विदिशा में दंपती का दुखद अंत: दहेज उत्पीड़न और आर्थिक तंगी से तंग आकर जहर खाया, पति की मौत,
MP News: मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के उनारसी कलां थाना क्षेत्र के चांदबर गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। एक नवविवाहित दंपती, राजकुमार अहिरवार और उमा बाई, ने दहेज उत्पीड़न, आर्थिक तंगी, और पारिवारिक विवादों से तंग आकर जहर खा लिया।
इस दुखद घटना में पति राजकुमार की मौत हो गई, जबकि पत्नी उमा जिला अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है। उमा ने अपने बयान में ससुर पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें दहेज के लिए मारपीट, पति के इलाज के लिए पैसे न देना, और जहर खाने के बाद भी अपमानजनक व्यवहार शामिल है।

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह घटना न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि समाज में दहेज जैसी कुप्रथा और बीमारियों के इलाज में आर्थिक बाधाओं की गंभीर समस्या को भी उजागर करती है। आइए, इस दुखद कहानी को विस्तार से जानते हैं-क्या हुआ चांदबर गांव में, क्यों मजबूर हुए राजकुमार और उमा, और इस घटना के पीछे की सामाजिक और पारिवारिक सच्चाई क्या है?
घटना का विवरण: जहर खाने की दुखद कहानी
विदिशा जिले के उनारसी कलां थाना क्षेत्र के चांदबर गांव में गुरुवार, 19 जून 2025 की शाम एक दुखद घटना घटी। 11 महीने पहले शादी करने वाले राजकुमार अहिरवार (28 वर्ष) और उमा बाई (24 वर्ष) ने जहर खा लिया। घटना रात करीब 8:30 बजे की है, जब राजकुमार ने पहले जहर खाया और फिर अपनी पत्नी उमा से कहा, "तेरा मेरे सिवा कौन है, तू भी जहर खा ले।" दोनों को बेहोशी की हालत में परिजनों द्वारा पहले स्थानीय अस्पताल और फिर गुना जिला अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने राजकुमार को मृत घोषित कर दिया, जबकि उमा का इलाज चल रहा है। उमा की हालत गंभीर बनी हुई है, और डॉक्टर उसे बचाने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं।
उमा के आरोप: ससुर का क्रूर व्यवहार
जिला अस्पताल में भर्ती उमा ने पुलिस को दिए अपने बयान में ससुर पर गंभीर आरोप लगाए। उसने बताया कि शादी के बाद से ही ससुर आए दिन दहेज के लिए मारपीट करते थे। उमा ने कहा, "ससुर हमेशा दहेज की मांग करते थे। मेरे मायके से जो कुछ लाए थे, उससे वे संतुष्ट नहीं थे। छोटी-छोटी बातों पर गाली-गलौज और मारपीट करते थे।"
उमा ने यह भी बताया कि गुरुवार शाम को ससुर ने राजकुमार से पैसों का हिसाब मांगा और इलाज के खर्चे को लेकर विवाद किया। विवाद इतना बढ़ गया कि ससुर ने राजकुमार को जहर खाकर मर जाने की बात कही और चप्पल से मारने की कोशिश की। इस अपमान और तनाव से आहत होकर राजकुमार ने रात 8:30 बजे जहर खा लिया। इसके बाद, उसने उमा को भी जहर खाने के लिए उकसाया। उमा ने बताया, "मेरे पति ने कहा कि मेरा कोई नहीं, तुम भी मेरे साथ चलो। मैंने भी जहर खा लिया।"
ससुर का अमानवीय व्यवहार: "नाटक कर रहा है"
उमा के बयान ने ससुर के क्रूर व्यवहार को और उजागर किया। उसने बताया कि जहर खाने के बाद जब राजकुमार और वह बेहोश होने लगे, तब भी ससुर ने कहा, "यह नाटक कर रहा है।" ससुर ने न तो उन्हें अस्पताल ले जाने में मदद की और न ही कोई सहानुभूति दिखाई। उमा ने कहा, "सास, ननद, और जेठ मुझे और मेरे पति को अस्पताल लेकर गए, लेकिन ससुर घर पर ही रहे।" यह बयान ससुर के अमानवीय रवैये को दर्शाता है, जिसने इस त्रासदी को और गहरा कर दिया।
राजकुमार की बीमारी: घुटनों में पानी की समस्या
राजकुमार अहिरवार के परिवार का मुख्य व्यवसाय खेती है। परिवार में माता-पिता, जेठ-जेठानी, एक ननद, और उमा शामिल हैं। राजकुमार को घुटनों में पानी भरने की गंभीर बीमारी थी, जिसका इलाज राजस्थान के कोटा में एक निजी अस्पताल में चल रहा था। उमा ने बताया, "हर तीन महीने में उनके घुटनों से पानी निकलवाना पड़ता था। इस बीमारी की वजह से वे ठीक से चल-फिर नहीं पाते थे और कोई काम भी नहीं कर पाते थे।"
