अधिकारियों ने कहा 'जंगल की भूमि', किसानों ने बताया अपनी, वाराणसी में बुलडोजर से रौंदी गई फसलें, जानें मामला

Crops crushed by bulldozers in Varanasi: वाराणसी के पिंडरा इलाके में बीते दिनों प्रशासन और पुलिस बल की मौजूदगी में 72 बीघा जमीन को वन भूमि बताकर अतिक्रमण से मुक्त कराने का अभियान शुरू किया गया। इस दौरान बारह ट्रैक्टर और दो जेसीबी लगाई गईं।

किसानों द्वारा कहा गया कि यह उनकी अपनी भूमि है। ऐसे में उसे भूमि को वह नहीं छोड़ना चाहते हैं। हालांकि भारी संख्या में मौजूद पुलिस बल के सामने ग्रामीण कुछ नहीं कर पाए और प्रशासन द्वारा कब्जा मुक्त की कार्रवाई की गई।

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इस दौरान किसान नेता संतोष पटेल और उसकी बहन तथा एक अन्य महिला को हिरासत में लिया गया था। उसके बाद शांति भंग की आशंका में तीनों का चालान किया गया। मामले में ग्रामीणों का कहना है कि इस भूमि का मामला न्यायालय में विचाराधीन है, बावजूद इसके प्रशासन द्वारा ऐसा किया गया।

कार्रवाई किए जाने के बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और सरदार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ आरके पटेल समेत कई अन्य नेता भी किसानों से मुलाकात कर रहे हैं। उनका कहना है कि किसानों के साथ अन्याय हुआ है। इस मामले में यदि उन्हें न्याय नहीं मिलता है तो धरना प्रदर्शन किया जाएगा।

इस बारे में वन इंडिया हिंदी से बात करते हुए किसान नेता संतोष पटेल ने बताया कि जिस जमीन को जंगल की जमीन बताई जा रही है उस जमीन के बाबत रामनाथ बनाम सरकार के नाम से वाराणसी न्यायालय में मुकदमा चल रहा है। 5 अगस्त 2024 को सुनवाई होनी है।

मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के बावजूद भी अधिकारियों द्वारा इस तरह की कार्रवाई की गई। संतोष ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा 10 गांवों की भूमि को जबरन अधिग्रहित की जा रही थी। इसी का विरोध उनके समेत इलाके के कई किसानों द्वारा किया जा रहा था।

संतोष पटेल बताते हैं कि विरोध के दौरान कई बार पुलिस प्रशासन द्वारा उनके ऊपर दबाव बनाया गया। संतोष ने यह भी कहा कि हमारे साथ ही 10 गांवों के किसान किसी भी कीमत पर अपनी जमीन देने के लिए तैयार नहीं थे, इसे लेकर हम लोगों ने धरना प्रदर्शन भी किया था।

चुनाव से पहले पिंडरा तहसील पर धरना प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने संतोष पटेल को गिरफ्तार भी किया था। संतोष पटेल को गिरफ्तार किए जाने के बाद मामला अतुल पड़ा और किसानों द्वारा संतोष पटेल का साथ दिया जाने लगा और किसानों ने सरकार का जमकर विरोध किया।

कहा जाता है कि इसका असर मछलीशहर लोकसभा के साथ ही चंदौली और वाराणसी लोकसभा पर भी पड़ा। संतोष पटेल के साथ ही अन्य किसानों द्वारा आरोप लगाया गया कि क्षेत्रीय विधायक की शह पर यह सब किया जा रहा है। पहले काशी आशीर्वाद योजना को निरस्त करने की बात विधायक द्वारा कही गई।

योजना को निरस्त करने की बात कहने के बाद जंगल की भूमि बढ़कर उन किसानों को प्रताड़ित किया जा रहा है जो किसान काशी द्वारा योजना का खुलकर विरोध कर रहे थे। किसानों का कहना है कि इस मामले को लेकर उनकी लड़ाई जारी रहेगी।

कुल मिलाकर सरकार को लेकर किसानों में खासी नाराजगी देखने को मिल रही है। वहीं इस मामले को लेकर पिंडरा के पूर्व विधायक और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय किसानों के साथ हैं। अजय राय ने जहां किसानों से मुलाकात की।

वहीं शुक्रवार को जिला अध्यक्ष राजेश्वर पटेल के साथ ही कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल सिटी मजिस्ट्रेट को पत्रक देकर इस मामले में जांच और आवश्यक कार्रवाई की मां की। अब इस मामले में राजनीतिक हलचल भी तेज होती जा रही है।

वहीं इस बारे में तहसील पिंडरा के अधिकारियों और तहसीलदार विकास पांडेय का कहना है कि केवल खाली जमीन को ही कब्जा किया गया है। यह भी बताया गया कि कुछ लोगों द्वारा झोपड़ी लगा दी गई थी और टीनशेड भी लगा लिया गया था। किसानों ने खुद ही उसे हटा लिया।

किसानों ने दिखाया वीडियो
हालांकि तहसीलदार द्वारा खाली जमीन को कब्जा किए जाने के बात को पर किसानों द्वारा वह वीडियो दिखाया गया जिसमें गन्ना और अन्य फसलों को जेसीबी और ट्रैक्टर लगाकर नष्ट किया जा रहा है। ऐसे में तहसीलदार का बयान गलत साबित हो रहा है।

गांव में जिन खेतों में जेसीबी और ट्रैक्टर चलाए गए हैं उन खेतों में अभी भी फसलों का अवशेष बिखरा पड़ा हुआ है। इसे देखने से भी पता चल रहा है कि भूमि पर खेत में फसलें लगी हुई थीं और उनको अब नष्ट कर दिया गया है। फिलहाल, किसानों का कहना है की राजनीति के चलते ऐसा हो रहा है।

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