उत्तराखंड के सियासी रण में हरक सिंह के 'बयान बम' के क्या है मायने, दो रावतों की पिक्चर पर कूदे तीसरे रावत
हरक सिंह के निशाने पर पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत और हरीश रावत
देहरादून, 23 नवंबर। उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर हरक सिंह रावत बयानों के बम फोड़ने लगे हैं। हरक सिंह के निशाने पर इस बार पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत और हरीश रावत हैं। दोनों रावतों की मुलाकात के बाद सियासी गलियारों में कयास लगाए जाने लगे। जिसके बाद हरक सिंह ने तंज कस दिया। जिससे एक बार फिर राजनीति गर्मा गई है। ऐसे में एक बार फिर सवाल उठ रहा है कि चुनाव से पहले हरक सिंह की बयानबाजी का कब अंत होगा। या फिर हरक सिंह इसी तरह भाजपा की मुश्किलें बढ़ाते जा रही हैं।

हरीश और त्रिवेंद्र की फोटो हुई है वायरल
उत्तराखंड की सियासत की कोई तस्वीर सामने आए और हरक सिंह बयानबाजी न करे। ये कैसे हो सकता है। हरक सिंह ने कई बार भाजपा को अपने बयानों से असहज महसूस कराया है। रविवार को दो पूर्व सीएम हरीश रावत और त्रिवेंद्र सिंह रावत की मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने अपने-अपने फेसबुक पेज पर फोटो पोस्ट कर दी। जिसके बाद सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गई। इतना ही नहीं इस फोटो के पीछे हाल ही में सामने आई एक तस्वीर को बताया गया जिसमें एक शादी समारोह में हरीश रावत के अलावा कई दिग्गज नेता साथ नजर आए। जिसके बाद हरीश और त्रिवेंद्र की इस फोटो को उस फोटो से भी जोड़ा गया। जिसमें हरक सिंह, सुबोध उनियाल समेत कांग्रेस के कई चेहरे दिखाए दिए।

इस्तेमाल बारूद से धमाके की उम्मीद नहीं
हरीश रावत और त्रिवेंद्र की मुलाकात को लेकर हरक सिंह ने एक चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि इस्तेमाल बारूद से धमाके की उम्मीद नहीं की जा सकती। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उत्तराखंड छोटा सा प्रदेश है और राज्य हित में सभी को आपस में मिलते-जुलते रहना चाहिए। ऐसे में हरक सिंह और त्रिवेंद्र सिंह रावत के बीच एक बार फिर बयानों की जंग छिड़ना तय माना जा रहा है। हरक यहीं नहीं रूके उन्होंने कहा कि बारूद अगर प्रयोग कर दिया जाए और उसे दोबारा भरेंगे तो मैं समझता हूं कि आप धमाका होने की उम्मीद करेंगे। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। फर्क इससे पड़ता है कि जनता क्या चाहती है। उन्होंने एक बार फिर त्रिवेंद्र को निशाने पर लिया और कहा कि मैं चाहता हूं त्रिवेंद्र भाई से मिलूं पर वह कटे-कटे रहते हैं। उन्होंने आगे कहा कि अच्छा है सबको मिलते-जुलते रहना चाहिए। मैं तो कोटद्वार में सुरेंद्र भाई से मिलना चाहता हूं, लेकिन वह मुझे मिलते ही नहीं। मैं तो हरीश भाई से भी मिलने को तैयार हूं। चाहता हूं कि त्रिवेंद्र भाई से भी मिलूं, लेकिन वह कटे-कटे रहते हैं।

बयानों से प्रेशर पॉलिटिक्स
हरक सिंह कभी भी बयान देने से पीछे नहीं हटते हैं। इसे हरक सिंह की प्रेशर पॉलिटिक्स का एक हिस्सा माना जाता है। हरक सिंह हमेशा अपने बयानों से राजनीतिक दलों में चर्चा का विषय बने रहते हैं। इसके लिए वे किसी भी तरह के तंज से नहीं बचते हैं। हरक सिंह पूर्व सीएम हरीश रावत को भी निशाना बना चुके हैं। इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने बीचबचाव किया तो दोनों ने एक दूसरे पर तंज कसना बंद कर दिया। इसके बाद हरक सिंह ने त्रिवेंद्र के खिलाफ मोर्चा खोला। लेकिन हाईकमान की फटकार के बाद दोनों शांत हुए। अब एक बार फिर दोनों आमने सामने है। जिससे लड़ाई लंबी होना तय है। हरक सिंह के एक बार फिर बयानबाजी को हरक की नई रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। जिससे वे पार्टी के सामने एक बार खुद को आगे रखना चाहते हैं। हरक सिंह खुद चुनाव न लड़ने की बात करते आ रहे हैं। लेकिन इस बार वे अपनी बहू के लिए टिकट मांग रहे हैं। इस तरह वे पार्टी पर प्रेशर पॉलिटिक्स के जरिए पहचान बनाने में जुटे हैं।












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