Uttarkhand news: पंचायतों का महिलाओं के सिर्फ 3 आभूषण ही पहनने का फरमान, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस, जानिए क्यों
Uttarkhand news: सोने के आसमान छूते दामों के बाद उत्तराखंड में देहरादून के चकराता क्षेत्र में जनजातीय क्षेत्र जौनसार-बावर की पंचायतों का फरमान हर जगह चर्चे का विषय बना हुआ है। पंचायतों के तीन गांवों में शादी और अन्य समारोह में महिलाओं के केवल तीन सोने के आभूषण पहनने का फरमान जारी किया है।
जिसमें महिलाओं को केवल सोने की नाक की फूली, कान के बुंदे और गले में मंगल सूत्र पहनने की परमिशन दी गई है। जौनसार-बावर के कंदाण और इंद्रोली गांव पंचायतों के इस फरमान को लेकर सोशल मीडिया पर नई बहस छिड़ी हुई है।

एक तरफ जहां पंचायत का कहना है कि इससे ऐसे लोगों पर आभूषण बनाने का दबाव नहीं होगा, जो कि महंगे आभूषण खरीद नहीं सकते या वहन नहीं कर सकते हैं। वहीं दूसरी कुछ लोग खासकर महिलाओं का कहना है कि पुरुष समाज ब्रांडेड शराब से लेकर महंगे शौक पर खूब पैसा खर्च कर सकते हैं। तो महिलाएं आभूषण क्यों नहीं पहन सकते हैं। जबकि आभूषण परिवार की संपत्ति होती है।
जनजातीय क्षेत्र जौनसार-बावर में पारंपरिक रूप से राइणियों यानि विवाहित महिलाओं के सोने के आभूषण पहनने की परंपरा रही है। लेकिन जिस तरह से सोने और चांदी की कीमतें बढ़ती जा रही हैं, ऐसे में यह परंपरा गरीब परिवारों के लिए बोझ बनती जा रही है। जिसके बाद ये निर्णय लिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि कोई भी महिला आर्थिक रूप से कमजोर महसूस न करे, इसके लिए सामूहिक रूप से यह निर्णय लिया गया है।
बैठक में यह भी तय हुआ कि यदि कोई महिला इस नियम का उल्लंघन करती है तो उस पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया जाएगा। निर्णय के अनुसार गांवों के सभी परिवारों को इस नियम का पालन करना अनिवार्य होगा। बता दें कि इन दिनों सोना एक से डेढ़ लाख के बीच पहुंचा हुआ है। जबकि चांदी दो लाख तक पहुंची हुई है। ऐसे में आभूषण खरीदना आम आदमी के बजट से बाहर होता है।
जिन क्षेत्रों में महिलाओं का आभूषण पहनने का चलन है। वहां इस परंपरा को निभाना बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। ऐसे में ग्रामीणों ने सबको ध्यान में रखते हुए ये बड़ा निर्णय लिया है। बता दें कि आने वाले समय में शादियों का सीजन भी आने वाला है। क्षेत्र में इस निर्णय का स्वागत किया जा रहा है।












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