कैसे फलों के राजा आम को असमान्य मौसम ने चूस लिया? यूपी में 40% तक घट सकता है उत्पादन
भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है और देश में उत्तर प्रदेश में आम की सबसे ज्यादा पैदावार होती है। लेकिन, यूपी में इस साल आम की फसल को असामान्य मौसम की बुरी नजर लग गई है। मौसम के पैटर्न में बदलाव और तापमान में अत्यधिक उतार-चढ़ाव ने किसानों को मायूस कर दिया है।
टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक जानकारों का कहना है कि पहले समान्य तौर पर 10% तक आम की फसल बर्बाद हो जाती थी। लेकिन, इस बार 30 से 40% की बर्बादी हो सकती है। लखनऊ के पास मलिहाबाद दुनिया भर में आम उत्पादन के लिए मशहूर है, लेकिन किसानों का कहना है कि उनकी 80% फसल चौपट हो गई है।

असमान्य तापमान से आम को होता है नुकसान
आम की अच्छी पैदावार के लिए मार्च और अप्रैल महीने में 27 डिग्री सी से-35 डिग्री सी का तापमान चाहिए। अगर तापमान इससे कम रहता है या फिर ज्यादा हो जाता है तो उससे आम का फल प्रभावित होता है। यही नहीं बादल लगे रहने, बहुत ज्यादा नमी, ज्यादा तेज हवा भी आम के लिए सही नहीं है।
परागण की प्रक्रिया प्रभावित हुई
मेरठ स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल सेंट्रल एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के कृषि वैज्ञानिक प्रोफेसर आरएस सेंगर ने कहा, 'तापमान में उतार-चढ़ाव ने तबाह कर दिया है। पहले फरवरी और मार्च में तापमान अचानक बढ़ गया था, जिससे परागण की महत्वपूर्ण प्रक्रिया प्रभावित हुई। क्योंकि, इससे पराग ले जाने वाले मधुमक्खियों, तितलियों और अन्य कीड़ों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ा।'
बारिश के असामान्य पैटर्न ने भी आम की फसल खराब कर दी
उन्होंने आगे कहा, 'दूसरी बात कि अप्रैल में तापमान सामान्य से भी नीचे चला गया, इससे आगे भी फलों का विकास रुक गया। इससे स्वाभाविक तौर पर फलों के पकने की प्रक्रिया बाधित हुई।' जबकि, इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च के बागवानी विभाग के असिस्टेंट डारेक्टर जनरल डॉक्टर वीबी पटेल का कहना है कि बारिश के असामान्य पैटर्न के चलते बड़ी मात्रा में फल अनफर्टिलाइज्ड रह गया।
उनके अनुसार, 'फर्टिलाइजेशन के लिए स्टिग्मेटिक फ्लूड और पराग दोनों जरूरी हैं, जो कि बेमौसम बारिश के चलते धुल गए थे। इसकी वजह से जो अनिषेचित रह गए, उनका विकास ठहर गया। हमारे पास वास्तविक आंकड़ा नहीं है, लेकिन नुकसान बड़ा है।'
ओलों ने किया बंटाधार- किसान
वहीं अमरोहा के एक किसान नदीम सिद्दीकी ने कहा, 'बारिश ठीक है, तूफान भी चल जाता है, लेकिन ओले घातक हैं। यह तब हुआ जब फूल झड़ने लगे थे और फल विकसित होना शुरू हुआ था। कम से कम 40 से 50% फसल तो उसी समय बर्बाद हो गया था।'
मौसम की वजह से कीड़ों ने भी खराब किया खेल-किसान
बुलंदशहर के आम किसान रणदीप सिंह के मुताबिक, 'फूल तो शुरू में बहुत ही अच्छे आए थे। इसलिए हमलोग बहुत अच्छी पैदावार की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन खराब मौसम ने हमारी सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।' मलिहाबाद के एक किसान विजय सिंह मल्ल ने कहा, 'तापमान में उतार-चढ़ाव की वजह से कीड़े भी लग गए, जिसके चलते बहुत बड़ी मात्रा में फलों को नुकसान हो गया।'
दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है भारत
भारत में हर साल औसतन 279 लाख टन आम की पैदावार होती है। विश्व में कुल उत्पादन का यह 55% है। उत्तर प्रदेश में हर साल औसतन 48 लाख टन आम उत्पादित होता है। राज्य में लखनऊ, सहारनपुर और मेरठ मुख्य आम उत्पादक इलाके हैं। पिछले कुछ वर्षों में आमों की कुछ किस्में यहां से सिंगापुर, मलेशिया, इंग्लैंड और दुबई भी निर्यात की गई हैं।












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