Uttarakhand Tunnel Rescue Video: सुरंग में 'मसीहा' बनकर पहुंचे मुन्‍ना क़ुरैशी से श्रमिक बोले-ये दौलत भी ले लो

Uttarakhand Silkyara Tunnel Workers Story: शाम को सूरज लगभग ढल चुका था, मगर उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले की सिलक्यारा टनल में फंसे 41 मजदूरों के लिए तो मानों उसी वक्‍त नया सूरज उदय हुआ था जब हम श्रमिकों के पास उम्‍मीद की किरण बनकर पहुंचे। (ऑडियो नीचे)

हम उनसे पहली बार मिले तो सारे श्रमिकों की आखों में आंसू थे। यूं तो वो इस टनल में आंसू बीते 17 दिन से बहा रहे थे, लेकिन आज के इन आंसुओं में राहत नजर आई और चेहरे पर खुशी थी।

Uttarakhand Silkyara tunnel

टनल में फंसे इन श्रमिकों का गला रुंधा हुआ था। लरजते लब सब कुछ बयां कर रहे थे। दिल की सारी पीड़ा उनींदी आंखें ही कह गई। हम पर उनकी बेपनाह मोहब्‍ब्‍त उमड़ आई थी। हमसे श्रमिक बस इनता कह पाए कि ''हम अपनी जान भी दे दें। दौलत भी दे दें। शौहरत भी दें दें। हमें तुमसे बहुत प्‍यार है। तुमने हमारी जिंदगी बचाई''

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    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बाहर निकाले गए श्रमिको से कर रहे हैं मुलाकात
    Uttarakhand Silkyara tunnel

    वन इंडिया हिंदी से बातचीत में मुन्‍ना कुरैशी ने 28 नवंबर 2023 की शाम को सिलक्यारा टनल से मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने के बाद ये बातें कही। मुन्‍ना कुरैशी टनल में रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन करने वाली आखिरी टीम के सदस्‍यों में से एक हैं।

    दरअसल, मुन्‍ना कुरैशी दिल्‍ली 94 खजुरी खास के राजीव चौक के रहने वाले हैं। इनकी खुद की कंपनी है, जो पहाड़ी इलाकों में रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन का काम करती है। रैट माइनर्स मुन्ना क़ुरैशी अपनी 12 लोगों की टीम के साथ सिलक्यारा टनल पर आए थे।

    बीते 17 दिन की तमाम कोशिशों के बाद मुन्‍ना कुरैशी और उनकी टीम श्रमिकों के लिए मानों आखिरी उम्‍मीद थे। खुशी इस बात की है कि ये उम्‍मीद पर खरे उतरे। मुन्‍ना ने अपनी टीम को लीड किया और रात सात-आठ बजे के आस-पास एक-एक सारे 41 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला।

    टनल से बाहर आए श्रमिकों से उत्‍तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व केंद्रीय राज्य मंत्री जनरल ( से.नि) वीके सिंह ने मुलाकात की। उनके हाल जाने और मुन्‍ना कुरैशी व उनकी टीम की भी जमकर सराहना की। वहां मौजूद हर कोई मुन्‍ना कुरैशी को रियल हीरो बताता नजर आया।

    बता दें कि उत्‍तराखंड के उत्‍तराकाशी जिले में यमनोत्री हाईवे पर सिल्‍कयारा टनल बनाई जा रही है। दिवाली की सुबह 12 नवंबर को 41 श्रमिक काम करके टनल से बाहर आ रहे थे तभी भूस्खलन के कारण टनल में फंस गए थे। फंसे भी ऐसे कि इन्‍हें सुरक्षित बाहर निकाले में 17 दिन लग गए।

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