विदिशा से शिवराज को टक्कर देने के लिए कांग्रेस ने तय किया नाम, मुरैना लोकसभा सीट से भी प्रत्याशी फाइनल
MP Lok Sabha election 2024: मध्य प्रदेश में कांग्रेस उम्मीदवारों की सूची को लेकर चर्चाओं का बाजार घर में इस बीच बड़ी खबर निकल कर आई है कि कांग्रेस पार्टी में मुरैना और विदिशा से दो बड़े नेताओं के नाम तय कर लिए है।
मध्य प्रदेश में लोकसभा चुनाव की 18 सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवारों की घोषणा पिछले 7 दिनों से हर रोज टलती जा रही है। 7 दिनों से लगातार चल रही घोषणाओं में बार-बार पेंच फंस रहे है, इसके चलते अब तक उम्मीदवारों की घोषणा नहीं हो पाई है।

दरअसल, कांग्रेस पार्टी के केंद्रीय नेता अब तक उम्मीदवार के चयन को लेकर संतुष्ट नहीं हो पाए है। आप शनिवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दावा किया है कि आज पार्टी उम्मीदवारों का ऐलान कर देगी। इधर विदिशा से पूर्व सांसद प्रताप भानु शर्मा और मुरैना से पंकज उपाध्याय को प्रत्याशी बनाए जाना लगभग तय हो चुका है।
पिछले शनिवार यानी 16 मार्च को मध्य प्रदेश के 18 सीटों पर प्रत्याशी चयन को लेकर दिल्ली में केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक होना थी लेकिन इस बैठक से एक दिन पहले यह तय कर दिया गया कि सोमवार को यानी 18 मार्च को उम्मीदवारों के नाम चयन को लेकर केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक होगी। सोमवार को यह बैठक भी हुई लेकिन मध्य प्रदेश से किसी भी सीट पर मजबूत नाम नहीं होने के चलते केंद्रीय चुनाव समिति के नेताओं ने चर्चा बाद में करने का तय किया। इसके बाद तय हुआ कि गुरुवार को केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक होगी और गुरुवार को बैठक भी हो गई, लेकिन अब तक मध्य प्रदेश की सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा नहीं हो सकी। इसी बात को लेकर पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पर तंज भी कसा है।
गुरुवार को तय हो गए थे यह नाम
राजगढ़ से दिग्विजय सिंह, गुना से अरुण यादव, झाबुआ से कांतिलाल भूरिया, भोपाल से अरुण श्रीवास्तव, इंदौर से कांति बम, उज्जैन से महेश परमार, मंदसौर से दिलीप सिंह गुर्जर, सागर से चंद्रभूषण सिंह, होशंगाबाद से संजय शर्मा, रीवा से नीलम मिश्रा, शहडोल से फंदेलाल मार्को, जबलपुर से दिनेश यादव, खंडवा से नरेंद्र पटेल के नाम से हो गए थे।
दिग्गज नेताओं के कारण फंसा पेंच
सूत्रों की मानी जाए तो मध्य प्रदेश में दिग्गज नेताओं के कारण लगातार पेंच फंसता चला गया। प्रदेश के दिग्गज नेता चुनाव लड़ने से इनकार कर रहे थे। वह चुनाव लड़ने की जगह चुनाव लड़वाने पर फोकस कर रहे थे। दिग्गज नेता किसी को जिताने की गारंटी लेना चाहते थे ऐसे में केंद्रीय नेतृत्व में दिग्गज नेताओं को ही चुनाव में उतारने का दबाव बनाया, यह दबाव दिग्विजय सिंह और अरुण यादव पर तो चला, लेकिन कमलनाथ, जीतू पटवारी, मीनाक्षी नटराजन पर नहीं चला। इनके अलावा भोपाल विदिशा, मुरैना, जबलपुर, इंदौर, खंडवा, मंदसौर में पार्टी को दमदार नेता चुनाव लड़ने के लिए नहीं मिल रहे थे। इन सब के चलते पार्टी और अधिक समय चाह रही थी। शायद उसका कोई दांव काम आ जाए और कोई मजबूत चेहरा उसे चुनाव लड़ने के लिए मिल जाए, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। अब पार्टी एक दर्जन सीटों पर उम्मीदवार का ऐलान करने की तैयारी कर चुकी है












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