Uttarakhand:कौन हैं नए गवर्नर रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ? उनकी नियुक्ति के मायने समझिए
देहरादून, 15 सितंबर: उत्तराखंड के नए गवर्नर रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह का भारतीय सेना में बहुत ही सम्मानित करियर रहा है। डिप्टी आर्मी चीफ से रिटायर होने के तकरीबन पांच साल बाद उन्हें उस राज्य का राज्यपाल नियुक्त किया गया है, जो उनके जैसी शख्सियत के लिए काफी मायने रखता है। उत्तराखंड की उत्तरी सीमा उस वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से सटी है, जिसका उन्हें काफी लंबा अनुभव है। इसके अलावा देवभूमि उत्तराखंड पूर्व और मौजूदा सैनिकों और वीर-योद्धाओं की भी धरती मानी जाती है। आइए सेना में उनका लंबा करियर कैसा रहा है यह भी जानते हैं और साथ ही उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले उन्हें बेबी रानी मौर्य की जगह पर बिठाने के क्या मायने हो सकते हैं, ये भी देखते हैं।

कौन हैं उत्तराखंड के नए गवर्नर गुरमीत सिंह ?
लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (रिटायर्ड) भारतीय सेना के एक बहुत ही प्रतिष्ठित अफसर रहे हैं, जो फरवरी 2016 में अपने पद से रिटायर हुए थे। सेना में करीब चार दशकों के अपने कार्यकाल के दौरान वह कई हाई-प्रोफाइल जिम्मेदारियों को संभाल चुके हैं, जिसमें डिफ्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ का पद भी शामिल है। यही नहीं वे उस महत्वपूर्ण 14वीं कोर के भी कोर कमांडर रह चुके हैं, जो लद्दाख में चीन के साथ लगने वाली वास्तविक नियंत्रण रेखा की जिम्मेदारी संभालता है। वे एडिश्नल डीजी ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस की जिम्मेदारी भी देख चुके हैं, जो चीन से जुड़े सेना के रणनीतिक मामलों को देखता है। इसके तहत वह सात बार चीन की यात्रा भी कर चुके हैं और एलएसी से संबंधित सैन्य-कूटनीतिक मामलों को लेकर कई महत्वपूर्ण बैठकों में भी शामिल हो चुके हैं। गौरतलब है कि उत्तराखंड की उत्तरी सीमा भी एलएसी से ही शुरू होती है।

क्या है उत्तराखंड में पूर्व सैनिक होने का महत्त्व ?
उत्तराखंड में पूर्व सैनिक और सैनिकों की विधवाओं की अच्छी-खासी आबादी है। इसलिए वहां ये पूर्व सैनिक चुनावों में हमेशा से काफी अहमियत रखते हैं। पिछले उत्तराखंड विधानसभा चुनाव तक वहां तकरीबन 2.5 लाख पूर्व सैनिक वोटर रह रहे थे। इन वर्षों में उनकी आबादी जरूर बढ़ी है। यही वजह है कि तब भाजपा और कांग्रेस इस वोट बैंक पर डोरे डालते नजर आ रही थीं और अब तो आम आदमी पार्टी ने भी जोरदार एंट्री करने का मन बना लिया है। जाहिर है कि चुनाव से पहले एक पूर्व सैन्य अफसर को प्रदेश का गवर्नर बनाया गया है तो केंद्र की मोदी सरकार ने उनमें अपना भरोसा दिखाने की कोशिश की है।

रिटायर्ड कर्नल अजय कोठियाल की काट ?
पिछले महीने ही दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने सेना के रिटायर कर्नल अजय कोठियाल को अपना मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित किया है। इस मौके पर केजरीवाल ने अपनी स्टाइल वाली पॉलिटिक्स के तहत बताया था कि उन्होंने लोगों से फीडबैक के आधार पर यह फैसला लिया है। उन्होंने कहा था- 'लोगों का कहना है कि उन्हें एक देशभक्त फौजी चाहिए। सिर्फ एक देशभक्त फौजी ही देवभूमि के साथ न्याय कर सकता है।' माना जा रहा है कि रिटायर्ड कर्नल की काट के तौर पर रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल को राजभवन में बिठाकर भाजपा ने पूर्व फौजियों और उत्तराखंड के लोगों में मौजूद सेना के प्रति उच्च भावना के मुताबिक संदेश देने की कोशिश की है।

सिख समुदाय पर भरोसा दिखाने की भाजपा की कोशिश ?
रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह के गवर्नर बनने के साथ ही उत्तराखंड में राज्यपाल से लेकर चीफ सेक्रेटरी और अल्पसंख्यक आयोग के चीफ तक सभी सिख सिख समुदाय से जुड़े लोग हो गए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इसके जरिए भाजपा तराई क्षेत्र के सिख किसानों की नाराजगी दूर करना चाहती है, जो कि किसान आंदोलन में शामिल रहे हैं। उत्तराखंड में तराई इलाके उधम सिंह नगर और नैनीताल के मैदानी इलाकों के सिख किसान तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं।

शिक्षा से भी रहा है काफी लगाव
उत्तराखंजड के 8वें राज्यपाल गुरमीत सिंह डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कोर्स और नेशनल डिफेंस कॉलेज से ग्रैजुएट हैं। उन्होंने चेन्नई और इंदौर दो विश्वविद्यालयों से एमफिल कर रखा है। वे जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी से भारत-चीन सीमा मुद्दे पर इंस्टीट्यूट ऑफ चाइनीज स्टडीज से रिसर्च स्कॉलर भी रहे हैं। वह अपने शैक्षिक करियर के लिए भारतीय सेना से स्टडी लीव पर भी रह चुके हैं।












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