इस तरह डॉक्टर्स देते हैं लोगों को दूसरी जिंदगी; महिला का सफल ऑपरेशन, दिया एक साथ तीन बच्चियों को जन्म
धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टरों की मेहनत के लिये हर वर्ष एक जुलाई को नेशनल डॉक्टर डे मनाया जाता है। एक जुलाई को न सिर्फ हम उनके हौसले को याद करते है बल्कि उनकी सराहना भी करते है, क्योंकि इन्होने कई लोगों को पुनः जन्म दिया है। हमारे बीच कई ऐसे डॉक्टर है जो समाज के लिये मिसाल है। उन्होंने न सिर्फ अच्छा काम किया है बल्कि उनकी वजह से कई लोग प्रेरित हुए है। वाराणसी की रहने वाली डॉक्टर निमिशा सिंह व मिर्जापुर के रहने वाले डॉक्टर रिंकू कुशवाहा की वो कहानी जो आम जनता के बीच मिसाल है।
गर्भ में थे तीन बच्चे, ऑपरेशन करके बचाई जान
वाराणसी की रहने वाली डॉक्टर निमिशा सिंह ने मणि सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल बीएल डब्ल्यू में इसी 25 जून को एक महिला के गर्भ में पल रहे तीन बच्चों को सफल ऑपरेशन करके नई जिदंगी दी। बच्चों की मां सरिता ने कहा कि तीनों बच्चियों को डॉक्टर ने नई जिंदगी दी है। उन्हें मै पढ़ा लिखाकर डॉक्टर या फिर आईएएस बनाउंगी। वाराणसी की रहने वाली बाल रोग विशेषज्ञ निमिशा सिंह ने कहा डॉक्टर बनने के बाद समाज, मरीज और परिवार के बीच सामंजस्य बना पाना मुश्किल है। मां होने के साथ में उस दर्द को महसूस करती हूं।

डॉक्टर निमिशा ने बताया कि सरिता जो कि वाराणसी की रहने वाली है। ऐसे में इनके पेट में तीन बच्चे थे। तीन बच्चों के होने की स्थिति में इनका समय से पहले ऑपरेशन करना जरूरी था। सफल ऑपरेशन के बाद अब माँ और बच्चों की जान बच गई है। जच्चा और तीनों बच्चियां स्वस्थ है।

खुद हुआ कोरोना, परिवार से रही दूर
डॉक्टर निमिशा सिंह ने कोरोना के भयावह काल का किस्सा बताते हुए कहा कि जिस समय परिवार के लोग साथ नही दे रहे थे। उस वक्त हम मरीजों का उपचार कर रहे थे। मरीजों का उपचार करते समय हमें खुद कोरोना हुआ। जहां हम अपने बच्चों से दूर रहे। उसके बाद भी हमने इलाज करना नही छोड़ा। मेरी मां ने कहा कि बेटा जाने दो न जाओ, लेकिन हमने जिम्मेदारी समझी और इलाज किया। कई बार ऐसे वक्त आते है, लेकिन हम दृढ़ता के साथ काम करके उसे मात देते है।

गांव में कैम्प के साथ बेहतरीन डॉक्टर है रिंकू कुशवाहा
मिर्जापुर जिले की रहने वाले डॉक्टर रिंकू कुशवाहा जो न सिर्फ इलाज करती है बल्कि गांव में कैम्प के माध्यम से निःशुल्क इलाज मुहैया कराती है। डॉक्टर रिंकू कुशवाहा स्त्री व प्रसूति रोग विशेषज्ञ है। कुछ दिनों पहले बिरोही की रहने वाली एक महिला मरीज जिसके गर्भ में बच्चे के साथ गांठ हो गया था। गंभीर बीमारी के तत्काल इलाज की जरूरत थी। कई जगहों से उम्मीद हारकर पहुंचे मरीज की डॉक्टर ने ऑपरेशन करके जान बचाई। मिर्जापुर जैसे पिछड़े जिले में उम्मीदों की नई सूरज बनी है।

विवेक तिवारी ने कहा "वर्षों से जिले में रह रहे है, लेकिन पहली बार ऐसा डॉक्टर देखा है जिनके के लिए मरीज की जान को बचाना प्राथमिकता रहता है। ऐसी प्रतिभा से धनी डॉक्टर मिर्जापुर को नही मिलने वाला है।"

कुछ नया नही बल्कि कुछ अलग करने की है चाहत
स्त्री व प्रसूति रोग विशेषज्ञ रिंकू कुशवाहा ने बताया कि कोरोना काल जीवन के भयावह दौर में से एक था। ऐसे समय में भी हमने न सिर्फ काम किया, बल्कि मरीजों को सस्ता इलाज उपलब्ध कराया। हम गांव में कैम्प भी लगाते है। डॉक्टर ने कहा कि हमारे यहां आने वाले मरीज ही हमारा भरोसा है। हम भी मध्यमवर्गीय परिवार से आते थे। परिस्थितियों को हमने महसूस किया है। हमारे पास जो भी मरीज आते है उनकी उम्मीद रहती है। उनको उम्मीद नही टूटे इसके लिए हम लोग मेहनत करते है।












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