Teachers Day : दिल्ली के सरकारी स्कूलों को टक्कर देता है यूपी का यह स्कूल, सरिता राय की जिद ने ऐसे बदली तस्वीर
वाराणसी, 04 सितंबर: दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार लगातार अपने सरकारी स्कूलों की बढ़ाई करते नजर आई है। उनका दावा है कि फर्स्ट क्लास सुविधाओं से लैस दिल्ली के सरकारी स्कूल जैसे स्कूल कहीं नहीं है। ऐसे में केजरीवाल सरकार के तमाम दावों को प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी का एक प्राथमिक स्कूल टक्कर देता नजर आ रहा है। यहां की प्रिंसिपल सरिता राय की जिद ने स्कूल की तस्वीर बदल दी है। 5 सितंबर को टीचर्स डे के मौके पर योगी सरकार सरिता राय को राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित करेगी। आइए जानते हैं प्रिंसिपल सरिता के अब तक के सफर के बारे में।

पूरे प्रदेश से 75 टीचरों को इस सम्मान के लिए चुना गया
वाराणसी में मंडुआडीह स्थित प्राथमिक स्कूल की प्रिंसिपल सरिता राय को राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। पूरे प्रदेश से 75 टीचरों को इस सम्मान के लिए चुना गया है। इसमें हर जिले से एक टीचर और वाराणसी से सरिता राय को सेलेक्ट किया गया है। सरिता राय को इस स्कूल के प्रिंसिपल का चार्ज 2018 में मिला था। तब यह स्कूल सभी 19 पैरामीटर्स पर फिसड्डी था। यहां पर न ढंग का क्लासरूम था और न ही शौचालय। पानी, बिजली, फर्नीचर जैसी चीजें भी लचर हालात में थी। स्कूल के नाम पर पांच कमरों का पुराना भवन था। महज एक साल में इस स्कूल की तस्वीर बदल गई।

स्मार्ट क्लासरूम, 24 घंटे बिजली, प्रोजेक्टर रूम
इस प्राइमरी स्कूल में अब स्मार्ट क्लासरूम, 24 घंटे बिजली, मिनरल वाटर, प्रोजेक्टर रूम, ऑफिस और फर्नीचर के साथ-साथ सीसीटीवी कैमरा भी है। प्रिंसिपल सरिता राय ने बताया कि यह सारा काम उन्होंने आसपास के लोगों से मदद मांग कर की। फर्नीचर और प्रोजेक्टर की व्यवस्था उनके ही बच्चों ने कर दी। बाकी चीजों के लिए हम सरकारी फंड का इंजतार नहीं कर सकते थे, इसलिए कम्युनिटी लेवल पर उतरे, लोगों से मिलना-जुलना हुआ और मदद मांग-मांगकर स्कूल में सारी मॉडर्न व्यवस्था की। आज हमारा स्कूल सभी 19 पैरामीटर पर वाराणसी का सबसे बेहतर सरकारी विद्यालय बन गया है। कायाकल्प के मामले में वाराणसी का यह स्कूल नंबर 1 पर चल रहा। 19 पैरामीटर में क्लासरूम, शौचालय बालक-बालिका अलग-अलग, रनिंग वाटर, टाइल्स, फर्नीचर और प्रोजेक्टर है।''

2018 में 164 बच्चे, आज इस स्कूल में पढ़ने आते हैं 265
सरिता राय ने बताया कि 2018 में स्कूल की जिम्मेदारी मिली तो यहां पर 164 बच्चे पढ़ते थे, लेकिन आज यह संख्या बढ़ कर 265 हो गई है। उन्होंने बताया कि स्कूल में इतनी जगह नहीं है कि सभी बच्चों को एक साथ पढ़ाया जा सके। स्कूल, पार्क और ऑफिस में भी बच्चों को बैठाकर पढ़ाते हैं। हमें इन बच्चों को पढ़ाने के लिए जगह की खासा कमी पड़ रही है। कोविड के दौरान सरिता राय ने मोहल्ला क्लास चलाया था। वह खुद बच्चों के घर जाती थीं और उन्हें पढ़ाती थीं।

सरिता राय का अब तक का सफर
सरिता राय की पहली नियुक्ति 1 दिसंबर 1999 को प्राथमिक विद्यालय मंडुआडीह में सहायक अध्यापक पद पर हुई थी। 31 दिसंबर 2009 को पूर्व माध्यमिक विद्यालय, केराकतपुर में सहायक अध्यापक पद पर कार्यभार मिला। इंग्लिश मीडियम होने से 1 अप्रैल 2018 को सरिता को प्राथमिक विद्यालय मंडुआडीह में प्रिंसिपल के तौर पर जिम्मेदारी सौंपी गई।

सरिता राय को मिल चुके हैं ये सम्मान
सरिता राय को 2019 में उत्कृष्ट प्रधानाध्यापक पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। तीन बार ब्लॉक स्तरीय उत्कृष्ट शिक्षक पुरस्कार। टीएलएम और क्राफ्ट शैक्षिक मेला में डाइट प्राचार्य द्वारा सम्मानित किया गया। मिशन शक्ति 2021 में डीएम और बीएसए द्वारा सम्मानित किया गया। आयुष्मान भारत फाउंडेशन द्वारा काशी विभूषण सम्मान मिला। इसके अलावा 2019 में नव निर्माण सेवा ट्रस्ट द्वारा आदिशक्ति सम्मान से नवाजा गया। जनगणना 2021 में गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा कांस्य पदक भी मिला।












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