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उत्तराखंड में बनेगी ट्रैकिंग नीति, रजिस्ट्रेशन के अलावा ट्रैक पर जाने से पहले करना होगा ये काम

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उत्तराखंड में ट्रैकिंग का व्यवसाय काफी बड़े स्तर पर किया जा रहा है। देश विदेश से लोग उत्तराखंड में रोमांच और शौक को पूरा करने के लिए ट्रैकिंग करने आते हैं। लेकिन कई बार उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ट्रैकिंग पर गए लोग फंस जाते हैं। स्थानीय लोगों से समन्वय कर लोग ट्रैकिंग का प्रोग्राम तो बना लेते हैं। लेकिन इसकी प्रशासन को जानकारी नहीं होती है। ऐसे में अब सरकार पर्यटकों की सुरक्षा के लिए ट्रैकिंग नीति पर काम कर रही है। पर्यटन विभाग की ओर से नीति का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। जिसमें कई प्रावधान किए जा रहे हैं। इसमें सबसे अहम ट्रैकरों का पंजीकरण अनिवार्य और दल के लीडर को एक सेटेलाइट फोन भी दिया जाएगा।

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ट्रैकिंग पर जाने वालों के लिए सरकारी गाइडलाइन फॉलो करनी होगी

उत्तराखंड में अब ट्रैकिंग पर जाने वालों के लिए सरकारी गाइडलाइन फॉलो करनी होगी। जिससे पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इससे प्रशासन को भी ट्रैकिंग पर गए पर्यटकों की जानकारी होगी। साथ ही किसी भी तरह की परिस्थिति होने पर मदद पहुंचाई जा सकेगी। पर्यटन विभाग इसके लिए नीति तैयार कर रहा है। जिसमें सबसे पहले ट्रैकरों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया जाएगा। इसके साथ ही दल के लीडर को एक सेटेलाइट फोन दिया जाएगा। जिससे पर्वतारोहण दल के किसी मुश्किल में फंसने या लापता होने की स्थिति में आसानी से लोकेशन का पता लग सकेगा। इसके अलावा प्रशिक्षण और अनुभव के आधार पर लाइसेंस देने के लिए नीति में प्रावधान किया जा रहा है।

सरकार पर्यटकों और ट्रैकरों की सुरक्षा के लिए नीति बना रही

उत्तराखंड में ट्रैकिंग पर्यटन के क्षेत्र में एक बड़ा व्यवसाय बनता जा रहा है। इस साहसिक पर्यटन को लेकर कई लोग हमेशा से ही उत्साहित देखने को मिलते हैं। कई बार ट्रैकिंग पर जाने वाले लोगों के साथ घटनाएं हो जाती हैं। ऐसे में सरकार पर्यटकों और ट्रैकरों की सुरक्षा के लिए नीति बना रही है। वर्ष 2003-04 में पर्वतारोहण के लिए गाइडलाइन बनाई थी। जो पेशेवर ट्रैकरों के लिए ही लागू थी। अब सरकार का विशेष ध्यान साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर है। जिससे बाहरी क्षेत्रों के पर्यटक ट्रैकिंग के लिए उत्तराखंड आ रहे हैं। ट्रैकिंग के लिए प्रदेश में अभी कोई नीति नहीं है। ट्रैकिंग करने वाले पर्यटक बिना किसी सूचना के ही ट्रेक रूट पर निकल जाते हैं। कोई हादसा होने पर सरकार व प्रशासन के पास भी ट्रैकिंग दल का कोई ब्योरा नहीं रहता है। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा है कि पर्यटन विभाग इस पर काम कर रहा है। इससे जहां सरकार के पास ट्रैकिंग पर जाने वाले लोगों का रिकॉर्ड होगा तो वहीं हर प्रकार की जानकारी भी होगी। उत्तराखंड में फूलों की घाटी, केदारनाथ, दयारा बुग्याल, चोपता, हर की दून, मसूरी, मुक्तेश्वर, ऋषिकेश, औली, जोशीमठ, रूद्रप्रयाग, पंचकेदार आदि कई ट्रैक रूट हैं।

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English summary
Tracking policy will be made in Uttarakhand, apart from registration, this work will have to be done before going on the track, the government is working on a tracking policy for the safety of tourists. The policy proposal is being prepared by the tourism department.
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