उत्तराखंड में राहुल गांधी की रैली से क्या कांग्रेस को मिलेगी विजय और लौटेगा सम्मान?

राहुल गांधी की रैली से उत्‍साहित हुए कांग्रेसी, कांग्रेस को उत्‍तराखंड में सत्‍ता वापसी की उम्‍मीदें

देहरादून, 16 दिसंबर। उत्तराखंड में सत्ता की वापसी के लिए बेकरार नजर आ रही कांग्रेस के लिए गुरूवार को राहुल गांधी की विजय सम्मान रैली संजीवनी साबित हो सकती है। कांग्रेस इस बार उत्तराखंड में सत्ता में वापसी के लिए हर समीकरण साधने में जुटी है। बीते कई दिनों से उत्तराखंड में कांग्रेस के 3 बड़े चेहरे गणेश गोदियाल, प्रीतम सिंह, हरीश रावत ही चुनावी मोर्चे पर डटे हुए नजर आ रहे थे, जबकि भाजपा की और से केन्द्रीय नेतृत्व जिसमें नरेंद्र मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह और जेपी नड्डा पहले ही मैदान में डटे हुए हैं। ऐसे में राहुल गांधी की विजय सम्मान रैली कांग्रेस को विजय और सम्मान दिला पाएगी। ये बड़ा सवाल अब उठने लगा है।

Will Congress get victory and return respect from Rahul Gandhis rally in Uttarakhand?

पीएम मोदी की रैली से ज्यादा जुटी भीड़
उत्तराखंड में अब दिसंबर माह में आचार संहिता लगने के कयास लगाए जा रहे हैं। इससे पहले भाजपा और कांग्रेस चुनावी मैदान में कूद चुके हैं। 4 दिसंबर को पीएम नरेंद्र मोदी ने ​देहरादून के परेड मैदान से ही विजय संकल्प महारैली के जरिए कांग्रेस को जमकर कोसा। इसका जबाव देने के लिए कांग्रेस ने राहुल गांधी की रैली आयोजित की। जिसके लिए 16 दिसंबर विजय दिवस चुना गया। राहुल गांधी ने विजय दिवस पर देहरादून के परेड मैदान से नरेंद्र मोदी पर जमकर हमला किया। अपने संबोधन के जरिए राहुल ने चुनावी पहलुओं को छुने के अलावा कांग्रेस के लिए चुनावी शंखनाद भी किया। राहुल के संबोधन में जहां एक तरफ भावानत्मक लगाव नजर आया तो वहीं जोश के साथ ललकार भी दिखी। राहुल की रैली के जरिए कांग्रेस ने भाजपा के लिए आने वाले दिनों में चुनौती भी खड़ी कर दी है।

कुमाँऊ, गढ़वाल और तराई हर जगह से पहुंचे कार्यकर्ता
भाजपा की विजय संकल्प महारैली में पार्टी की और से 1 लाख कार्यकर्ताओं को लाने का लक्ष्य रखा गया। कांग्रेस ने रैली से पहले संख्या का जिक्र तो नहीं किया लेकिन ये जरुर दावा किया था कि मोदी की रैली से ज्यादा भीड़ राहुल की रैली में नजर आई। ​दोपहर बाद जैसे ही मैदान में लोग जुटने लगे, उससे कांग्रेस में नया जोश नजर आने लगा। इतना ही नहीं कांग्रेस का उत्साह डबल ​दिखा। जिससे भाजपा की टेंशन बढ़ गई है। कांग्रेस की रैली में तराई से लेकर कुमाँऊ, गढ़वाल के कोने-कोने से कार्यकर्ता और समर्थक देहरादून के परेड मैदान में नजर आए। जो कि डबल इंजन की सरकार को फेल बताते हुए कांग्रेस सरकार आने का दावा कर रहे थे।

उम्मीदवारों ने दिखाया शक्ति प्रदर्शन
राहुल की रैली में भीड़ जुटाने के लिए कांग्रेस संगठन ने उम्मीदवारों से शक्ति प्रदर्शन करने के लिए अपने-अपने क्षेत्र से ज्यादा से ज्यादा लोगों को लाने का टारगेट दिया था, जो रणनीति कांग्रेस की पूरी तरह से पास होती हुई नजर आई। जो भी रैली में अपने समर्थकों के साथ दूर-दराज से आ रहे थे, वे पूरे गाजे बाजे के साथ रैली में शक्ति प्रदर्शन करते नजर आ रहे थे। हर कोई अपना-अपना टिकट पक्का करने के लिए राहुल की रैली में पहुंचे थे। जिससे दावेदारी मजबूत हो सके।

कांग्रेस में कब खत्म होगी गुटबाजी
कांग्रेस के सामने सबसे बड़ा चेलेंज गुटबाजी को खत्म करना है। 2017 में कांग्रेस 11 सीटों पर सिमट गई थी, अब बहुमत के लिए 36 सीटों का जादुई आंकड़ा पार करने के लिए कांग्रेस को एकजुट होना पड़ेगा। राहुल ने परेड मैदान से विजय होने का फॉर्मूला भी पार्टी के दिग्गजों के सामने रख दिया लेकिन राहुल के फॉर्मूले को कांग्रेसी सम्मान दिला पाते हैं या नहीं। ये भी बड़ा सवाल है। कांग्रेस चुनाव में जाने से पहले पूरा जोर लगा रही है। कांग्रेस में इस समय कई गुट हैं। पहला गुट हरीश रावत और गणेश गोदियाल का है।​ जिनकी टीम एक साथ नजर आ रही है, जबकि दूसरा खेमा प्रीतम सिंह अपने स्तर से चुनावी मैदान में नजर आ रहे हैं। इसके अलावा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय कभी कभी मंच साझा करते हैं। ऐसे में कांग्रेस के अंदर चल रही खींचतान को कांग्रेस हाईकमान को ब्रेक लगाना जरुरी है। जो कि राहुल की रैली के बाद एकजुट नजर आए तो ही कांंग्रेस उत्तराखंड में सत्ता की कुर्सी तक पहुंचा सकती है।

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