उत्तराखंड: द्रौपदी का डांडा-2 पर्वत चोटी में एवलांच, 2 की मौत, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जताया दुख
देहरादून, 04 अक्टूबर। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में डोकरानी बामक ग्लेशियर में एवलांच हो गया। एवलांच की चपेट में आने से नेहरू पर्वतारोहण संस्थान,निम के 29 लोग फंस गए। इनमें दो लोगों की मौत भी हो गई। वहीं, फंसे हुए अन्य लोगों को बचाया जा सके, इसके लिए एयरफोर्स की मदद ली जा रही है। जानकारी के मुताबिक अब तक 8 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। जबकि अन्य अब भी लापता हैं।

इस हादसे को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दुख जताया है। उन्होंने कहा कि उत्तरकाशी में नेहरू पर्वतारोहण संस्थान द्वारा किए गए पर्वतारोहण अभियान में भूस्खलन के कारण बहुमूल्य जानमाल के नुकसान से गहरा दुख हुआ। अपने प्रियजनों को खोने वाले शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएं।
हादसे को लेकर रक्षा मंत्री ने मुख्यमंत्री पुष्कर धामी से भी बात की। उन्होंने कहा कि मैंने वायुसेना को बचाव और राहत अभियान चलाने का निर्देश दे दिया है। CM पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से बात कर रेस्क्यू ऑपरेशन में तेजी लाने के लिए सेना की मदद मांगी है। रेस्क्यू के लिए एयरफोर्स के 2 चीता हेलिकॉप्टर लगाए गए हैं।
वहीं, इस संबंध में जानकारी देते हुए उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि हिमस्खलन में फंसे 29 प्रशिक्षुओं में आठ को सुरक्षित निकाल लिया गया है। जबकि अन्य को बचाने के लिए वायुसेना के हेलिकॉप्टर तैनात किए हैं।
डीजीपी के मुताबिक पर्वतारोहण संस्थान का एक ग्रुप, जो द्रौपदी के डंडा -2 पर्वत शिखर तक के लिए माउंटेनिंग कर रहा था। यह संस्थान 18,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। सुबह करीब 8 बजे हिमस्खलन आया और 29 लोग फंस गए। आठ को टीम के सदस्यों ने फौरन बचा लिया। हालांकि, अभी मौतों को लेकर स्थिति साफ नहीं है।
आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय पुलिस ने सूचना मिलते ही बचाव अभियान शुरू कर दिया है। सभी घायलों और फंसे हुए लोगों को पहले लगभग 13,000 फीट की ऊंचाई पर एक हेलीपैड पर ले जाया जाएगा, जहां से उन्हें मतली हेलीपैड लाया जाएगा। इसके बाद उन्हें आईटीबीपी के अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा।
वहीं, इस हादसे पर गृहमंत्री अमित शाह का भी बयान आया है। उन्होंने कहा कि उत्तरकाशी में हिमस्खलन की चपेट में आए 29 ट्रेनी पर्वतारोहियों पर स्थानीय प्रशासन, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी और सेना की टीमें राहत और बचाव अभियान में लगी हुई हैं।
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