आप को काउंटर करने के लिए क्या है भाजपा का प्लान, कैसे सैनिक वोटरों तक पहुंचेगी भाजपा

सैन्य सम्मान यात्रा के जरिए सैनिक वोटरों को रिझाने की कोशिश

देहरादून, 25 सितंबर। उ​त्तराखंड में राजनैतिक दल हर वर्ग को रिझाने के लिए अपनी-अपनी रणनीति तैयार करने में जुटे हैं। उत्तराखंड में अन्य वर्गों की तरह सैनिक वोटरों की भी अच्छी तादात है। जिसे अपने पक्ष में करने के लिए सबसे पहले आम आदमी पार्टी ने कर्नल अजय कोठियाल को अपना सीएम प्रत्याशी घोषित किया। अब आप की इस रणनीति को काउंटर करने के लिए भाजपा एक माह तक उत्तराखंड में सैन्य सम्मान यात्रा निकालेगी। इसके तहत शहीदों के घर-घर जाकर आंगन की मिट्टी इकट्टा होगी। जिससे सैन्यधाम तैयार किया जाएगा।

1734 परिवारों के घर पहुंचेगी भाजपा

1734 परिवारों के घर पहुंचेगी भाजपा

उत्तराखंड में की बीजेपी सरकार 7 अक्टूबर से एक माह तक सैनिकों के सम्मान में राज्यभर में सैन्य सम्मान यात्रा निकालने जा रही है। सैन्य सम्मान यात्रा की शुरूआत चमोली जिले से की जा रही है। इसमें हर शहीद के घर जाकर उनके आंगन की मिट्टी एकत्र की जाएगी। शहीद के घर के आंगन की मिट्टी का इस्तेमाल सैन्य स्मारक (सैन्यधाम) बनाने में किया जाएगा। उत्तराखंड के सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने बताया कि 7 अक्टूबर तक 7 नवंबर तक सैन्य सम्मान यात्रा निकाली जाएगी। इसमें शीर्ष नेतृत्व के किसी बड़े चेहरे के शामिल होने की भी संभावना जताई जा रही है। उन्होंने कहा कि इस दौरान उत्तराखंड के 1734 परिवारों के घर यात्रा पहुंचेगी।

भाजपा का कैडर वोट रहा है सैनिक वोटर

भाजपा का कैडर वोट रहा है सैनिक वोटर

उत्तराखंड में चुनावों में सैनिक वोटरों का सबसे अहम रोल रहता है। यह वोट भाजपा का कैडर वोट माना जाता है। जो कि राज्य में डेढ़ लाख से ज्यादा है। इस बार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रवाद को लेकर चुनावी माहौल गर्मा रहा है। साथ ही पहली बार उत्तराखंड के चुनाव में किस्मत आजमा रही आम आदमी पार्टी ने कर्नल अजय कोठियाल को सीएम प्रत्याशी बनाकर सैनिक वोटरों को अपनी और खींचने की कोशिश की है। भाजपा के लिए पहले ही किसान आंदोलन और तराई में दूसरे वर्गों ने मुश्किलें खड़ी कर रखी है। ऐसे में भाजपा के सामने अपने परंपरागत वोटर को बचाने का भी बड़ी चुनौती है।

राज्यपाल के जरिए भी दिया संदेश

राज्यपाल के जरिए भी दिया संदेश

उत्तराखंड में सैनिक वोटरों पर इस बार केन्द्रीय नेतृत्व की भी नजर है। चुनाव से पहले पहली बार उत्तराखंड को एक आर्मी पृष्ठभूमि का राज्यपाल मिला है। जिसे भाजपा की इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, वीएसम (सेवानिवृत्त) उत्तराखंड के आठवें राज्यपाल बने हैं। राज्यपाल ने शपथ ग्रहण के बाद अपने संबोधन में कहा कि पूर्व सैनिक, सैनिकों के बुजुर्ग माता-पिता और परिवार उनकी प्राथमिकता हैं। इनके स्वास्थ्य, पेंशन संबंधी समस्याओं के निस्तारण, पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना के लिए काम करेंगे। साफ है कि राज्यपाल के जरिए भी भाजपा यह संदेश देने में कामयाब रही है कि उत्तराखंड के सैनिकों और पूर्व सैनिकों के लिए राज्य सरकार गंभीरता से विचार कर रही है।

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