UP Electricity: यूपी में बदलेगा बिजली का सिस्टम, वाराणसी में ऊर्जा मंत्री ने निजीकरण को बताया जरूरी कदम

UP Electricity Privatization: उत्तर प्रदेश में बिजली व्यवस्था को लेकर सरकार और कर्मचारियों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। प्रदेश सरकार ने साफ कर दिया है कि अब बिजली निजीकरण की प्रक्रिया नहीं रुकेगी। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने इस पर बड़ा बयान देते हुए स्पष्ट किया कि हड़ताल पर जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मंगलवार को वाराणसी के सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में ऊर्जा मंत्री ने कहा कि बिजली निजीकरण को लेकर सरकार ने अपना रुख तय कर लिया है। इस फैसले से न तो सरकार पीछे हटेगी और न ही किसी दबाव में आएगी। उन्होंने बताया कि राज्य में बिजली सेवा को बेहतर, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए यह कदम जरूरी है।

UP Electricity Privatization energy

मंत्री ने विरोध कर रहे बिजली कर्मचारियों को चेताते हुए कहा कि अगर कोई कार्य बहिष्कार करेगा या बिजली आपूर्ति में बाधा डालेगा, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि गर्मी के इस मौसम में बिजली की मांग अत्यधिक बढ़ जाती है, ऐसे में किसी भी तरह का व्यवधान जनता के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।

हर परिस्थिति से निपटने को सरकार तैयार

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्थाएं पहले से तैयार कर रखी हैं। अगर बिजली आपूर्ति में बाधा आती है तो उसके लिए बैकअप सिस्टम और अन्य समाधान मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि प्रशासनिक स्तर पर पूरी तैयारी है कि जनता को किसी भी हाल में बिजली संकट न झेलना पड़े।

एके शर्मा ने दोहराया कि निजीकरण का उद्देश्य बिजली सेवा में सुधार लाना है, न कि किसी के रोजगार को नुकसान पहुंचाना। लेकिन अगर कर्मचारी सेवा बाधित करने पर उतरते हैं तो सख्ती ज़रूरी हो जाती है।

कर्मचारियों की भावनाओं का सम्मान

मंत्री ने कहा कि सरकार कर्मचारियों की भावनाओं का सम्मान करती है। अगर किसी को कोई आपत्ति है तो उसके समाधान के लिए बातचीत का रास्ता खुला है। लेकिन, किसी भी स्थिति में काम में लापरवाही या हड़ताल को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि बिजली अब हर घर की मूलभूत आवश्यकता बन चुकी है। बीमार बुजुर्ग, छोटे बच्चे और महिलाएं घरों में बिजली पर निर्भर हैं। ऐसे में कर्मचारियों को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए और जनता की सेवा को प्राथमिकता देनी चाहिए।

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि संगठन अगर चाहे तो प्रशासन के साथ मिलकर बातचीत कर सकता है, लेकिन जनता को तकलीफ में डालना स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि कर्मचारी जिम्मेदार व्यवहार करें और अपने कर्तव्य का पालन करें।

सरकार का मानना है कि बातचीत से हर मुद्दा सुलझाया जा सकता है। लेकिन सेवा में जानबूझकर बाधा डालना अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस दिशा में प्रशासन ने भी स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं।

बिजली मंत्री एके शर्मा ने कहा कि प्रदेश में बिजली निजीकरण से सेवा में सुधार होगा, जवाबदेही बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी। उन्होंने बताया कि सरकार का मकसद आम जनता को बेहतर बिजली सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि कोई भी उपभोक्ता परेशान न हो।

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