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UP Wedding Scheme: सामूहिक विवाह समारोह में खाने की मची लूट, बुजुर्ग, महिलाएं और जोड़े भूखे-प्यासे वापस लौटे

UP Wedding Scheme: उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के हरहुआ में गुरुवार का दिन खास रहा। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत एक साथ 197 जोड़ों ने सात फेरे लेकर वैवाहिक जीवन की शुरुआत की। लेकिन जहां यह आयोजन आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए खुशी लेकर आया, वहीं अव्यवस्थाओं ने लोगों को निराश भी किया।

काशी कृषक इंटर कॉलेज मैदान में आयोजित यह भव्य कार्यक्रम सरकारी योजना की एक सकारात्मक झलक पेश कर रहा था। चिरईगांव, हरहुआ, चोलापुर, पिंडरा, बड़ागांव और अराजीलाइन विकास खंडों से आए जोड़ों ने सामूहिक रूप से विवाह किया। शुरुआत में माहौल पूरी तरह उत्सवमय रहा।

UP Wedding Scheme mass marriage

सरकारी मंच से मंत्री और जनप्रतिनिधियों ने योजना की सराहना की। राज्यमंत्री रविंद्र जायसवाल ने बताया कि प्रत्येक जोड़े को 51,000 रुपए की सरकारी सहायता दी जा रही है। इस योजना का मकसद है कि गरीब परिवारों की बेटियों की शादी में कोई अड़चन न आए।

विभिन्न विकास खंडों से आए इतने जोड़े

इस समारोह में जिले के छह विकास खंडों से जोड़े शामिल हुए। सबसे अधिक जोड़े चिरईगांव से थे, जिनकी संख्या 65 रही। इसके बाद हरहुआ से 54, चोलापुर से 52, पिंडरा से 16, बड़ागांव से 6 और अराजीलाइन से 4 जोड़े पहुंचे थे।

स्थानीय जनप्रतिनिधि, अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की। विधायक त्रिभुवन राम और एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा तथा ब्‍लाक प्रमुख विनोद उपाध्याय ने सामूहिक विवाह को समाजिक समरसता का प्रतीक बताया।

समारोह में अव्यवस्था बनी दुखद चर्चा का विषय

हालांकि, शादी की खुशियों में उस वक्त खलल पड़ा, जब भोजन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। जैसे ही खाना बांटने की प्रक्रिया शुरू हुई, लोग अनुशासन तोड़ते हुए स्टालों पर टूट पड़े। अफरा-तफरी का ऐसा आलम था कि लूट जैसी स्थिति बन गई।

भोजन वितरण में लापरवाही के चलते कई नवविवाहित जोड़े और उनके परिजन भूखे रह गए। कर्मचारियों ने खुद को असुरक्षित पाकर स्टाल छोड़ दिए। कहीं पत्तल नहीं थी, तो कहीं बर्तन गायब। कार्यक्रम में शामिल कई बुजुर्गों और महिलाओं को खाना नसीब नहीं हुआ।

ठेकेदार की लापरवाही पर उठे सवाल

स्थानीय अधिकारियों ने इस बदइंतज़ामी के लिए ठेकेदार को जिम्मेदार ठहराया। हरहुआ के वीडियो बद्री प्रसाद वर्मा ने मीडिया से बातचीत में बताया कि ठेकेदार की लापरवाही पर जांच कराई जा रही है। विभाग को पत्र भेजा गया है और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि सवाल यह भी उठ रहा है कि इतने बड़े कार्यक्रम में ऐसी अनदेखी कैसे हो गई? जिनके लिए यह दिन जीवनभर की याद बननी थी, उनके लिए यह अनुभव एक कटु स्मृति बनकर रह गया।

विपक्ष ने भी साधा निशाना, जांच की मांग

इस मुद्दे पर राजनीतिक सरगर्मी भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कार्यक्रम की अव्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि गरीबों के लिए आयोजित ऐसी योजनाएं बेहद जरूरी हैं, लेकिन अगर उनका संचालन बदइंतज़ामी में डूब जाए तो सरकार की मंशा पर सवाल उठना लाज़मी है। उन्होंने इस कार्यक्रम से जुड़े वीडियो और फोटो भी शेयर किए हैं।

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