इलाज का खर्चा परिवार के लिए एक बड़ा बोझ था, और उमा के अनुसार, ससुर इस खर्चे को लेकर अक्सर ताने मारते थे। "ससुर कहते थे कि बीमारी का इलाज क्यों करवाना, पैसे बर्बाद हो रहे हैं," उमा ने बताया। यह आर्थिक तंगी और ससुर का असहयोग राजकुमार के लिए मानसिक तनाव का बड़ा कारण बना।
शादी का छोटा सफर: 11 महीने का दुख
राजकुमार अहिरवार और उमा बाई की शादी 11 महीने पहले, जुलाई 2024 में हुई थी। राजकुमार विदिशा के चांदबर गांव के रहने वाले थे, जबकि उमा अशोकनगर जिले के बडका गांव की रहने वाली हैं। शादी के शुरुआती दिन ठीक थे, लेकिन जल्द ही दहेज की मांग और ससुर का उत्पीड़न शुरू हो गया। उमा ने बताया, "शादी के बाद कुछ दिन सब ठीक था, लेकिन फिर ससुर ने दहेज के लिए ताने मारना शुरू कर दिया। मेरे मायके से जो कुछ लाए थे, उसे कम बताते थे।"
राजकुमार की बीमारी और परिवार की आर्थिक स्थिति ने इस तनाव को और बढ़ा दिया। उमा ने कहा, "मेरे पति बहुत दुखी रहते थे। वे अपनी बीमारी और ससुर के तानों से तंग आ चुके थे।" यह तनाव आखिरकार उस दुखद रात में जहर खाने की वजह बना।
पुलिस जांच: दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला
उनारसी कलां थाना प्रभारी सुरेश शर्मा ने बताया कि उमा के बयान के आधार पर ससुर के खिलाफ दहेज उत्पीड़न (आईपीसी धारा 498ए) और आत्महत्या के लिए उकसाने (आईपीसी धारा 306) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने ससुर से पूछताछ शुरू कर दी है, और अन्य परिजनों के बयान भी लिए जा रहे हैं।
थाना प्रभारी ने कहा, "हम इस मामले की गहन जांच कर रहे हैं। उमा का बयान दर्ज किया गया है, और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार है। ससुर के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।" X पर @MPPoliceOfficial ने लिखा, "विदिशा में दंपती द्वारा जहर खाने की घटना की जांच शुरू। दहेज उत्पीड़न के आरोपों की गंभीरता से जांच की जा रही है।"
दहेज और आर्थिक तंगी: सामाजिक जड़ें
यह घटना दहेज प्रथा और ग्रामीण भारत में आर्थिक तंगी की गहरी समस्या को उजागर करती है। दहेज उत्पीड़न के मामले मध्य प्रदेश में लगातार सामने आ रहे हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के 2023 के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में हर साल औसतन 800 से अधिक दहेज उत्पीड़न के मामले दर्ज होते हैं, जिनमें कई आत्महत्या या हत्या तक पहुंच जाते हैं।
इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और निजी अस्पतालों की महंगी सेवाएं भी इस त्रासदी का एक कारण बनीं। राजकुमार का इलाज कोटा के निजी अस्पताल में चल रहा था, जो परिवार के लिए आर्थिक बोझ था। विदिशा के एक डॉक्टर ने बताया, "घुटनों में पानी भरने की बीमारी (सिनोवियल फ्लूइड बिल्डअप) का इलाज समय पर और सही तरीके से हो तो मरीज सामान्य जीवन जी सकता है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अक्सर पैसे की कमी के कारण इलाज नहीं करा पाते।"
परिवार का दर्द: एक मां की चीख
राजकुमार की मां ने रोते हुए कहा, "मेरा बेटा बहुत बीमार था। हम उसका इलाज करा रहे थे, लेकिन पैसे की तंगी थी। ससुराल वाले उमा को ताने मारते थे, लेकिन हमने कभी दहेज की मांग नहीं की।" उमा के मायके वालों ने भी इस घटना पर गहरा दुख जताया। उमा के भाई रामलाल ने कहा, "हमने अपनी बेटी को खुशी-खुशी ब्याहा था। हमें नहीं पता था कि वहां उसका इतना उत्पीड़न हो रहा है।"
चुनौतियां और समाधान
- दहेज प्रथा का उन्मूलन: समाज और सरकार को मिलकर दहेज के खिलाफ सख्त कदम उठाने होंगे। जागरूकता अभियान और कठोर कानूनी कार्रवाई जरूरी है।
- ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाएं: ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की जरूरत है, ताकि कोई राजकुमार इलाज के अभाव में दम न तोड़े।
- पारिवारिक हिंसा की रोकथाम: परिवारों में हिंसा और उत्पीड़न को रोकने के लिए काउंसलिंग और कानूनी सहायता की व्यवस्था होनी चाहिए।












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