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Uttarakhand Home Stay Scheme पलायन रुकने के साथ युवाओं को मिल रहा घर बैठे रोजगार, कैसे बदल रही पहाड़ की तस्वीर

Uttarakhand Home Stay Scheme उत्तराखंड पहाड़ी और खूबसूरत राज्य, जितना सुंदर और प्राकृतिक संसाधनों से भरा प्रदेश है। उतना ही कठिन यहां के लोगों के लिए जीवन यापन और रोजगार का साधन जुटाना है। यही वजह है कि पहाड़ी प्रदेश में पलायन सबसे बड़ी समस्या रही है।

प्रदेश में पर्यटन ही एक मात्र रोजगार का बड़ा साधन है, जिसे अब युवाओं को जोड़ने के लिए राज्य सरकार ने होमस्टे योजना संचालित की है। पर्यटन गतिविधियों को लेकर प्रदेश सरकार के माध्यम से संचालित विभिन्न योजनाएं पहाड़ के लोगों के लिए मील का पत्थर साबित हो रही है।

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5 हजार से ज्यादा होमस्टे पंजीकृत

उत्तराखंड में होम स्टे योजना बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा जरिया बन रहा है। इसकी तारीफ खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में की थी। उत्तराखंड में वर्तमान में 5 हजार से ज्यादा होमस्टे पंजीकृत हैं। जिससे हजारों परिवारों को रोजगार मिल रहा है। इससे जहां युवाओं को रोजगार मिल रहा है, तो व​हीं पलायन पर भी ब्रेक लग गया है। होमस्टे से युवाओं को घर बैठे रोजगार मिल रहा है।

चकराता की नीलम का होमस्टे नंबर- 1

उत्तराखंड के रजत जयंती वर्ष के अवसर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सर्वश्रेष्ठ होमस्टे संचालक के तौर पर चकराता ब्लॉक की ग्राम पाटी की निवासी नीलम चौहान को पुरस्कृत किया गया। पहाड़ी वास्तुकला से बना नीलम का ''हरुल-ए-बुटीक होमस्टे'' बड़े पैमाने पर पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। साथ ही स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा दे रहा है। चकराता ब्लॉक की ग्राम पाटी की निवासी नीलम चौहान ने वर्ष 2022-23 में स्वरोजगार हेतु पर्यटन विभाग की पंडित दीनदयाल उपाध्याय होमस्टे योजना के अंतर्गत 15 लाख की राजकीय सहायता प्राप्त कर होमस्टे व्यवसाय शुरू किया।

प्रति वर्ष 25 से 30 लाख की आय

पहाड़ी वास्तुकला से बना नीलम का हरुल-ए-बुटीक होमस्टे बड़े पैमाने पर पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। साथ ही स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा दे रहा है। चकराता की पहाड़ियों में बसा नीलम चौहान का 06 भवन और डाइनिंग हॉल समेत कॉटेज वाला हरुल-ए-बुटीक होमस्टे पर्यटकों को चकराता की सुंदर वीडियो का भी अनुभव कर रहा है। जहां से पर्यटक सीधे टाइगर फॉल, देवबन, बंदरपंच के बर्फीले शिखर के साथ चकराता की सुंदरता को निहार रहे हैं। पहाड़ी व्यंजनों जैसे मंडवा की रोटी, गहत का शूप, झगोरे की खीर का स्वाद इस होमस्टे में पर्यटकों का दिल छू रहा है। इस होमस्टे के व्यवसाय से नीलम प्रति वर्ष 25 से 30 लाख की आय अर्जित कर रही है।

गांव के 07 लोगों को होमस्टे में रोजगार

नीलम ने पर्यटकों की सुख सुविधाओं के साथ गांव के 07 लोगों को होमस्टे में रोजगार देकर जॉब गिवर के तौर पर भी मिसाल पेश की है। नीलम चौहान ने बताया कि सरकार द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाएं वास्तव में महिलाओं के लिए एक सुनहरा अवसर है। पर्यटन विभाग से पंडित दीनदयाल उपाध्याय होम स्टे योजना से उन्होंने अपना होम स्टे बनाकर तैयार किया।

स्वरोजगार से जुड़कर न केवल आत्मनिर्भर बनी

उन्होंने बताया कि होमस्टे में पहाड़ी व्यंजनों के साथ यहां की सुंदरता भी पर्यटकों को काफी लुभा रही है। नीलम ने बताया कि महिलाएं इस रोजगार से जुड़कर अपने आप को आत्मनिर्भर बना सकती हैं। जिला पर्यटन अधिकारी वृजेन्द्र पांडेय ने बताया कि जनपद देहरादून की चकराता निवासी नीलम चौहान ने पर्यटन विभाग की पंडित दीन दयाल उपाध्याय होम स्टे योजना का लाभ लिया। जिससे कि वे स्वरोजगार से जुड़कर न केवल आत्मनिर्भर बनी है, बल्कि आसपास के लोगों को रोजगार देकर एक प्रेरणा का काम कर रही है।

विदेशों की नौकरी छोड़कर पहाड़ी परिवेश में रोजगार

होमस्टे योजना से प्रभावित होकर कई युवा विदेशों की नौकरी तक छोड़कर अपने शुद्ध पहाड़ी परिवेश में रोजगार के लिए आए हैं। यूपी के मेरठ की मीनाक्षी और देहरादून की स्तुति हरसिल घाटी की खूबसूरत वादियों में पुराने​ घरों को सजाने और संवारने का काम कर रही हैं। खास बात ये है कि दोनों पढ़ी लिखी होने के साथ ही विदेश में लाखों की नौकरी छोड़कर इन पहाड़ों में अपनी अलग पहचान में जुटी है। दोनों हरसिल घाटी के धराली गांव में एक पुराने घर को होम स्टे के रूप में चला रही है। जिन्होंने पहाड़ी कल्चर और रहन सहन के साथ खुद को ढ़ालकर पर्यटकों के लिए एक नया डेस्टिनेशन तैयार किया है।

