उत्तराखंड: चुनावी साल में घोषणाओं की बारिश लेकिन कर्ज की नाव पर अर्थव्यवस्था कब तक लगेगी पार

उत्‍तराखंड पर बढ रहा आर्थिक बोझ, आने वाले समय में बढ सकती हैं मुश्किलें

देहरादून, 27 अगस्त। चुनावी साल में उत्तराखंड की धामी सरकार ने सभी वर्गों को खुश करने के लिए घोषणाओं की झड़ी लगा दी है। चुनाव से पहले बीजेपी ने पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री बनाकर उनके सामने कई चेलेंज खड़े किए। मुख्यमंत्री के सामने चुनावी साल में लोगों की समस्याओं के समाधान से ज्यादा राज्य के कर्मचारी और अन्य संगठनों की मांगों का समाधान निकालने का भी दबाव है। इनमें से कई मांगों पर पुष्कर सिंह धामी ने चुनावी पिटारा खोल तो दिया है लेकिन मुख्यमंत्री के पिटारा खोलने से आने वाले समय में उत्तराखंड की आर्थिक स्थिति पर इसका बुरा असर पड़ सकता है।

Uttarakhand: Rain of announcements in the election year but how long will the economy sail on the boat of debt

दर्जनभर घोषणाएं कर चुके हैं सीएम
उत्तराखंड विधानसभा के मानसून सत्र में सीएम पुष्कर सिंह धामी ने चुनावी साल में दजर्नभर घोषणाओं की बारिश कर दी है। मानसून सत्र में 4 दिन में सबसे बड़ी घोषणा सरकारी अधिकारीयों और कर्मचारियों के लिए की है। जो कि 11 फीसदी की बढ़ोत्तरी के साथ रुका हुआ डीए देने की ऐलान है। इस घोषणा से प्रदेश के दो लाख से ज्यादा सरकारी कर्मियों और लाखों पेंशनधारकों को फायदा होगा। सीएम ने डीए को एरियर के साथ देने का ऐलान किया। इसके अलावा सीएम पुष्कर सिंह धामी ने परिवहन सेक्टर को छह महीने के लिए टैक्स छूट करने, बिजली के बिलों के फिक्स चार्ज पर भी तीन माह की छूट देने के अलावा पर्यावरण मित्रों को छह महीने तक दो-दो हजार रुपये की आर्थिक सहायता, पीएम स्वनिधि में रजिस्टर्ड लाभार्थियों को पांच महीने तक दो दो हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा भी की है। इन घोषणाओं से साढ़े 3 लाख लोग जुड़े हुए हैं। राज्य कर्मचारियों को डीए की घोषणा को अगर छोड़ दें तो बाकि सभी घोषणाएं करीब 202 करोड़ रुपये की है।

कर्ज में डूब रहा उत्तराखंड
उत्तराखंड के जाने माने वरिष्ठ पत्रकार जय सिंह रावत बतातें हैं कि राज्य सरकार ने बजट सत्र में 57 हजार करोड़ का बजट पेश किया। लेकिन खर्चे बढ़े तो 5 हजार करोड़ का अनुपूरक बजट पेश किया। राज्य में सिर्फ 13 हजार करोड़ टैक्स रेवन्यू होता है। जबकि 7-8 हजार करोड़ केन्द्र से मिलता है। इस तरह से 30 हजार करोड़ का अतिरि क्त भार पहले ही पड़ रहा है। 2007 में जब पूर्व सीएम स्वर्गीय नारायण दत्त तिवारी ने सीएम पद छोड़ा था तब राज्य पर 13 हजार का करोड़ का कर्ज था जो कि बढ़कर अब 66 हजार करोड़ हो गया है। इस तरह से राज्य 5 गुना अधिक कर्ज पर पहुंच गया है। कैग रिपोर्ट में भी इसका खुलासा हुआ है। उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकार जय सिंह रावत ने कहा कि

राज्य सरकार जिस तरह से काम कर रही है, उसका खामियाजा आने वाली सरकार और उत्तराखंड की जनता को भुगतना होगा। सरकार तरीके से काम नहीं कर रही है। राज्य पर 14 साल में 5 गुना कर्ज बढ़ गया है। जब सरकार के पास घोषणाओं को पूरा करने के लिए बजट नहीं बचेगा तो सरकार अपनी विकास योजनाओं का पैसा दूसरे मदों में खर्च करेगी। जिसका असर उत्तराखंड की विकास योजनाओं में पढ़ेगा।

सरकार के चुनावी साल में घोषणाओं की बारिश पर कांग्रेस भी हमलावर हो गई है। कांग्रेस का कहना है कि कैग रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि राज्य सरकार को जितना ऋण चाहिए उससे ज्यादा ऋण सरकार ले रही है। जिसके पीछे सरकार की मंशा पर सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता डॉ आर पी रतूड़ी ने कहा कि

राज्य सरकार जबरन प्रदेश को कर्ज के बोझ में धकेलने का काम कर रही है। एक तरफ बीजेपी कहती है प्रदेश में डबल इंजन की सरकार है, दूसरी तरफ डबल इंजन राज्य सरकार की मदद नहीं कर रही है। राज्य सरकार जरुरत से ज्यादा ऋण ले रही है। जिससे सरकार की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।

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