Uttarakhand News: सीएम धामी ने रामधारी सिंह दिनकर की पुण्यतिथि पर किया नमन, जानिए क्या बोले मुख्यमंत्री
Uttarakhand News: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ट्वीट कर यह जानकारी साझा की है।
सीएम धामी ने ट्वीट कर लिखा कि 'राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' जी की पुण्यतिथि पर शत्-शत् नमन। आपकी कालजयी रचनाएं सदैव हमारे मन-मस्तिष्क में राष्ट्र प्रेम, वीरता व साहस का भाव सृजित करती रहेंगी।'

आपको बता दें कि सिंहासन खाली करो कि जनता आती है। इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ दिल्ली के रामलीला मैदान में जयप्रकाश नारायण ने जब यह पंक्ति पढ़ी तो उनके पीछे लगभग पूरा देश खड़ा हो गया था। इस पंक्ति के रचयिता थे कवि, लेखक और निबंधकार रामधारी सिंह दिनकर जो एकमात्र ऐसे कवि हैं। जिन्हें सर्वमान्य रूप से राष्ट्रकवि का दर्जा हांसिल है। देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उनकी कविताओं के इतने मुरीद थे कि संसद तक ले आए और तीन कार्यकाल उन्हें दिए। यह बात और है कि नेहरू जी के खिलाफ दिनकर संसद में खुलकर बोलते थे और प्रधानमंत्री उनकी बातों का संज्ञान भी लेते थे।
रामधारी सिंह दिनकर ने साल 1974 में आज ही के दिन इस दुनिया को अलविदा कहा था। उनका जन्म बिहार के बेगूसराय जिले में स्थित सिमरिया गांव में 23 सितंबर 1908 को एक गरीब परिवार में हुआ था। वह तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर थे। बचपन से ही रामधारी सिंह के पढ़ाई के शौक को देखते हुए बाकी दोनों भाइयों ने अपनी पढ़ाई छोड़ दी। जिससे आर्थिक रूप से उनकी पढ़ाई में कोई बाधा न आए और होता भी क्यों नहीं दोनों भाइयों के नुनुआ यानी रामधारी सिंह से दोनों को इतना लगाव जो था।
मैट्रिक की पढ़ाई पूरी करने के बाद रामधारी सिंह ने पटना विश्वविद्यालय से बाकी डिग्री हांसिल की और नौकरी की तलाश करने लगे। लेकिन मिली नहीं। साल 1930 के दौर में अंग्रेजों के खिलाफ राजनीतिक रूप से आंदोलन सक्रिय था। महात्मा गांधी की अगुवाई में सविनय अवज्ञा आंदोलन चल रहा था। उसी वक्त रामधारी सिंह भी इस आंदोलन से जुड़ गए और अंग्रेजों पर अपनी लेखनी से कड़ा प्रहार करने लगे। उन्होंने जब लिखना शुरू किया तो देखते ही देखते साहित्य की ओर उनका झुकाव बढ़ने लगा। फिर कविताओं में अंग्रेजी शासन के खिलाफ विद्रोह और ओज का स्वर अपने आप आने लगा और उन्होंने अपना उपनाम रखा दिनकर।












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