पति और बेटे के होते हुए बहू-बेटियों ने दिया बुजुर्ग महिला की अर्थी को कंधा, तेरहवीं पर होगा वृक्षारोपण
वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में परंपरा तोड़ते हुए बहू-बेटियों ने बुजुर्ग महिला की अर्थी को कंधा दिया, बल्कि श्मशान घाट पर जाकर मुखाग्नि भी दी। दरअसल, चिरईगांव-बरियासनपुर गांव निवासी 80 साल की रज्जी देवी का निधन हो गया था। रज्जी देवी के निधन के बाद उनकी अर्थी को बहू और बेटियों ने कंधा दिया। इसके साथ ही उन्होंने फिजूलखर्ची से बचने के लिए तेरहवीं का कार्यक्रम नहीं करने का ऐलान किया है। साथ ही कहा कि शोकसभा कर उनकी याद में वृक्षारोपण किया जायेगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चिरईगांव-बरियासनपुर गांव में हरिचरन पटेल की 80 वर्षीय पत्नी रज्जी देवी का बुधवार को चार बजे निधन हो गया। इसकी सूचना सभी नातेदारों-रिश्तेदारों को दी गयी। कुछ देर में ही घर पर लोगों का जमावड़ा हो गया। शवयात्रा की तैयारी पूरी हुई तो रज्जी देवी की बेटियों हीरामनी और प्रेमा ने अर्थी को कंधा और मुखाग्नि खुद देने की ख्वाहिश जाहिर की। बेटियों की ख्वाहिश को ग्राम प्रधान संघ के पूर्व अध्यक्ष बालकिशुन पटेल एवं बरियासनपुर के ग्राम प्रधान देवराज पटेल ने भी समर्थन किया। बेटियों का समर्थन पिता हरिचरन पटेल और भाई भागीरथी पटेल ने भी किया। धीरे-धीरे सभी लोग तैयार हो गए।
22 जुलाई 2018 को संतोरा देवी की मौत पर भी उनकी अर्थी को महिलाओं ने कंधा देकर नयी परिपाटी की शुरुआत की थी। स्व अयोध्या प्रसाद पटेल की प्रेरणा से प्रेरित होकर हरिचरण पटेल की पत्नी रज्जी देवी की अर्थी को उनकी बहू लल्ली देवी, रेखा,सुनीता, बेटी प्रेमा, हीरामनी, अमरावती आदि ने कंधा देकर परिपाटी को बरकरार रखा। मुखाग्नि उनकी बड़ी बेटी प्रेमा देवी ने दी। वहीं, रज्जी देवी के एक मात्र पुत्र भागीरथी प्रसाद ने बताया कि फिजूलखर्ची से बचने के लिए दसगात्र एवं तेरहवीं का कार्यक्रम नहीं होगा। बल्कि तेरहवीं पर शोकसभा कर उनकी याद में वृक्षारोपण किया जायेगा।












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