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Uttarakhand news: मदरसा बोर्ड होगा खत्म! भविष्य की चिंता, प्राधिकरण पर क्या है मुस्लिम की राय, Ground report

उत्तराखंड में धामी सरकार ने मदरसा बोर्ड खत्म करने का फैसला लिया है। साथ ही राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन करने का फैसला लिया है। जो कि मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी समुदायों के शैक्षिक संस्थानों को मान्यता देगा।

मदरसा बोर्ड को खत्म कर प्राधिकरण बनाने के सरकार के फैसले को लेकर मुस्लिम समुदाय की आपत्ति भी सामने आ रही हैं। सरकार के इस फैसले को लेकर मदरसा संचालक और मुस्लिम वर्ग के लोग क्या कहते हैं और मदरसों के भविष्य को लेकर उनकी क्या चिंताएं इसको लेकर वन इंडिया ने देहरादून में ग्राउंड रिपोर्ट की।

Uttarakhand Madrasa board abolished Concern what opinion Muslims authority dehradun ground report

जमात उलेमा-ए-हिंद के कोषाध्यक्ष अब्दुल सतार मदरसा प्रबंधक भी हैं। उनका कहना है कि मदरसा बोर्ड के पास मान्यता देने और परीक्षा कराने के साथ ही अन्य शक्तियां दी गई थी। जो कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण को कैसे मिल सकती है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार का अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान आयोग वर्तमान में संचालित हो रहा है। जहां से मदरसे संचालित हो रहे हैं। अन्य धर्म के भी शिक्षण संस्थान मान्यता लिए हुए हैं।

उन्होंने कहा कि मदरसों को इस बात का कन्फ्यूजन है कि जिस तर्ज पर केंद्र से मान्यता मिल पाएगी। ऐसे में सरकार को साफ करना होगा कि मदरसों का भविष्य क्या होगा। मदरसे कहां से मान्यता लेंगे और कौन से बोर्ड की पढ़ाई कराऐंगे। इसके साथ ही उन्होंने ये भी सवाल किए कि मदरसों में जो धार्मिक गति​विधि या शिक्षा दी जाती है, क्या उन पर कोई बदलाव तो नहीं होगा।

जब हर बोर्ड को अपनी धार्मिक शिक्षा देने का अधिकार है तो भी मदरसों को क्यों नहीं। अभी तक हम शिक्षा विभाग के मानकों के हिसाब से ही पढ़ाई करा रहे थे। उन्होंने कहा कि मदरसा बोर्ड पहले से ही इनएक्टिव मोड में रहता है। हमें आज तक कोई इसका लाभ नहीं हुआ। ​हमें जो भी मिलता है वह शिक्षा विभाग से मिला है।

उन्होंने कहा कि करीब 50 ह​जार से ज्यादा बच्चों का भविष्य इस प्राधिकरण के आने के बाद खतरे में पड़ सकता है। अब्दुल वाजिद मदरसेे में तालीम यानि पढ़ाई करातें हैं। उन्होंने कहा कि जो सिस्टम चल रहा है मदरसा बोर्ड के जरिए धार्मिक के साथ ही अन्य सब्जेक्ट की भी पढ़ाई कराई जाती है। मदरसा बोर्ड में बदलाव नहीं होना चाहिए।

मदरसे बोर्ड के अस्तित्व खत्म होने के मुद्दे पर भाजपा नेता और वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स का कहना है कि धामी सरकार का ये फैसला ऐतिहासिक है। ये विधेयक के रुप में जल्द ही विधानसभा से पास हो जाएगा। शादाब शम्स का कहना है कि मदरसा बोर्ड की डिग्री की कोई अब तक कोई समक्षकता नहीं है।

मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को डिग्री की कोई वैल्यु नहीं ​थी। अब तक बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होता आ रहा था। धामी सरकार ने प्राधिकरण बनाने की पहल की है। जिससे अल्पसंख्यक बच्चों का भविष्य सुरक्षित होगा। प्राधिकरण मान्यता देने का काम करेगा नकी छीनने का विषय है। मदरसों के बच्चों को हर प्रकार की शिक्षा देनी चाहिए। उन्होंने कहा वन नेशन वन एजुकेशन होना चाहिए।

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