Rural Development: शिक्षा, नवाचार और स्टार्टअप से गाँवों में कैसे बदलेगी तस्वीर? खास बातें जानें खबर के अंदर

Rural Development: वाराणसी उदय प्रताप महाविद्यालय में शनिवार को हुई एकदिवसीय संगोष्ठी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की असली ताकत उसके गाँवों और कृषि परंपरा में छिपी है। शिक्षा, नवाचार और स्थानीय पहल से ही आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार हो सकता है।

'समृद्ध भारत की परिकल्पना में उन्नत भारत अभियान की भूमिका' विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में छात्र, किसान और विशेषज्ञ बड़ी संख्या में शामिल हुए। विचार-विमर्श के दौरान वक्ताओं ने ग्रामीण विकास, उद्यमिता और महिला सशक्तिकरण को भारत की आर्थिक प्रगति की रीढ़ बताया।

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मुख्य अतिथि प्रदेश सरकार के स्टांप एवं पंजीयन मंत्री रविन्द्र जायसवाल ने कहा कि भारत जल्द ही विश्व अर्थव्यवस्था में तीसरे स्थान पर होगा। उन्होंने युवाओं को स्वरोजगार और स्टार्टअप की ओर बढ़ने का आह्वान किया और 'लोकल फॉर वोकल' पर बल दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य डॉ. धर्मेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि संस्थान की टीम ने गांवों में जल संरक्षण, स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन पर जागरूकता फैलाई है। अब ग्रामीण समुदाय स्वयं समस्याओं का समाधान कर रहा है और छात्रों की पहल से स्वरोजगार भी बढ़ा है।

एसडीएम सदर नितिन सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा और विकास एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। ज्ञान का संवर्धन ही समाज को आगे बढ़ा सकता है और यही अभियान ग्रामीण भारत को नई ऊर्जा देने का माध्यम बन रहा है।

टिकाऊ खेती और उद्यमिता पर चर्चा

तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने जैविक खेती, खाद्यान्न भंडारण और स्वच्छता पर प्रकाश डाला। उनका कहना था कि रसायनों के अत्यधिक उपयोग से स्वास्थ्य संबंधी खतरे बढ़ते हैं जबकि ऑर्गेनिक खेती से टिकाऊ उत्पादन और बेहतर आय दोनों संभव हैं।

डॉ. शारदा सिंह ने जूट उत्पादों को महिला सशक्तिकरण का साधन बताया। वहीं, उद्यमी प्रवीन श्रीवास्तव ने कहा कि ऑर्गेनिक फार्मिंग भविष्य का भरोसेमंद विकल्प है जिससे किसानों को लाभ और समाज को स्वास्थ्य दोनों मिलते हैं।

ग्रामीण युवाओं के लिए नए अवसर

कार्यक्रम में वक्ताओं ने मोती की खेती, मशरूम उत्पादन और मधुमक्खी पालन जैसे उद्यमों को ग्रामीण युवाओं के लिए उपयोगी विकल्प बताया। विशेषज्ञों ने कहा कि ये व्यवसाय कम लागत वाले हैं और बाज़ार में इनकी अच्छी मांग है।

डॉ. निखिलेश सिंह ने कार्बन न्यूट्रल बनने की आवश्यकता पर जोर देते हुए टिकाऊ कृषि पद्धतियों, नवीकरणीय ऊर्जा और वृक्षारोपण को अपनाने का सुझाव दिया। उनका मानना था कि यह बदलाव पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए ज़रूरी है।

छात्रों और किसानों की सक्रियता

संगोष्ठी में 100 से अधिक छात्रों ने अपने प्रोजेक्ट्स प्रस्तुत किए। इनमें ग्रामीण विकास, महिला उद्यमिता, पर्यावरण संरक्षण और स्टार्टअप जैसे विषय शामिल रहे। छात्रों की ऊर्जा और नवाचार ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया।

करीब 50 किसान और महिला उद्यमी भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। उनके अनुभव और सुझावों ने चर्चा को और समृद्ध किया। आयोजन का समन्वय आईआईटी बीएचयू और उन्नत भारत अभियान की टीम ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रो. तुमुल सिंह ने प्रस्तुत किया।

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