दिसंबर में ठंडा हुआ दलबदल का खेल, टिकटों के बंटवारे के फॉर्मूले ने बढ़ाई सियासी गर्मी

दिसंबर में ठंडा हुआ दलबदल का खेल, टिकटों के बंटवारे के फॉर्मूले ने बढ़ाई सियासी गर्मी

देहरादून, 10 दिसंबर। उत्तराखंड में जैसे-जैसे मौसम में सर्दी बढ़ती जा रही है। वैसे-वैसे चुनावी माहौल गर्माता जा रहा है। शासन-प्रशासन भी चुनावी तैयारियों में जुट गया है। राजनीतिक दलों की बात करें तो भाजपा, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, उत्तराखंड क्रांति दल, बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी पूरी तरह से चुनाव पर फोकस कर रहे हैं। इसके लिए सभी दल अपने-अपने बड़े चेहरों को मैदान में उतार चुके हैं। जिससे सियासी माहौल भी अपने-अपने पक्ष में किया जा सके। बीते सप्ताह में उत्तराखंड की सियासत में सबसे बड़ी खबर यही सामने आई कि पहले भाजपा नरेंद्र मोदी के जरिए विजय संकल्प का शंखनाद कर चुकी है। तो अब कांग्रेस राहुल गांधी को देहरादून लाकर विजय उत्सव रैली का आयोजन कर रही है। इस रैली के जरिए कांग्रेस पीएम मोदी की रैली का जबाव देंगे। साथ ही सैनिक परिवारों को सम्मानित कर चुनावी माहौल बनाने की कोशिश भी करेंगे। कांग्रेस के अलावा बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश भी पहाड़ की पॉलिटिक्स को गर्माने दिसंबर में ही उत्तराखंड आएंगे। आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल 5वीं बार उत्तराखंड दौरे पर रहेंगे। जिसके लिए इस बार काशीपुर को चुना गया है। काशीपुर आने का कार्यक्रम पहले 11 दिसंबर रखा गया था, जो कि अब 14 दिसंबर किया गया है।

 The game of defection cooled in December, ticket distribution formula increased political heat

किशोर के कदम पर सबकी निगाहें

पीएम नरेंद्र मोदी की रैली को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह और जोश जमकर नजर आया। ले​किन भाजपा कार्यकर्ताओं का जोश बढ़ने का कारण कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय को लेकर उड़ रही खबरें भी थी। जो कि मोदी के जाते ही ठंडी पड़ गई। सोशल मीडिया में किशोर उपाध्याय के भाजपा को ज्वाइन करने की खबरें लगातार उड़ती रही, लेकिन फिर इस पर विराम लग गया। हालांकि किशोर उपाध्याय के समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद किशोर के समाजवादी पार्टी में जाने की खबरें सोशल मीडिया में चलने लगी। जिसमें कुछ खास दम नजर नहीं आया। साफ है कि किशोर उपाध्याय कांग्रेस हाईकमान के कदम का इंतजार कर रहे हैं। उत्तराखंड में दिवाली से पहले जिस तरह के दलबदल को लेकर सियासत गर्माई हुई थी, वो दिसंबर तक आते ही ठंडी पड़ गई। कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत का भाजपा छोड़ने और कांग्रेस जाने की खबर लगातार सुर्खियों में बनी रही, लेकिन अब तक इस तरह के कोई संकेत पार्टी लाइन पर नजर नहीं आ रहा है।

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    दिसंबर में टिकट पर होगा फाइनल

    ऐसे में हर किसी की नजर अब टिकट बंटवारे पर टिक गई है। कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक देहरादून में हो चुकी है। जिसमें उम्मीदवारों के नामों पर मंथन हो चुका है। अब दिल्ली में हाईकमान नामों पर चर्चा करने के बाद दिसंबर अंत तक पहली सूची जारी कर सकता है। इसमें 32 से ज्यादा टिकटों पर फाइनल मुहर लगनी तय है। भाजपा में 40 से ज्यादा टिकटों पर संगठन स्तर से होमवर्क हो चुका है। जबकि 30 नामों को लेकर पार्टी अब भी संशय में है। इसके पीछे की वजह भाजपा के ऐसे सिटिंग विधायक माने जा रहे हैं जो सर्वे में पिछड़ गए है। इन सिटिंग विधायकों के टिकटों को लेकर भाजपा जनवरी के पहले सप्ताह तक का इंतजार कर सकती है। ऐसे में टिकटों के बंटवारे के बाद ही भाजपा, कांग्रेस में एक बार फिर दलबदल को लेकर सियासत गर्मा सकती है।

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