1 जून से होगा फूलों की घाटी का दीदार, करीब 200 मीटर तक बर्फ की गलियों के बीच से होकर गुजरेंगे पर्यटक
1 जून से फूलों की घाटी का ट्रैक शुरू होने जा रहा है। एक जून से 30 अक्तूबर तक ये ट्रैक पर्यटकों के लिए खुला रहता है। फूलों की घाटी चमोली जिले में है।

1 जून से फूलों की घाटी का दीदार कर सकेंगे। एक जून से 30 अक्तूबर तक ये ट्रैक पर्यटकों के लिए खुला रहता है। इस बार पर्यटकों को करीब 3 किमी लंबे ट्रैक पर घांघरिया से बामणधौड़ तक दो जगह पर हिमखंड करीब 200 मीटर तक बर्फ की गलियों के बीच से होकर गुजरना होगा।
2005 में यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया
समुद्र तल से 12995 फीट की ऊंचाई पर फूलों की घाटी है। यह जैव विविधता का खजाना है। 87.5 वर्ग किलोमीटर में फैली फूलों की घाटी को प्राकृतिक खूबसूरती और जैविक विविधता के कारण 2005 में यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया। यहां 500 से अधिक प्रजाति के रंग-बिरंगे फूल खिलते हैं। जुलाई से सितंबर तक यहां पोटेंटिला, प्राइमुला, एनिमोन, एरिसीमा, एमोनाइटम, ब्लू पाॅपी, मार्स मेरी गोल्ड, ब्रह्मकमल, फैन कमल जैसे कई फूल खिले रहते हैं।
करीब 3 किमी लंबा पैदल रास्ता
घाटी की खूबसूरती को करीब से देखने के लिए प्रतिवर्ष हजारों पर्यटक यहां पहुंचते हैं। फूलों की घाटी में आसपास कहीं रुकने का साधन नहीं हेै। ऐसे में सुबह छह बजे पर्यटक बेस कैंप घांघरिया से घाटी के लिए रवाना होते हैं और दो बजे बाद यहां से वापस घांघरिया लौट जाते हैं। फूलों की घाटी चमोली जिले में है। यहां पहुंचने के लिए बदरीनाथ हाईवे से होते हुए गोविंदघाट और फिर यहां से पुलना गांव तक वाहन के जरिये जाना होता है। पुलना से करीब 9 किमी पैदल चलकर बेस कैंप घांघरिया पहुंचना होता है। यहां से करीब 3 किमी लंबा पैदल रास्ता फूलों की घाटी के लिए जाता है।
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