Joshimath Sinking: क्या फिर से बस पाएगा जोशीमठ, जानिए एक्सपर्ट ने क्या कहा?

उत्तराखंड के चमौली जिले में स्थित जोशीमठ में हालात और भी बिगड़ते जा रहे हैं। 600 से अधिक घर और मकान खाली करवाए गए हैं। कई होटल गिराए गए हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जोशीमठ का दौरा किया और वहां के हालातों का जायजा भी लिया है। जोशीमठ में अपने घरों से बाहर स्थानांतरित किए गए लोगों के लिए 1.5 लाख रुपये की अंतरिम सहायता की घोषणा की गई है। इस बीच सोशल मीडिया पर ये सवाल उठ रहे हैं कि क्या जोशीमठ को फिर से बसाया जाएगा, क्या जोशीमठ फिर से रिपेयर हो पाएगा...? इन सभी सवालों का पर्यावरण विशेषज्ञ विमलेंदु झा ने अपने ट्विटर हैंडल पर जवाब दिया है। पर्यावरण विशेषज्ञ विमलेंदु झा ने कहा है कि एनटीपीसी के इंजीनियरों ने जिस तरीके से जोशीमठ में खुदाई की है, उससे मौजूदा स्थिति को देखते हुए मरम्मत की कोई गुंजाइश नहीं है और ना ही कोई कोई रिवर्स गियर हो सकता है।

बिजली परियोजनाओं को पर्यावरण विशेषज्ञ ने ठहराया दोषी
एनटीपीसी की बिजली परियोजनाओं को दोषी ठहराते हुए पर्यावरण विशेषज्ञ विमलेंदु झा ने दावा किया कि उनकी पनबिजली परियोजना के लिए खोदी गई सुरंग जोशीमठ के लिए आपदा बनकर आई है। जोशीमठ आपदा जलवाही स्तर के उल्लंघनों का परिणाम है।
विमलेंदु झा ने ट्वीट किया, ''गलत ना समझें, जोशीमठ को इंजीनियरों ने गिरा दिया। है। वह इतनी बड़ी आपदा बन गई है कि अब मरम्मत की कोई गुंजाइश नहीं है, कोई रिवर्स गियर नहीं है। इंजीनियर्स को भूविज्ञान और भूगोल की कम समझ थी।''

'हर मिट्टी खुदाई के लायक नहीं होती'
पर्यावरण विशेषज्ञ विमलेंदु झा ने कहा,सभी तरह की मिट्टी खुदाई के लायक नहीं होती है। हर मिट्टी सादी मिट्टी नहीं होती है और खुदाई, हिलने और विस्फोट करने के लिए उपयुक्त भी नहीं होती है। हिमालय उच्च भूकंपीय क्षेत्र में सबसे कम उम्र की पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है और इसके ऊपर चरम जलवायु घटनाओं का एक उदाहरण है। हमारे इंजीनियरिंग कॉलेजों में अब मिट्टी के प्रकार को पढ़ाने की जरूरत है,जलोढ़, लेटराइट, रेगिस्तान, काली कपास, पीट, और बहुत कुछ। हर मिट्टी समतल मिट्टी नहीं है, जिसे खोदा जाए।''

'हर प्राकृतिक आपदाएं प्राकृतिक नहीं होती'
फरवरी 2021 में हुई चमोली फ्लैश फ्लड का उदाहरण देते हुए, पर्यावरण विशेषज्ञ विमलेंदु झा ने कहा कि यह एक ही परियोजना स्थल पर ही हुआ था और हिमालयी पारिस्थितिक कैसे बिगड़ रही है, इसका स्पष्ट उदाहरण है। झा ने कहा अधिकारी, निजी कंपनी और ठेकेदारों अल्पकालिक लाभ को पाने के लिए जल्दी-जल्दी में हर काम करते हैं और उसके लिए पागल हो जाते हैं।

'जोशीमठ में दरारों में कोई संयोग नहीं'
पर्यावरण विशेषज्ञ विमलेंदु झा ने कहा, जोशीमठ के बाद, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग आदि में घरों में दरारें दिखाई दीं। यह कोई संयोग नहीं है, ये सभी या तो चार धाम सड़क परियोजना या किसी रेल सुरंग क्षेत्र या किसी पनबिजली परियोजना के करीब हैं।
JOSHIMATH FOLLOWUP THREAD:
Let’s not be mistaken - Joshimath has been brought down by ENGINEERS! ‘Brought down’ because there is no scope of repair, no reverse gear, ENGINEERS because they have a schewed understanding of geology & geography, in their education or practice.
— Vimlendu Jha विमलेंदु झा (@vimlendu) January 11, 2023












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