पंजाब की टेंशन निपटाते ही हरीश रावत के लिए उत्तराखंड में दलित कार्ड क्यों बना टेंशन? जानिए

हरीश रावत के दलित कार्ड पर कांग्रेस के अंदर ही विरोध

देहरादून, 22 सितंबर। पंजाब की टेंशन निपटाते ही हरीश रावत के लिए उत्‍तराखंड में नई टेंशन शुरू हो गई हैा हरीश रावत के पंजाब के दलित कार्ड खेलने के बाद से उत्‍तराखंड की राजनीति में भी सारे समीकरण बदले हुुए नजर आने लगे हैं हरीश रावत के उत्‍तराखंड में भी दलित सीएम बनाने की बात का उनकी ही पार्टी में विरोध शुरू हो गया हैा नेता प्रतिपक्ष और उत्‍तराखंड कांग्रेस के दूसरे बड़े चेहरे प्रीतम सिंह ने हरीश रावत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

Why did the Dalit card become tension in Uttarakhand for Harish Rawat as soon as Punjabs tension was settled? Learn

बहुत देर कर दी हजूर आते-आते
प्रीतम सिंह ने हरीश रावत के दलित सीएम बनाने के सवाल के जबाव में प्रीतम ने मीडिया को दिए बयान में कहा है कि 2002 में बनाते, 2012 में बनाते 2013 में बनाते, बहुत देर कर दी हजूर आते-आते। साफ है कि प्रीतम सिंह हरीश रावत के दलित कार्ड को किसी भी तरह से 2022 के विधानसभा चुनाव में उत्तराखंड में न​हीं आने देना चाहते हैं। इसके पीछे का यह भी कारण माना जा रहा है कि हरीश रावत अगर खुद किसी तरह से सीएम पद की रेस में पीछे रह गए तो अपने दलित कार्ड के सहारे अपने सहयोगी और विश्वस्त दलित चेहरे को सीएम बनाने की रणनीति पर भी फोकस कर सकते हैं। कांग्रेस के पास उत्तराखंड में हरीश रावत के करीबी प्रदीप टम्टा ही ​दलित चेहरा हैं। साफ है कि हरीश रावत प्रदीप टम्टा को भी चुनाव में आगे कर रहे हैं।

दलित कार्ड से भाजपा में बैचेनी, हरदा पर बोला हमला
हरीश रावत के दलित कार्ड से कांग्रेस के विरोधी गुट ही नहीं भाजपा के अंदर भी बैचेनी बढ़ गई है। हरीश रावत के ​दलित कार्ड खेलने से भाजपा को अपनी जमीन खिसकती हुई नजर आने लगी है। ऐसे में भाजपा लगातार हमलावर है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने एक बार फिर से हरीश रावत को घेरते हुए कहा कि चुनाव नजदीक आते ही कांग्रेस का दलित प्रेम कोई आश्चर्य करने वाली बात नहीं, क्योंकि कांग्रेस की यह रीति,नीति और परम्परा का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी में भी दलित मुख्यमंत्री को लेकर विरोधाभास है। नेता प्रतिपक्ष भी उनकी मंशा को नकार चुके हैं और कह चुके हैं कि इसमें देर हो गई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने राज्य में दलितों को अग्रिम पंक्ति में आने ही नहीं दिया और जब कांग्रेस ऐसा करती तो तब वहां हर बार कांग्रेस के नेता खुद ही सीएम की दौड़ में शामिल हो जाते है। कौशिक ने कहा कि पंजाब में भी कांग्रेस की कोई मंशा दलित मुख्यमंत्री को लेकर नहीं रही और चुनाव आते ही दलित समुदाय के व्यक्ति की चुनाव तक नियुक्ति कर जिससे वोट के लिए उनका इस्तेेमाल किया जा सके। ऐसा नहीं की यह आशंका हो, बल्कि खुद कांग्रेस ने नवजोत सिद्धू को सीएम के चेहरे के तौर पर घोषित भी कर दिया। मदन कौशिक ने कहा कि यही वोट बैंक की राजनीति उतराखंड में भी करने की कोशिश की जा रही है। आज कांग्रेस की अवसरवादी प्रवृति से कांग्रेस से दलित नेतृत्व और समुदाय ने दूरी बना ली है और अब वह कांग्रेस की इस्तेेमाल करने की नीति के झांसे में नहीं आने वाला है।

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