समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य बनेगा उत्तराखंड, सीएम धामी ने बताया कितना समय लगेगा

उत्तराखंड सीएम ने बताया 2 माह में मिल जाएगी समिति की रिपोर्ट

देहरादून, 31 अगस्त। उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बनेगा जो समान नागरिक संहिता लागू करने जा रहा है। मुख्‍मयंत्री पुष्‍कर सिंह धामी ने कहा है कि समिति से अगले दो माह में रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है।सरकार ने इसे लागू करने के लिए समिति को छह माह का समय दिया है। इसे तय समय पर लागू कर दिया जाएगा।

Uttarakhand pushkar singh dhami become the first state to implement Uniform Civil Code

27 मई को समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए एक समिति बनाने का निर्णय

उत्तराखंड में भाजपा ने विधानसभा चुनाव के दौरान सत्ता में आने पर प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने का ऐलान किया था। बीते 27 मई को सरकार ने प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए एक समिति बनाने का निर्णय लिया। जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई ,सेवानिवृत्त, की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया। समिति में न्यायाधीश,सेवानिवृत्त, प्रमोद कोहली, उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह, दून विश्वविद्यालय की कुलपति डा सुरेखा डंगवाल, सामाजिक कार्यकर्ता मनु गौड़ एवं सदस्य सचिव अजय मिश्रा शामिल हैं। समिति की अब तक तीन बैठकें हो चुकी हैं। यह समिति मौजूदा कानून में संशोधन करने के साथ ही विवाह, तलाक, संपत्ति के अधिकार व उत्तराधिकार से संबंधित मामलों का भी अध्ययन कर रही है।

समिति से अगले दो माह में रिपोर्ट मिलने की उम्मीद

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि समिति की बैठकें हो रही हैं। इसका ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। धामी ने कहा है कि प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करना प्रदेश की जनता के सामने लिया गया संकल्प है। सरकार इस दिशा में आगे बढ़ रही है। समिति से अगले दो माह में रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है। सरकार ने इसे लागू करने के लिए समिति को छह माह का समय दिया है। इसे तय समय पर लागू कर दिया जाएगा।

आजादी के बाद से भारत के किसी भी राज्य ने समान नागरिक संहिता को लागू नहीं किया
वर्तमान में देश में गोवा एक ऐसा राज्य है, जहां समान नागरिक संहिता लागू है। यह कानून पुर्तगालियों ने 1867 में गोवा में लागू किया था। जिसे पुर्तगाली सिविल कोड कहा जाता था। बाद में जब भारत ने 1961 में गोवा को पुर्तगालियों के कब्जे से आजाद कराया तो इसके बाद साल 1962 में भारतीय संसद ने गोवा सिविल कोड जारी रखने की मंजूरी दी। तकनीकी रूप से देखा जाय तो आजादी के बाद से भारत के किसी भी राज्य ने समान नागरिक संहिता को लागू नहीं किया है। ऐसे में अगर उत्तराखंड सरकार इसे लागू करती है तो वह पहला राज्य होगा।

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