Varanasi News: किसानों के बीमा पंजीकरण में लापरवाही पर DM नाराज, बैंकों को तय समयसीमा में काम करने का निर्देश
Varanasi News: वाराणसी के किसानों को राहत देने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले डीएपी और अन्य उर्वरकों की किल्लत को लेकर अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई है। साथ ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में लापरवाही को लेकर बैंक शाखाओं को भी फटकार लगाई गई है।
जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार की अध्यक्षता में हुई वर्चुअल बैठक में जिले के उर्वरक वितरण और बीमा कार्यों की गहन समीक्षा की गई। बैठक के दौरान 20 सहकारी समितियों में डीएपी उर्वरक की अनुपलब्धता पर नाराजगी जताई गई और तत्काल सभी समितियों में स्टॉक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।

डीएम ने यह भी कहा कि सभी समितियों तक उर्वरक की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित होनी चाहिए। इसके लिए रैक प्वाइंट से उठान में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सहकारी बैंक और समितियों के बीच बेहतर तालमेल से किसानों को समय पर खाद मिले, यह प्रशासन की प्राथमिकता है।
बैठक में सहायक आयुक्त सहकारिता और जिला कृषि अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि किसी भी समिति पर खाद की कमी न हो। इसके लिए "प्रीपोजिशनिंग स्टॉक" को तत्काल सक्रिय करने का आदेश दिया गया।
साथ ही, यह तय किया गया कि समितियों से चेक लेकर सहकारी बैंक को समय से भेजा जाए, ताकि पीसीएफ को राशि तत्काल उपलब्ध कराकर खाद की आपूर्ति जारी रखी जा सके। जमाखोरी और कालाबाजारी पर भी नजर रखने के लिए अलग से निगरानी सेल गठित करने की बात कही गई।
फसल बीमा में लापरवाही पर फटकार
बैठक में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की समीक्षा के दौरान चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। जिले में 52,937 पात्र केसीसी धारक किसानों में से सिर्फ 2,777 का ही बीमा हुआ है।
इस पर डीएम ने नाराजगी जताई और सभी बैंकों को 15 जुलाई तक किसानों का विवरण किसान ऋण पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश दिया। 31 जुलाई तक बीमा की प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य तय किया गया है।
प्राकृतिक आपदा में मिले पूरी क्षतिपूर्ति
डीएम ने कहा कि बीमा का उद्देश्य सिर्फ औपचारिकता नहीं है, बल्कि आपदा की स्थिति में किसानों को संबल देना है। इसलिए हर पात्र किसान का बीमा तय समयसीमा में हो।
उन्होंने अपील की कि ऋणी किसान अपनी संबंधित बैंक शाखा से और गैर-ऋणी किसान जन सेवा केंद्र के माध्यम से जल्द से जल्द फसल बीमा कराएं, ताकि किसी भी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में नुकसान की भरपाई की जा सके।
बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों को समन्वय से कार्य करने को कहा। उन्होंने दो टूक कहा कि कहीं भी उर्वरक की कमी या बीमा में लापरवाही पाई गई तो जिम्मेदारी तय की जाएगी।












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