सेब के बगीचों के बीच में एक जबरदस्त व्यू

पुराने मिट्टी, पत्थर और लकड़ी के बने घर हरसिल घाटी की खूबसूरत वादियों में धराली गांव के इस पुराने मिट्टी, पत्थर और लकड़ी के बने घर को नाम दिया है Apples & Gulaab - by Madogiri (@applesandgulaab)। होम स्टे सेब के बगीचों के बीच में एक जबरदस्त व्यू के साथ पर्यटकों को शांति और सुकून का एहसास कराता है। मीनाक्षी ने बताया कि वह यहां आने वाले टूरिस्ट को वाइब्रेंट विलेज के 8 गांवों, सातताल, कल्पकेदार मंदिर, मुखबा गांव, हर्षिल, बगोरी गांव में वॉक के साथ पुराने घर और बहुत सारी संस्कृति से परिचय कराती हैं। उन्होंने बताया कि पीएम मोदी के आने के बाद भारत चीन बॉर्डर सीमा पर बसे जादुंग गांव भी लोग जा रहे हैं जो कि यहां से बहुत पास है।

भारत-चीन अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बसे जादुंग गांव में भी होमस्टे

भारत-चीन अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बसे जादुंग गांव को दोबारा बसाने के लिए पर्यटन विभाग और गढ़वाल मंडल विकास निगम की ओर से 6 होमस्टे के निर्माण का कार्य शुरू हो गया है। भारत-चीन के बॉर्डर पर प्राकृतिक रोमांच पर्यटन को पर्यटकों के लिए पहले चरण में 6 होमस्टे बन रहे हैं। इसके बाद दूसरे चरण में 17 होमस्टे बनाए जाएंगे। जिसके बाद उम्मीद जताई जा रही है पर्यटकों को ये जगह खास पसंद आएगी। ये गांव 1962 के भारत-चीन युद्ध के समय खाली कराए गए थे। जनकताल ट्रेक प्रकृति के अभुद्ध नजारों के बीच रोमांच जादुंग गांव में होमस्टे बनने के बाद पर्यटक यहां आसपास की प्राकृतिक सुंदरता का भी आनंद ले सकेंगे।

क्या है होम स्टे योजना-

  • अतिथि उत्तराखण्ड गृह आवास (होम स्टे) नियमावली के माध्यम से राज्य के शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ दूरस्थ पर्यटक क्षेत्रों में होम स्टे योजना राज्य सरकार की तरफ से शुरू की गई है।
  • इसके जरिए पर्यटकों को पहाड़ी घरों में पहाड़ी व्यंजनों का स्वाद का आनंद भी प्राप्त होता है।
  • होम स्टे पर्यटकों के रुकने के लिए जगह है। जैसे शहरों में होटल होते हैं, गांवों में होम स्टे को इसी तर्ज पर शुरू किया जाता है।
  • होम स्टे पहाड़ों में बने बनाए घर को थोड़ा मोडिफाइड कर और मॉर्डन लुक देकर तैयार किया जाता है।
  • होम स्टे कॉन्सेप्ट सरकार की तरफ से स्थानीय लोगों को रोजगार देने के मकसद से शुरू किया गया है। जिससे की स्थानीय लोगों के पर्यटकों को अपने यहां पर रुकवाने से आमदनी हो और पर्यटकों को पहाड़ में रुकने के लिए नेचुरल फीलिंग हो।

आवेदन कैसे करें-

होम स्टे के लिए आवेदन करने के लिए उत्तराखंड टूरिज्म की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए उत्तराखंड सरकार की पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर पूरी जानकारी उपलब्ध करवाई गई है। नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर आप जानकारी भी ले सकते हैं।

  • Registration (uttarakhandtourism.gov.in)

आवेदन करने के लिए शर्तें-

  • आवासीय इकाई पूर्णत आवासीय परिसर हो और भवन का मालिक अपने परिवार के साथ उसमें निवास करता हो।
  • होम स्टे में किराए पर उठाने वाले कक्षों की अधिकतम संख्या 6 और न्यूनतम संख्या एक कक्ष की होगी। किसी भी कक्ष में चार से ज्यादा बेड नहीं लगाए जा सकते हैं।
  • हर होम स्टे में शौचालय का निर्माण करना अनिवार्य है। जबकि बिजली, पानी और हवादार होना जरूरी है।
  • होम स्टे के लिए शहरी क्षेत्र में विकास प्राधिकरण/स्थानीय निकास और ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम प्रधान द्वारा इस योजना के पंजीकरण के लिए एनओसी प्रमाण-पत्र होना जरूरी है।
  • क्षेत्रीय या जिला पर्यटन विकास अधिकारी पंजीकरण के लिए सभी कार्यवाही आवेदन मिलने की तारीख के 30 दिन की समय सीमा के भीतर पूरा करायंगे।
  • निर्धारित दरों को भवन के उचित स्थान पर प्रदर्शित करना जरूरी है।

हमारी सरकार द्वारा उत्तराखण्ड के ग्रामीण क्षेत्रों में होम स्टे बनाने पर सब्सिडी प्रदान की जा रही है। उत्तराखण्ड सरकार की होम स्टे योजना से राज्य के दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बड़ा लाभ मिल रहा है। सुदूर पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही से जहां एक ओर रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यह रिवर्स पलायन में भी सहायक सिद्ध हो रहा है।

- सीएम पुष्कर सिंह धामी

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