रता के 75 वर्ष के उपलक्ष्य में आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। (इनपुट-पीटीआई)

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